मां मेरे शूज पापा की तरह बड़े-बड़े क्यों नहीं हैं ? ये इतने छोटे-छोटे क्यूं हैं ?

बच्चे के मासूम सवालों को सुनकर संगीता हंस पड़ती है वह कहती है

मेरा बाबू, अभी छोटू सा है ना इसीलिए उसकी शूज भी छोटी सी है वह जैसे-जैसे बड़ा होने लगेगा, वैसे-वैसे हम उसके लिए बड़ी शूज लाएंगे ।

मोनू थोड़ी ही देर में स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाता है । वह घर के मेन गेट पर अपनी मां के साथ छाता लिए, स्कूल बस का इंतजार कर रहा है  ।आज मौसम बहुत सुहाना है । सुबह से ही हल्की हल्की बारिश हो रही है । थोड़ी देर में स्कूल की बस आ जाती है जहां वह अपने दोस्तों को पाकर बहुत खुश होता है ।

स्कूल पहुंचकर, जब वह अपनी क्लास की तरफ जा रहा होता है तभी बारिश के कारण गीले पड़े मैदान में उसका पैर फिसल जाता है । वैसे वह गिरता तो नहीं है परंतु उसके शूज में थोड़ी मिट्टी लग जाती है जिसे देखकर उसके दोस्त उसपर ठहाके मार-मारकर हंसने लगते हैं । 

वैसे मोनू को उनपर गुस्सा तो बहुत आ रहा है परंतु वह चुपचाप वहां से चला जाता है । वह अपने पैर को टैब के नीचे लाकर अपने शूज को धोने लगता है । टैब से गिरता पानी सूज पर लगी मिट्टी को बहुत हद तक साफ कर देती है मगर फिर भी थोड़ी मिट्टी शूज पर अभी भी चिपकी हुई है जो मोनू के लाख प्रयासो के बावजूद नहीं जा रही है ।

जिसे देख मोनू के दोस्त उससे कहते हैं

"दोस्त अब ये मिट्टी नहीं हटने वाली"

मोनू उनको कोई जवाब दिए बगैर टैब के नीचे गिरती धार में अपने पैरों को यूंही टिकाए रखता हैं धीरे-धीरे बची कुची मिट्टी भी पानी के धार से साफ होने लगती है और कुछ ही देर में मोनू के जूतों से मिट्टी पूरी तरह से हट जाती है । यह देख मोनू का चेहरा खिल उठता है वह, उसका मजाक उड़ा रहे दोस्तों की तरफ मुस्कान भरी तिरछी निगाहो से देखता है उसके देखते ही दोस्तों का चेहरा फीका पड़ जाता है ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This  Short Motivational Story In Hindi


दोस्तों इस कहानी में मोनू ने जूतों पर चिपकी मिट्टी को हटाने के लिए जिस प्रकार निरंतर प्रयास किया अर्थात पानी की धार को लगातार जूतों पर टिकाए रखा उसी प्रकार यदि हम अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपने प्रयासो को निरंतर बनाए रखें तो असंभव सा लग रहा लक्ष्य भी बड़ी सरलता से हमें प्राप्त हो सकता है ।

यहां एक और बात गौर करने वाली है कि हम जब भी अपने प्रयासो में असफल होते हैं तो तमाम लोग ऐसे भी मिलते हैं जो अपनी आलोचनाओं द्वारा हमारे प्रयास को कमजोर करने की कोशिश करते हैं । हमें उनकी ऐसी कोशिशों पर ध्यान नहीं देना है और अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करते रहना है अर्थात पानी की धार को निरंतरता के साथ जूते पर टिकाए रखना है । निश्चित रूप से एक समय ऐसा भी आएगा जब वह धार जूते पर चिपकी मिट्टी को बहा के किनारे कर देगी और इस प्रकार हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सफल हो जाएंगे

दोस्तों अक्सर हम अपने लक्ष्य को बहुत कठिन समझकर हार मान लेते हैं और आगे प्रयास ही नही करते परंतु हकीकत यह है कि अपने निरंतर प्रयासों से हम उस कठिन लक्ष्य को भी बड़ी ही सरलता से प्राप्त कर सकते हैं । यहां Important आपका प्रयास नहीं बल्कि निरंतरता के साथ किया गया प्रयास है । यदि आपके प्रयास में regularity है तो कोई भी लक्ष्य आपसे ज्यादा दिन दूर नही रह सकता !

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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
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