स्कूल के छात्रों के साथ-साथ यहां का हर एक अध्यापक रोहित को भलीभांति जानता है । रोहित ने अपनी यह पहचान अपनी काबिलियत के दम पर बनाईं है । वह स्कूल में हमेशा प्रथम आता है । मैथ उसका सबसे पसंदीदा विषय है जिसमें वह हमेशा सौ में से सौ अंक लाता है ।

 स्कूल की परीक्षाएं चल रही हैं संयोगवश आज गणित विषय की परीक्षा है । रोहित बड़े उत्साह के साथ कक्षा में प्रवेश करता है । थोड़ी ही देर में पहली बेल बजने के साथ ही प्रश्न पत्र बटने शुरू हो जाते हैं । रोहित प्रश्न पत्र में आए सवालों को एक-एक करके पढ़ने लगता है जैसे-जैसे वह उन प्रश्नों को पढ़ रहा होता है वैसे वैसे उसके चेहरे की चमक भी बढ़ती चली जाती है परंतु आखिर में उसके चेहरे पर कन्फ्यूजन की हल्की रेखाएं दिखने लगती हैं जो समय के साथ गहरी होती चली जाती है ।

 असल में प्रश्न पत्र में आए 10 सवालों में से एक से नौ तक के सवालों के जवाब त़ो मानो रोहित को जुबानी याद हो मगर प्रश्न पत्र में आया एक आखरी प्रश्न उसकी समझ से परे है जिसका हल निकाल पाना उसके लिए काफी मुश्किल हो रहा है वह काफी देर तक उस आखरी सवाल का हल ढूंढने में लगा रहता है परंतु उसे निराशा हाथ लगती है ।

 ऐसे में वह फटाफट दूसरे सवालों को हल करने में लग जाता है मगर इन सबके बीच उसका मन कहीं ना कहीं घूम फिर कर उसी आखरी प्रश्न की ओर खींच रहा है । वह दूसरे प्रश्नों को हल करते समय भी बीच-बीच में रुक-रुक कर उस आखरी प्रश्न का हल निकालने की बार-बार कोशिश करता है ।

  इस प्रकार दूसरी और फिर तीसरी बेल भी लग जाती है हालांकि तब तक रोहित ने 100 अंकों की इस परीक्षा में 9 सवालों को जबाब देकर अपने 90 अंक पक्के कर लिए हैं ।

 कुछ दिनों बाद मास्टर साहब द्वारा बच्चों को उनका अंकपत्र प्रदान किया जाता है । बड़े ही उदास मन से रोहित अपना अंकपत्र लेता है शायद उसे पता है कि इस बार उसका रिकॉर्ड टूटने वाला है परंतु अंकपत्र को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह जाती है क्योंकि उसे 100 में से 90 नहीं बल्कि सिर्फ 60 अंक ही प्राप्त हुए हैं ।

 असल में परीक्षा हॉल में रोहित का पूरा ध्यान उसी दसवें सवाल का हल ढूंढने में लगा रहा जिसके कारण वह बाकी नौ प्रश्नों पर कोई विशेष ध्यान नहीं दे सका । जिसके कारण उसने कई प्रश्नों को आधा अधूरा ही छोड़ दिया और एक प्रश्न को तो उसने पूरा हल करने के बाद, आखिर में उसका उत्तर लिखना ही भूल गया । इन छोटी-छोटी गलतियों के कारण उसे 100 में सिर्फ 60 अंकों से ही संतोष करना पड़ा ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This  Short Motivational Story In Hindi


दोस्तों यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान ढूंढना भी आवश्यक है परंतु किसी भी समस्या के पीछे खुद को इतना व्यस्त कर लेना भी ठीक नहीं है कि जिसके कारण हम दूसरे अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बिल्कुल भी ध्यान न दे सके !

 समस्या चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो परंतु उसका हल ढूंढने के साथ-साथ, हमें दूसरे जरूरी कार्य भी समय से निपटाते रहने होंगे अन्यथा कहीं ऐसा ना हो कि किसी एक समस्या का हल ढूंढते ढूंढते कई सारी समस्याएं हम खुद पैदा कर ले ।

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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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