जैसी करनी वैसी भरनी" कहावत और मुहावरे का अर्थ एवं कहानी, जैसा कर्म वैसा फल हिन्दी स्टोरी | as you sow, so you shall reap motivational story in hindi with moral

As You Sow, So You Shall Reap Motivational Story In Hindi With Moral


  एक गांव में एक गरीब किसान रहा करता था । यद्यपि वो गरीब था परंतु वह काफी ईमानदार और सज्जन व्यक्ति था । वह हर किसी के लिए भला ही सोचता । किसान बहुत मेहनती भी था । खून पसीना बहाकर वह अपने पास मौजूद छोटी सी भूमि पर खाने भर का अनाज उगा लेता और उसी में खुश रहता ।

  किसान ने उनकी काफी सेवा की और हाथ धुलवा कर उन्हें जलपान भी करवाया । अपनी इतनी सेवा से महात्मा काफी प्रसन्न हुए । काफी देर तक वहाँ रहने के बाद महात्मा जब वहाँ से जाने लगे, तब किसान ने उनसे वहीं कुछ दिन रुकने का आग्रह करने लगा ।

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  महात्मा किसान की सेवा से काफी प्रसन्न थे इसलिए महात्मा ने भी किसान की बात मान कर उसकी कुटिया में ही कुछ दिन निवास करने की सोची । किसान महात्मा के इस फैसले से बहुत खुश हुआ । अब वह रोज महात्मा के उठने से पहले ही उठकर उनके लिए नहाने के पानी का प्रबंध करता और फिर जब महात्मा अपने ध्यान योग से बाहर आते तब किसान सारा काम छोड़कर महात्मा को भोजन कराता इतना ही नहीं किसान खेतों से लौटने के बाद विश्राम कर रहे है महात्मा के चरण भी दबाता था । उसे जब भी अपने खेतों से समय मिलता तब वह भागकर महात्मा की सेवा में लग जाता ।

  महात्मा उसकी सेवा से काफी प्रसन्न रहा करते । यहाँ रहते-रहते उन्हें अब काफी दिन हो गए थे । मानो किसान की कुटिया, महात्मा का आश्रम हो गई हो हालांकि किसान द्वारा महात्मा की सेवा करने के पीछे एक विशेष कारण था ।

  असल में किसान अपने खेतों में ही काफी व्यस्त रहने वाला व्यक्ति था । उसे अपनी खेती-किसानी से ही कभी फुर्सत नहीं मिलती अगर कभी फुर्सत मिल भी जाती तो दूसरे कामों में वह व्यस्त हो जाता ऐसे में धर्म-कर्म के लिए उसे कभी समय ही नहीं मिलता जिसके लिए वह रोज खुद को कोसता परंतु जबसे महात्मा ने वहां कदम रखा तबसे किसान को पुण्य करने का एक नया रास्ता मिल गया था और वह थी महात्मा की सेवा ।
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  एक दिन रात को भोजन के बाद जब किसान और महात्मा भूमि पर चादर बिछाकर एक दूसरे के बगल में सो रहे थे तभी आधी रात को महात्मा के स्वप्न में ईश्वर ने दर्शन दिए स्वप्न में  भगवान ने महात्मा को दो स्वर्ण मुद्राएं दी । थोड़ी ही देर में महात्मा की आंखें खुल गई । आंख खुलते ही उन्हे अपने हाथ के पास किसी धातु का आभास हुआ महात्मा ने जब उसे उठाकर देखा तो वो वाकई दो स्वर्ण मुद्राएं थी ।

  उन्हें देखकर महात्मा बहुत खुश हुए । महात्मा ने उन दोनों स्वर्ण मुद्राओं को उठाकर पास पड़े अपने कमंडल में रख लिया और फिर जैसे ही उन्होंने बिस्तर पर लेटने की सोची वैसे ही उन्हें किसान के हाथ के पास भी दो स्वर्ण मुद्राएं दिखी । उन्हें देखते ही महात्मा का ईमान डोल गया । उन्होंने उन दो स्वर्ण मुद्राओं को भी उठाना चाहा परंतु तब तक किसान की आंख खुल गई और वह उठ कर बैठ गया । वह पास पड़ी स्वर्ण मुद्राओं को देखकर काफी आश्चर्यचकित हुआ और महात्मा से पूछा बैठा

 "क्या यह आपका है"
 महात्मा ने जवाब दिया
 "हां हां यह मेरा ही है"

 भोले भाले किसान ने बिना कुछ सोचे समझे उन दो स्वर्ण मुद्राओं को उठाकर महात्मा को दे दिया । महात्मा ने उन्हें भी अपने कमंडल मे डाल दिया और फिर दोनों सो गए ।
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  सुबह की पहली किरण के साथ ही महात्मा की नींद खुल गई वे उठकर बैठ गए और कमंडल में हाथ डालकर उन चारों स्वर्ण मुद्राओं को निकालना चाहा परंतु जैसे ही महात्मा ने कमंडल में हाथ डाला वह जोर से चीख बैठे उनकी चीखने की आवाज सुनकर किसान भी जग गया ।

  उसने देखा कि महात्मा के हाथ से खून टपक रहा है वहीं कमंडल से एक अत्यंत जहरीला सांप निकल कर खेतों की ओर भाग रहा है किसान ने जल्दी-जल्दी गांव वालों को आवाज लगाई परंतु जब तक महात्मा के इलाज के लिए कोई वहां पहुंचता तब तक महात्मा अपनी अंतिम सांस ले चुके थे ।

  महात्मा के जाने से किसान काफी दुखी हुआ । वह सारा दिन बस महात्मा को ही याद करके भूखे-प्यासे पड़ा रहा । काफी दिनों से महात्मा के साथ रहते-रहते महात्मा से उसका एक विशेष लगाव हो चुका था । महात्मा उसके लिए एक मात्र साधु सन्यासी ही नहीं बल्कि उसके गुरु, उसके पिता, उसके अभिभावक तुल्य हो चुके थे ।

  दोपहर को जब किसान अपना बिस्तर उठा रहा था तभी तकिए के नीचे उसे चार स्वर्ण मुद्राएं मिली यह देखकर वह एक बार फिर महात्मा को याद करने लगा । वह समझ चुका था कि महात्मा ने ही अपनी स्वर्ण मुद्राओं को उसके तकिए के नीचे रखा होगा ताकि वह उससे अपना जीवन सुखद बना सके ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 


ईश्वर हमारे सभी कर्मों का ज्ञान रखता है एक तरफ यदि वह हमारे अच्छे कर्मों का अच्छा फल देता है तो वही हमारे द्वारा किए गए बुरे कार्यों का बुरा परिणाम भी हमें अवश्य दिखाता है इसीलिए सच्ची भक्ति सच्चे मन में निहित है बुरी सोच रखने वालों को एक न एक दिन बुरा परिणाम भोगना ही पड़ता है !

  ईश्वर की तपस्या सच्चे मन से ही की जा सकती है झूठी माला जपने वालों को कभी सुख और समृद्धि प्राप्त नहीं हो सकती । ईश्वर की भक्ति सिर्फ ईश्वर को फूल माला चढ़ाने से ही नहीं वरन् विभिन्न रूपों में भी ईश्वर की जा सकती है और इश्वर इसका परिणाम भी हमें किसी न किसी रूप में अवश्य देता है जैसे इस कहानी में भगवान ने ना सिर्फ महर्षि को बल्कि किसान दोनों को समान फल दिए क्योंकि उसकी नजर में दोनों ही इसके लायक थे । इसीलिए हमें यदि मंदिरों में जाकर घंटा बजाने का समय नहीं मिलता, ईश्वर को जल चढ़ाने का समय नहीं मिलता तो इसमें कोई दुख की बात नहीं है हम मानव मात्र की सेवा करके भी ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकते हैं ।

  परंतु माया को देख कर महर्षि का ईमान डोल गया और फिर उन्होंने अपने महर्षि धर्म का पालन न करते हुए लालच में वशीभूत होकर दैत्य बन गए उनके मन मे राक्षस समा गया और जिसका फल उन्हें भोगना ही पड़ा इसलिए हमें सदैव छल कपट से मुक्त आचरण रखना चाहिए ।


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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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