अकबर की उलझन प्रेरणादायक कहानी | उलझन सुलझे ना कहानी | उलझन सुलझाएं | confused motivational short story in hindi | moral hindi story on akbar and his confusion

उलझन सुलझाएं कहानी | Top Moral Hindi Story On Akbar And His Confusion


  अब क्या है अम्मी, मुझे देर हो रही है तुम तो जानती हो न कि यदि वहां पहुंचने में मुझे जरा सी भी देर हुई तो क्या हो सकता है ..

बस बस 2 मिनट

  थोड़ी ही देर में अकबर की अम्मी अपने हाथों में दूध से भरा हुआ ग्लास लेकर आती है

उसे देखते ही अकबर कहता है
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"अम्मी तुम पहले ही मुझे कितना खिला चुकी हो और अब ये दूध। अब बस भी करो और कितना खिलाओगे मैं इंटरव्यू देने जा रहा हूं कोई जंग लड़ने नहीं"

  "अरे बेटा ये भला किसी जंग से कम है क्या ?, इतनी बढ़िया नौकरी पाने का मौका, भला रोज रोज कहां मिलता है । खाए पिए रहोगे तो जवाब भी टर्र टर्र निकलेगा, वरना .."
(अकबर की अम्मी उससे कहती है )

"अच्छा-अच्छा ठीक है" 

(दूध का ग्लास खाली करके नीचे रखते हुए अकबर अम्मी से कहता है और फौरन अपना बैग लिए  बाहर निकल पड़ता है)

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  बाहर निकलकर वह अपने दोस्त अखिलेश को फोन करता है 

  "यार अखिलेश, मैं पुरानी मस्जिद की ओर निकल रहा हूँ तू गाड़ी वहां भेज"

  ऐसा कहकर वह फोन कट कर देता है और तेजी से पुरानी मस्जिद की ओर चल पड़ता है ।

  अकबर मुंबई के काफी भीड़भाड़ वाले इलाके में रहता है जहां सुबह से ही सड़कों पर लोगों का मेला सा लग जाता है और जिसमें से खाली शरीर लेकर निकल पाना बड़ा मुश्किल होता है ऐसे में दोपहिया या चार पहिया वाहन लेकर वहां से गुजरना दिन में तारे देखने जैसी बात है ।

  अकबर और अखिलेश काफी जिग्री यार हैं । अकबर को इंटरव्यू देने आज पुणे जाना है जिसके लिए वह सुबह ही तैयार होकर पुरानी मस्जिद की ओर निकला है । जहां अखिलेश अपने ड्राइवर के साथ अपनी कार भेजेगा ।

  अकबर आज अपनी नई जॉब को लेकर काफी उत्साहित है । वह मार्ग में पड़ने वाले हर मस्जिद, मजार पर मत्था टेकते हुए तेजी से आगे बढ़ता है । तकरीबन आधे घंटे की जबरदस्त दौड़ के बाद आखिरकार वह पुरानी मस्जिद पर पहुंच जाता है । वहां पहुंचकर वह अपनी सफलताओं की दुआएं मांगता है और बगल में स्थित मुनव्वर चाचा की दुकान पर बैठ कर कार का वेट करने लगता है । उसे पसीना-पसीना देखकर मुनव्वर चाचा कहते है

 "क्या बात है बेटा, इतनी सुबह-सुबह कहां की दौड़ है ?"

"क्या बताएं चाचा समझो नसीब बदलने वाले हैं मुझे बहुत ही अच्छी कंपनी से जॉब का ऑफर आया है उसी का इंटरव्यू देने अखिलेश की कार से मै पुणे जा रहा हूँ"

(अकबर मुनव्वर चाचा से कहता है)

मुनव्वर चाचा "तो क्या अखिलेश तुम्हारे साथ नहीं जा रहा है"
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अकबर "नहीं-नहीं, उसे कुछ काम है इसलिए वो खुद न आकर अपने ड्राइवर को मेरे साथ भेज रहा है"

मुनव्वर चाचा "बहुत अच्छा, वैसे जब तक ड्राइवर यहाँ कार लेकर  पहुँचता है, तब तक तुम मस्जिद में अपनी सफलता की थोड़ी दुआ कर आओ"

अकबर "जी, शुक्रिया चाचा परंतु मैंने ये काम यहाँ आते ही कर लिया था और तो और एक चादर भी मान आया हूँ"

मुनव्वर चाचा "बहुत खूब बहुत खूब, तुमसे यही उम्मीद थी बेटा । अल्लाह तुम्हें बरकत दे । क्या चाय पियोगे बेटा ?"

"हां चाचा"

अकबर, मुनव्वर से कहता है और फिर चाय पीते हुए गाड़ी का वेट करने लगता है । धीरे-धीरे लगभग 1 घंटे होने को है परंतु अखिलेश की गाड़ी का कोई अता-पता नहीं है । यह देख अकबर थोड़ी चिंतित होता है । उसके माथे पर दिख रही चिंता की रेखाओ को देखकर मुनव्वर चाचा कहते हैं

  "क्या बात है बेटा, गाड़ी अब तक नहीं आई ना हो तो कोई कैब बुक कर लो या बस से चले जाओ । ऐसे मामलों में देर करना ठीक नहीं है आखिर ये तुम्हारी जिंदगी का सवाल है"

   "नहीं-नहीं चाचा मुझे अखिलेश के पर पूरा भरोसा है वह गाड़ी जरूर भेजेगा"

  धीरे-धीरे आधे घंटे और गुजर जाते हैं परंतु गाड़ी की कोई खबर नहीं तभी अकबर के जेहन में एक आशंका जन्म लेती है वह सोचता है कि

"यहां पुरानी मस्जिद तो दो है क्या पता कहीं अखिलेश ने अपनी गाड़ी घर के पश्चिम तरफ स्थित पुरानी मस्जिद पर न भेज दी हो । तब पता चले कि उसका ड्राइवर मेरा वहां वेट करता रह जाए और उसका मैं यहां"

  परंतु तभी उसका दूसरा मन, उसकी इस आशंका को झूठला देता है उसे लगता है कि अखिलेश ऐसी गलती नही करेगा ।
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  असल में अकबर के घर के पास दो पुरानी मस्जिद है जिनमें से एक उसके घर से पश्चिम दिशा में स्थित है और दूसरी पूरब दिशा में जहां अकबर  इस वक्त की गाड़ी का इंतजार कर रहा है ।

  गुजरते वक्त के साथ उसकी ये आशंका उसके मन में घर करने लगती है परंतु वह इस आशंका को दूर करने की बजाए, अखिलेश पर भरोसा जताते हुए गाड़ी के आने का वेट करता है । 

  सुबह के लगभग 10:00 बजने को है परंतु गाड़ी अभी तक नहीं आई । आखिरकार हार मानकर अकबर अखिलेश के ड्राइवर को फोन करता है । तब उसे जो पता चलता है उसे सुनकर उसके हाथ पांव फूल जाते हैं असल मे अकबर की आशंका सच साबित हुईं थी । अखिलेश ने बाई मिसटेक अपनी कार दूसरी पुरानी मस्जिद पर भेज दी थी । हमारी लेटेस्ट (नई) कहानियों को, Email मे प्राप्त करें. It's Free !

  इस खबर से अकबर को शाॅक लगना लाजमी था क्योंकि अब वो, चाहे जितना भी पैर पटक ले परंतु कार तक पहुंचने में उसे कम से कम 1 घंटे का समय लगना तय है । 

  अकबर, ड्राइवर को वहीं ठहरने को बात कहकर, काफी तेजी से दूसरी पुरानी मस्जिद की ओर बढ़ता है ।

  परंतु दिन बढ़ने के साथ ही सड़कों पर भीड़ भी काफी बढ़ चुकी है । रास्ते में उसे अपनी एक छोटी सी भूल याद आ रही है । यदि समय रहते उसने अपनी आशंका को दूर कर लिया होता तो आज उसे ये मुसीबत नही झेलनी पड़ती । 

  अकबर आंधी की तरह आगे बढ़ता है परंतु उसके पैर कांप रहे है । उसका भय उस पर हावी हो रहा है कि कहीं उसकी ये नादानी उस पर भारी न पड़ जाए ।

  काफी मशक्कत के बाद वह गाड़ी तक पहुंच जाता है । ड्राइवर भी मौके की नजाकत को समझते अकबर को लिए काफी तेजी से पुणे की ओर बढता है वहीं अकबर रास्ते भर कार की पिछली सीट पर बैठे अपनी गलती पर पछता रहा ।

  परंतु आखिरकार अकबर का भय सही साबित होता है और वह इंटरव्यू के लिए लेट हो जाता है इसप्रकार एक छोटे से कन्फ्यूजन को समय रहते दूर न कर पाने के कारण अकबर एक अच्छी अपॉर्चुनिटी गंवा बैठता है ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi


दोस्तों ऐसा दुर्घटना किसी के भी साथ घटित हो सकती है । इसलिए हमें अपनी बातें बिल्कुल स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए ताकि कहीं कोई confusion create न हो और यदि किसी confusion के आसार बन रहे हैं तो उसे समय रहते दूर कर लेना आवश्यक है अन्यथा जो दुर्घटना अकबर के साथ इस कहानी में घटित हुई वह आपके साथ भी घटित हो सकता है ।

wish you all the best.


                             

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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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