30 September, 2019

पान की दुकान - स्वाभिमान की कहानी Short Story On Self Respect in Hindi

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पान की दुकान स्टोरी | स्वाभिमान की कहानी | Best Short Story On Self Respect in Hindi| गरीब दुकानदार के आत्म सम्मान की कहानी| स्वाभिमानी बनने की सीख देती लघु कथा

गरीब दुकानदार के आत्म सम्मान की कहानी| स्वाभिमानी बनने की सीख - स्टोरी


  वैसे तो पान की दुकानें शहर में बहुत सी थी परंतु रघु की दुकान की बात ही कुछ और थी । इस बात का आप ऐसे समझ सकते हैं कि जब तक रघु अपने पान के दाम नहीं बढ़ाता तब तक क्या मजाल कि शहर का कोई दुकानदार अपने पान के दाम बढ़ा ले ।

अपने इसी हुनर के बदौलत रघु, न सिर्फ ठीक ढंग से अपने परिवार का भरण पोषण कर सका बल्कि उसने अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में भी बहुत हद तक कामयाबी हासिल की ।
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काम के प्रति निष्ठा का कुछ वैसा ही भाव, जैसा रघु मे था, समय के साद उसके बड़े हो रहे बच्चो में भी दिखने लगा फलस्वरूप जहां एक ओर रघु का बड़ा बेटा, शहर का जाना माना डॉक्टर बना तो वहीं छोटा बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गया । फलस्वरूप रघु के दोनों बेटों की शादियां भी शहर के जाने-माने एवं प्रतिष्ठित परिवारो में सम्पन्न हुई ।

पर समय की ये कैसी विडंबना, जिन सीढ़ियों पर पाँव रखकर रघु के बच्चों ने आसमान छुआ था आज वही सीढ़िया, उनके गले की फांस बन रहीं थी ।

 असल में रघु के बच्चे अब शहर की जानी-मानी हस्तियों में शामिल हो चुके थे । ऐसे में उनके पिता पान बेचना शर्मसार कर देने जैसी बात थी ।
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एक दिन आपसी मंत्रणा के बाद दोनों भाई, पिता की दुकान पर पहुंचे और कहा

"पिताजी कल तक बात और थी परंतु अब हमें धन दौलत और सुख सुविधाओं की कोई कमी नहीं है इसलिए अब आपका यूँ पान बेचना कुछ ठीक नहीं लगता और वैसे भी अब आपको काम करने की जरूरत ही क्या है । आपने पूरी जिंदगी बस काम ही तो किया है । हमें लगता हैं कि अब आपको हमारे साथ रहकर बाकी जिंदगी सुख चैन से बिताना चाहिए"
उनकी बातों को सुनकर बड़ी अजीब सी मुस्कान रघु के चेहरे पर आ गई मानो उसे इस दिन के आने का अंदेशा पहले से हो । रघु ने बड़े प्यार से एक जोड़ा पान अपने बच्चों की तरफ बढ़ाते हुए कहा

"देखो बेटा, आज भले ही तुम्हे इस पेशे से शर्मिंदगी महसूस हो रही है होगी परंतु ये शायद इस पेशे की ही देन रहीं कि ग्राहको को पान थमाते वक्त, तुम्हारे पिता के ये हाथ हमेशा नीचे की ओर झुके परंतु कल क्या होगा यह कोई नहीं जानता यदि मैंने यह पेशा छोड़ दिया तो हो सकता है कि कल जरूरत पड़ने पर ये हाथ मुझे तुम सबके सामने ऊपर की तरफ उठाने पड़े और ये मुझसे नहीं होगा"
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कहानी से शिक्षा | Moral Of This Short Inspirational Story In Hindi



काम कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता । यह काम ही हमे स्वावलंबी बनाकर हमारे अन्दर Self respect जगाता और दूसरों के सामने झुकने नहीं देता इसीलिए आप जिस भी प्रोफेशन में हैं उसमे और बेहतर करने की कोशिश करें क्योंकि आपका काम ही आपकी पहचान है और जो एक दिन आपको शीर्ष पर ले जाएगा !

   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  

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