कुत्ते की कहानी. दूसरों की मदद में छिपी है, अपनी खुद की मदद! तेंदुए और कुत्ते पर प्रेरणादायक लघु कहानी emotional short moral story on dog and leopard in hindi

तेंदुआ और कुत्ते पर प्रेरक कहानी Leopard And Dog moral  Story In Hindi


  "क्या हुआ मां"

 "कुछ नहीं बेटा मैं तो इन आवारा कुत्तों से तंग आ चुकी हूँ जरा सा दरवाजा, खुला देखा नही कि दौड़े- दौड़े घर में चले आते हैं और फिर जाने कहां कहां से पैरों में जमाई गंदगी को पूरे घर मे बिखरे देते हैं । ये निगम वाले भी न, ना जाने कहां मर गए हैं । इधर का तो जैसे रास्ता ही भूल गए हों, कभी इधर आते तो उनसे कहती कि भैया इन कुत्तों को ले जाओ, चाहे भले ही बदले में, चार पैसे हम से ही ले लो"

"अरे नहीं नहीं मां ये भी जीव है इन्हें भी अपनी आजादी से जीने का हक होना चाहिए । ऐसे इन्हें कहीं बंद कर के रखना ठीक नहीं होगा"
(गणेश अपनी मां से कहता है)

गणेश की ऐसी बातों को सुनकर मां चिढ़ जाती है, वह बड़े गुस्से में कहती है 

"अच्छा, तब ठीक है, अब कल से मैं दरवाजा खुला ही छोड़ देती हूं इनकी जहां मर्जी आए घूमे गंदगी मचाए मैं कुछ नहीं कहूँगी"

"नहीं नहीं मां मेरे कहने का ये मतलब, तो बिल्कुल भी नहीं था"

गणेश अपनी रूठी मां को मनाने की कोशिश करने लगता है, गणेश की मां को कुत्ते बिल्कुल भी नहीं भाते वो उन्हें देखना भी नहीं चाहती । इसके ठीक विपरीत बेटे गणेश को कुत्तों से बहुत लगाव है ।  उनके साथ खेलना कूदना उसे बहुत पसंद है । कभी-कभी तो वह उनमें अपनी रोटी भी बाँट आता है ।
  इतना ही नही जब कभी भी वह किसी कुत्ते को घायल या बीमार देखता है तब वह अपने पाकिट खर्च को काटकर उनकी दवा दारू भी कराता है ।

  समय के साथ गणेश बड़ा हो चुका है उसकी नौकरी लग गई है और उसका एक बेटा भी है यद्यपि गणेश अब बड़ा हो चुका है परंतु इतने वर्षों बाद भी उसके मन में जानवरों के प्रति प्रेम आज भी अगाध है । जेब में चार पैसे आ जाने के कारण अब उसे उनकी देखभाल के लिए अपने पाकेट खर्च की भी बलि देने की जरूरत नहीं किन्तु वही दूसरी तरफ उसकी मां बेटे की ऐसे स्वभाव को देख काफी छूब्ध रहती है ।
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  एक दिन जब गणेश की माँ घर के कुछ काम निपटा रही होती है उसी वक्त गणेश का बेटा खेलते-खेलते घर के बाहर निकल आता है तभी न जाने कहां से वहां एक तेंदुआ आ जाता है उसे अपने सामने देख गणेश का मासूम बेटा उसकी तरफ बढ़ता है ।

  कई दिनों से भोजन की तलाश मे भटक रहा, भूखा तेंदुआ, देर न करते हुए उसपर झपट पड़ता है । वह उसे अपने जबड़ो में दबाकर ज्यों ही वहां से भागने की कोशिश करता है त्यों ही गली के आवारा कुत्ते वहां आ धमकते हैं । देखते ही देखते कुत्तों का हुजूम तेंदुए को चारो ओर से घेर लेता है । वे गणेश के बच्चे को किसी भी हाल में तेंदुआ के मुख से छुड़ाने के लिए तत्पर हैं । तेंदुआ बार-बार उनपर अपने पंजों से प्रहार करता है परंतु लहूलुहान कुत्ते उसे किसी भी हाल में बच्चे को ले जाने से रोकने की कोशिश में जुटे हैं । 
  शोरगुल से भरे इस माहौल को सुनकर गणेश की मां अंदर से भागे-भागे आती है परंतु अपने कलेजे के टुकड़े को तेंदुए के मुख में देख वह वहीं मूर्छित होकर गिर पड़ती है । इधर कुत्तों और तेंदुए के बीच में जंग अभी भी जारी है ।

  आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग भी वहां लाठी-डंडों के साथ इकट्ठा हो जाते हैं और फिर वे वह भी तेंदुए पर बरस पड़ते हैं । खुद की जान आफत में देख तेंदुए, गणेश के बच्चे को वहीं  छोड़ वहां से भाग निकलता है और इस प्रकार गली के आवारा कुत्ते गणेश के नन्हे मुन्ने की जान बचाने में कामयाब हो जाती हैं ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Short Inspirational Story In Hindi 


  दोस्तों आज की इस मतलबी दुनिया में किसी की भी मदद करना मूर्खतापूर्ण लगता है जहां हर कोई सिर्फ अपने मतलब से आप से जुड़ा है ऐसे में दूसरों की मदद करने की बात, एक कोरे भाषण जैसा ही लगता है

  परंतु दोस्तों इस मतलबी दुनिया में अच्छे लोगों की भी कमी नहीं है और कौन सा बुरा व्यक्ति कल को हमारे लिए अच्छा हो जाए यह कोई नहीं जानता इसीलिए दूसरों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहें क्योंकि दूसरों की मदद में कहीं न कहीं हमारी, अपनी खुद की मदद भी छिपी हुई है ।

यकीन माने यदि हम दूसरों के लिए चार कदम चलेते हैं तो मुसीबत आने पर कोई न कोई हमारे लिए भी ज्यादा नही तो कम से कम एक कदम तो जरुर चलेगा इसीलिए दूसरों की बड़ी ना सही परन्तु छोटी-छोटी मदद के लिए पैर आगे बढ़ाएं!


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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
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