06 October, 2019

नृत्य पर कहानी : राजा व नृत्य कला की परीक्षा Best Dance Story in Hindi

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नृत्य पर प्रेरणादायक लघु कहानी: राजा और नृत्य कला की परीक्षा| नृत्यांगना, नर्तकी के प्रयास, कोशिश की कहानी| Best dance story in Hindi. Top Dancer story in hindi

 चांदनगर के राजा आनंदसोम को  नृत्य संगीत का बहुत शौक था । एक बार उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वैसे तो उनका दरबार शूरवीरों, महाज्ञानीयों, कविओ एवं कलाकारों से भरा पड़ा है परंतु बावजूद इसके उनके दरबार में कुछ कमी तो है परंतु वो कमी है क्या ? इसका पता नही चल पा रहा था । काफी चिंतन मनन के बाद राजा को समझ आ गया कि सभी रंगो से सुसज्जित उनके दरबार में बस एक नृत्यांगना की कमी है, उनके दरबार में कोई नृत्यांगना नहीं है ।

नृत्य संगीत में रुचि रखने वाले महाराज को ये बात नागवार गुजरी । उन्होंने फौरन अपने मंत्रियों से दरबार के लिए एक राजनर्तकी का चयन करने की इच्छा जाहिर की । जैसे ही यह बात राज्य में आम हुई राजा के महल के बाहर नृत्यांगनाओ का ताता लग गया । महाराज ने उन सभी को सम्मान देते हुए उन्हें बारी बारी से अपने नृत्य कौशल का जौहर दिखाने का मौका दिया ।

  महाराज के आदेश के बाद, एक के बाद एक सारी नर्तकिओ ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया । प्रतियोगिता के आखिर में महाराज ने कहा

"वैसे तो मैं इस नृत्य प्रतियोगिता में शामिल सभी नृत्यांगनाओ का नृत्य कौशल देख चुका हूँ और उन्हे उनके हुनर के हिसाब से अंक भी प्रदान कर चुका हूं परंतु चूँकि मै किसी भी प्रतिभागी के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देना चाहता इसलिए राजनर्तकी की घोषणा से पूर्व मै उन प्रतिभागीयो को एक और मौका देना चाहूंगा जो ऐसा मानती हैं कि यदि इस प्रतियोगिता में उन्हे एक और अवसर मिला होता तो शायद वे अपनी कला का वो जौहर दिखा पाती जो किन्ही कारणोंवश पिछले प्रयास में वे नही कर सकीं"

महाराज ने फिर कहा

"यदि आप में से कोई ऐसा सोचता है तो कृपया वो अपना हाथ ऊपर उठाए"

महाराज के ऐसा कहते ही दर्जनों हाथ ऊपर की ओर उठ खड़े हो गए । महाराज ने उन सभी नर्तकियो को एक बार पुनः नृत्य का मौका दिया । महाराज द्वारा मिले इस मौके का फायदा उठाते हुए, उन नर्तकियो ने एक बार पुनः अपना नृत्य कौशल दिखाने का भरपूर प्रयास किया और अब समय था राजनर्तकी की घोषणा का परंतु इस बार भी महाराज ने राजनर्तकी की घोषणा से ठीक पहले अपने इस दूसरे प्रयास से भी असंतुष्ट नर्तकियो को नृत्य का एक और मौका देने की इच्छा जताई, मौका मिलने पर उनमें से कुछ नर्तकियो ने एक बार पुनः नृत्य के लिए अपने हाथ ऊपर उठाए ।

इस प्रकार यह सिलसिला लगातार यूँ ही चलता रहा और आखिर में सिर्फ दो नृत्यांगना ऐसी बची जिन्होंने अवसर मिलने पर पुनः नृत्य की इच्छा जताई । महाराज ने उन दोनों को एक और अवसर प्रदान किया उनके नृत्य के बाद जब महाराज ने उनसे पूछा

"क्या तुममे से कोई एक और अवसर लेना चाहेगा?"

तब उन दो नर्तकियो में से सिर्फ एक नर्तकी ने अपने हाथ ऊपर उठाए । तब महाराज ने उसे अपने पास बुलाया और कहा

"ये रही हमारी राजनर्तकी"

महाराज के इस फैसले से दरबार में उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित थे । तब महाराज ने उनसे कहा

"इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं जो व्यक्ति अपने पिछले प्रदर्शन से कभी संतुष्ट न होकर, और बेहतर करने की लालसा में नित्य नए अवसरों को प्राप्त करने की इच्छा रखता है उसकी कला के निखरते जाने की अपार संभावनाएं होती हैं परंतु वही जो व्यक्ति, सफलता के किसी मुकाम पर पहुंचकर संतुष्ट हो जाता है उसकी कला के निखरने की सारी संभावनाओं पर, वहीं विराम लग जाता है और राजनर्तकी में, मै ऐसे ही गुणों को देखना चाहूँगा, जिसके प्रर्दशनो में निरन्तर निखार की अपार संभावनाएं हो"

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Short Inspirational Story In Hindi


आपने फिल्मों एवं खेलजगत में ऐसी कई हस्तियों को देखा होगा जो आते ही सबके दिलों पर छा जाते हैं, सबको अपना दीवाना बना लेते हैं परंतु एक टाइम पीरियड के बाद वो इंडस्ट्री से अचानक गायब से हो जाते हैं । ऐसा उनके साथ सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि वे सफलता के मुकाम पर पहुंचकर, ये मान बैठते हैं कि वे जो कर रहे हैं वह उनका सबसे बेस्ट है और इससे अच्छा करने की तो अब कोई गुंजाइश ही नहीं बची ।इसप्रकार वे अपनी प्रतिभा को नए आयामो तक पहुंचाने का मार्ग, स्वंय ही अवरूद्ध कर देते हैं ।

कभी-कभी हमें लगता है कि आज हमने जो किया वह हमारा सबसे बेस्ट है और इससे अच्छा तो हम या कोई दूसरा कर ही नहीं सकता है it's perfect, दोस्तो ऐसा सोचना गलत नहीं है परंतु ऐसा सोचने वाले लोग, आगे कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं करते और आउटडेटेड हो जाते हैं । जिसके कारण उनकी कला में और वृद्धि नहीं हो पाती और आखिरकार उनका करियर वहीं समाप्त हो जाता है ।

इसलिए आप जिस भी क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं उसमें अपने प्रदर्शन से संतुष्ट होने की बजाय उसे और बेहतर करने की कोशिश करें याद रखें सीखने का कोई आखिरी छोर नहीं होता !

   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  

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