दिवाली या दिपावली 2019 मे कब है? तिथि, मुहूर्त, कहानी या कथा, निबंध और महत्व when is diwali or deepawali in 2019? in hindi, date and time of deepawali in hindi

दिवाली या दिपावली 2019 कब है मुहूर्त कहानी कथा निबंध Happy Diwali 2019


  वैसे तो भारत त्यौहार का देश कहा जाता है यहां कोई न कोई त्यौहार लगभग रोज ही रहता है परंतु इन सभी त्यौहारों के बीच दीपावली का एक विशेष महत्व है इस दिन पूरा भारत एक दुल्हन की तरह सजा हुआ दिखाई देता है मिट्टी के दियों से हर तरफ उजाला फैल जाता हैं ।

दीपावली क्यों मनाई जाती है ? 


असल में आज ही के दिन दशरथ नंदन प्रभु श्री राम रावण को मृत्यु के घाट उतार कर अपनी पत्नी माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे । पुरुषोत्तम राम ने पिता की आज्ञा के अनुसार राजमहल को छोड़ 14 बरस तक वन में अपना जीवन बिताया था । इसी बीच दुष्ट पापी रावण ने सीता का हरण कर लिया जिसके कारण राम ने लंका पर चढ़ाई कर रावण का वध कर दिया और इस प्रकार उन्होंने माता सीता को लेकर 14 वर्ष पूरे होने के बाद अयोध्या चले आए । अयोध्या की जनता राम के आने को लेकर काफी खुश थी उन्होंने इस सुखद अवसल पर पूरे अयोध्या नगरी में मिट्टी के दीए जलाएं जिससे अमावस्या की रात भी चकाचोंध हो गई थी तभी से संपूर्ण भारत में दीपावली मनाई जाती है जिसे दीवाली भी कहा जाता है ।

दिवाली और दशहरे में संबंध 


जब रावण ने सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया था तब राम ने उससे युद्ध कर उसे छठी का दूध याद दिलाया और उसे मृत्यु के घाट उतार दिया । रावण को मारकर राम ने असत्य पर सत्य की विजय  और  बुराई पर अच्छाई की  विजय को दर्शाया था इसीलिए इस दिन को दशहरे के रुप में मनाया जाता है रावण के वध के ठीक 20 दिन बाद अर्थात दशहरे के ठीक 20 दिन बाद राम माता सीता को लेकर अयोध्या लौटे थे इसलिए दशहरे के 20 दिन बाद दीपावली मनाई जाती है ।


कब है दिवाली 2019 में तिथि एवं पूजन मुहूर्त 


इस बार दिवाली 27 अक्टूबर 2019, दिन रविवार को मनायी जाएगी चूंकि दीपावली कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के प्रदोष काल में मनाया जाता है क्योंकि इसे दीपावली का शुभ मुहूर्त माना जाता है इस बार इसका समय अर्थात दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त 6:35 बजे से रात्रि 8:15 तक रहेगा इस समय आप माँ लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं ।

दीपावली की पूजन विधि


 दीपावली प्रकाश के साथ-साथ स्वच्छता का भी त्यौहार माना जाता इसीलिए सभी लोग दीपावली के आगमन से पहले ही घरों की अच्छी प्रकार साफ-सफाई कर लेते हैं घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है । प्रयुक्त होने वाले सारे दीयों को ठीक से धुलकर उन्हें सुखा लें उसके बाद उनको एक जगह सजाकर उनमें तेल और बाती भी लगा दे  पूजन की सारी सामग्री जैसे अक्षत, मीठा, जल अगर गंगाजल हो तो और ज्यादा अच्छा है,  पंचामृत, कलश सिंदूर, दही, देशी घी, इकट्ठा करले ।

 उसके बाद मां लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा अथवा उनकी फोटो जो आपके पास हो उसे रख कर मंत्रों के उच्चारण के साथ विधि विधान से पूजन करें शुद्ध जल से स्नान कराते हुए उन्हें माला पहनाए और मिष्ठान चढ़ाएं, इसके उपरांत अछत  को चढ़ाने के बाद एक दिए को जलाएं और उससे धीरे-धीरे करके सारे दियो को जलाए इसके उपरांत मां लक्ष्मी की आरती करें प्रभु गणेश की आरती करें तत्पश्चात दियो को आसपास के मंदिरों में एवं घर के कोने कोने में रखें ।
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धनतेरस 


  समुद्र मंथन मे  भगवान धन्वंतरि उत्पन्न हुए थे । तभी से धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है ।
  धनतेरस की शाम मिट्टी का दीपक जलाकर उसे घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज  के लिए रखा जाता है और फिर भगवान धनतेरस की विधि विधान से पूजा की जातीं है ।
  धनतेरस में लक्ष्मी गणेश की मूर्ति, बर्तन आदि प्रमुख रूप से खरीदा जाता है । इस दिन खरीदारी करने से धन की कमी नहीं रहती है इसलिए इस दिन कुछ जरूर खरीदे ।
  धनवंतरी देवताओं के चिकित्सक माने जाते हैं इसीलिए यह दिन चिकित्सकों के लिए भी खास हैं ।


छोटी दीवाली 


धनतेरस के एक दिन बाद एवं दिवाली से एक दिन पहले अर्थात चतुर्दशी को जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था जिसके कारण इस दिन को छोटी दीवाली के रुप में मनाया जाता है जहां सबकुछ लगभग  दिवाली की तरह ही होता है । घरों को पूरी तरह सजा दिया जाता है या यूं कहें कि छोटी दिवाली बड़ी दिवाली की तैयारी के रूप में समझी जा सकती है ।

दिवाली मनाएं पर सावधानी से 


  • वैसे तो दिवाली धूम-धड़ाके का त्यौहार है चारों तरफ पटाखों की गूंज सुनाई देती है परंतु फिर भी इस दीवाली में थोड़ी सावधानी की भी आवश्यकता है
  • आजकल जहां पोलूशन बहुत ज्यादा होने लगा है ऐसे में जहां तक हो सके कम से कम पटाखों का उपयोग करें ।
  • बच्चों को खतरनाक पटाखे न जलाने दे जहां तक हो सके पटाखे जलाते वक्त आप उनके साथ वहां मौजूद रहे ।
  • पटाखों का आनंद उठाने के लिए चिपके हुए कपड़ों का प्रयोग करें ज्यादा ढीले-ढाले कपड़ों से बचें ।
  • कई लोग पटाखों के न जलने पर तुरंत ही उसके पास जाकर उस का निरीक्षण करने लगते हैं बेहतर होगा कि थोड़ा धैर्य रखें जो पटाखे न फुटे उसे वैसे ही छोड़ दे ।


   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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