08 October, 2019

स्वार्थी मित्र कहानी| Selfish Friends | Selfish Friendship Story Hindi

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Selfish Friendship Story in Hindi | Selfish Friends short story in hindi| स्वार्थी मित्र की कहानी, स्वार्थी मित्रता| मतलबी दोस्त की कहानी| the selfish boy story

Selfish Friends Short Story in Hindi| स्वार्थी मित्रता की प्रेरक कहानी


हमीद और रशीद दोनों एक दूसरे के पड़ोसी होने के साथ-साथ काफी अच्छे दोस्त भी थे । उनमें सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ना सिर्फ उनके घरों के बीच की दीवार एक थी बल्कि पास के बाजार में स्थित उनके दुकानो की दीवारें भी एक ही थी अर्थात दोनों मोहल्ले के साथ-साथ बाजार में भी एक दूसरे के पड़ोसी थे ।
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जहां एक तरफ रशीद बाजार में फल बेचा करता था वही हमीद, साम के समय रशीद की दुकान के ठीक बगल में अपनी चिकन की दुकान लगाया करता ।

शाम को घर लौटने पर जहां एकतरफ रशीद अपने बचे कुचे फलों में से कुछ फल हमीद को दे आता वहीं हमीद भी अपने पड़ोसी होने का हक अदा करते हुए ठीक-ठाक चिकन रशीद के घर पहुंचा जाता । इस प्रकार दोनों की दोस्ती बस देखते ही बनती ।

हालांकि इन दोनों की दोस्ती मोहल्ले वालों को जरा भी न भांति परंतु इसमें दोष मोहल्ले वालों का नही बल्कि इसमे सारा कसूर रशीद के जिगरी यार हमीद का था । असल में हमीद अपने दो कमरे के घर में ही मुर्गियां पाला करता । वह मुर्गियां के पंखो एवं उससे जुड़ी दूसरी चीजो को मोहल्ले में ही थोड़ी दूर स्थित एक खाली प्लॉट में फेंक आता जो बाद में सड़ गल कर काफी बदबू मचाती हालांकि देर सवेरे वह उन्हे जलाया भी करता परन्तु उससे तो मुश्किलें और बढ जाती ।

दोनो के जिगरी यार होने के नाते मोहल्ले वाले हमीद के कारनामों की शिकायत रशीद से भी किया करते परंतु एक तरफ हमीद के कचरे से बजबजाते प्लॉट का रशीद के घर से काफी दूर होना और दूसरी तरफ हमीद की दोस्ती, जिसके नाते रशीद मोहल्ले वालों की शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया करता । बात बढता देख रशीद मोहल्ले वालो से कटा कटा सा रहने लगा । उनसे उसने काफी दूरी भी बना ली ।

परंतु गुजरते वक्त के साथ मोहल्ले में नए लोगों के आगमन से खाली पड़ी जमीने भी उंची-उंची इमारतो में तब्दील हो गई । अब तो मोहल्ले में कोई जमीन ऐसी नहीं बची थी जिसमें हमीद अपने मुर्गियों की गंदगी फेंक सकें ।
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एक दिन जब रशीद, हमेशा की तरह अपने बचे हुए फलों में से कुछ फल हमीद को दे रहा था तब हमीद एक अजनबी की भांति पेश आते हुए उसके फलों को लेने से साफ इंकार कर दिया ।

इस दिन के बाद से हमीद का व्यवहार रशीद के प्रति दिन-प्रतिदिन बदलता चला गया । मानो वह रशीद को पहचानता भी न हो । हमीद के इस बदले व्यवहार को देखकर रशीद व उसके घर वाले हतप्रभ थे । हमीद के व्यवहार में अचानक आए इस परिवर्तन की वजह वे नही जान पा रहे थे ।

एक दिन हमीद ने बास की बनी एक बड़ी सी टोकरी अपने घर के बाहर लाकर रख दी और उसमें मुर्गियों के पंखों इत्यादि को फेंकने लगा । धीरे-धीरे टोकरी कचरे से पूरी तरह भर गई और कचरा नीचे गिरकर इधर-उधर फैलने लगा । कुछ ही दिनो में उसके कचरे से दुर्गंध आने लगी । जिससे सबसे ज्यादा परेशानी रशीद को हो रही थी । 
दोस्त से अजनबी बन बैठे हमीद से रशीद को कुछ भी कह पाना बहुत मुश्किल हो रहा था परंतु आखिरकार एक दिन रशीद ने अपनी परेशानियां, हमीद से बताने की सोची । रशीद ने बात अभी शुरू ही की थी कि हमीद के तेवर बदलने लगे । दोनों के बीच शुरू हुई यह बातचीत पहले गरमा गरम बहस और फिर झगड़े में तब्दील हो गई । वैसे तो यह झगड़ा बेनतीजा रही परंतु इस झगड़े के बाद रशीद को यह समझ में आ गया कि हमीद, पहले दोस्त से अजनबी और फिर अजनबी से दुश्मन क्यों बन बैठा । उसे अपने स्वार्थी दोस्त का घिनौनी चेहरा बिल्कुल साफ दिख रहा था ।

रशीद समझ गया कि मोहल्ले की खाली पड़ी सारी जमीनों पर मकान बन जाने से, हमीद के पास अपना कचरा, घर के बाहर फेंकने के सिवा दूसरा कोई विकल्प शेष नही था परंतु वह जानता था कि ऐसा करने से रशीद नाराज होगा और एकदिन ये नौबत आएगी इसलिए उसने रशीद से अपने सारे नाते पहले ही तोड़ लिए और फिर रशीद के दीवाल के किनारे ही अपनी सारी गंदगी लाकर फेंकने लगा ।

रशीद को आज बहुत पछतावा हो रहा था क्योंकि उसने जिसके नाते मोहल्ले वालों से बैर कर लिया आज उसी स्वार्थी दोस्त ने अपने मतलब को पूरा करने के लिए उससे सारे नाते तोड़, उसका दुश्मन बन बैठा ।
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कहानी से शिक्षा | Moral Of This  Short Motivational Story In Hindi


जो व्यक्ति अपने छोटे से छोटे लाभ के लिए दूसरों का बड़ा से बड़ा नुकसान करने से नहीं हिचकिचाता वो व्यक्ति कभी भी किसी का सगा नहीं हो सकता । वक्त आने पर वह अपने फायदे के लिए, किसी भी रिश्ते का गला घोट सकता है इसीलिए ऐसे स्वार्थी लोगो से सदा दूर रहे और उनसे किसी प्रकार का कोई रिश्ता न जोड़े !

   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
 Team MyNiceLine.com

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