कद्दू की प्रेरणादायक लघु कहानी | सफलता के लिए संसाधनों को सही उपयोग जरूरी| short Inspirational Pumpkin And Farmer Story in Hindi. कद्दू और किसान कहानी

Inspirational Hindi Story On Pumpkin And Farmer


नदी के दोआब में बसा हरीसेवक पुर गांव जहां अपने छोटे से खेत में जग्गन अपने अथक परिश्रम से ठीक-ठाक सब्जियां उगा लिया करता था । हालांकि गांव से दूर-दूर तक कोई बाजार ना होने के नाते वह अपनी सब्जियां, गांव वालों को ही बेचने के लिए मजबूर है परंतु इस काम में ज्यादा कम्पटीटर न होने के कारण उसे अपनी सब्जियां का अच्छा मूल्य मिल जाता जिससे उसकी आजीविका चलती है । गांव में जग्गन के सिवा सब्जी बेचने वाला  एक मात्र व्यक्ति जोखन है जो स्वभाव से बहुत आलसी है । 

बरसात का मौसम आया । इंद्र देव ने मानो प्रलय लाने की ठान ली हो , कई दिनों से बरसात थमने का नाम नहीं ले रही है परिणामस्वरूप नदी का पानी खेतों से होता हुआ पूरे गांव को अपने आगोश में लिए जा रहा है । बेचारे गांव वाले इधर उधर छुपकर, किसी तरह अपनी जान बचा रहे हैं ।

हालांकि बरसात के थम जाने पर गांव में भरा पानी तो धीरे-धीरे खत्म हो जाता है परंतु इस बरसात में गांव वालों की फसल के साथ-साथ जग्गन की सारी सब्जियां भी नष्ट हो गई हैं तभी एक दिन जोखन, उसके पास आता है । वह बताता है कि वह सब्जियों के बीज लेने शहर जा रहा है यदि जग्गन, उसकी कुछ मदद कर सके तो वह उसके लिए भी थोड़े बीज लेता आएगा ।

जग्गन के लिए तो जैसे "डूबते को तिनके का सहारा" मिल गया हो वह अपने बचे कुचे पैसे जोखन को दे देता है परंतु बाढ़ में बर्बाद हो चुके, जग्गन को उस वक्त, जोर झटका लगता है जब जोखन अपने दोनों हाथ में दो कद्दू लिए उसके द्वार पर पहुंचता है और उसमें से एक कद्दू उसे देते हुआ कहता है 

दोस्त शहर में किसी ने मेरे सारे पैसे छीन लिए । मैं बड़ी ही मुश्किल से ये दो कद्दू अपने साथ ले आया हूं । तुम इनमें से ये एक कद्दू अपने पास रख लो और यह दूसरा कद्दू मैं अपने साथ ले जाता हूं इसके बीज को मैं अपने खेत में बोउगा क्या पता कोई चमत्कार हो जाए । मेरी मानो तो तुम भी ऐसा ही करो और बाकी सब उस ऊपर वाले पर छोड़ दो

जोखन के जाते ही जग्गन अपना सर पकड़ कर बैठ जाता है क्योंकि अब न तो उसके पास पैसे हैं और ना ही खेतों में सब्जियां ऐसे में उसका गुजारा भला कैसे होगा ‌।

जग्गन को परेशान देख, उसकी पत्नी कद्दू के बीज को निकालकर उससे कहती है 

"मेरी मानो, इस तरह हिम्मत हारने की बजाए इन बीजों को खेतों में बो आओ आगे ईश्वर की मर्जी" 

जग्गन कहता है
तुम नहीं जानती, ये कद्दू और इसके बीज कच्चे हैं । इन्हे बोने से कोई फायदा नही । ये बीज खेतों में पड़े-पड़े सड़ जाएंगे ।

"फायदा तो खेतों के खाली पड़े रहने से भी नहीं है इससे तो अच्छा होगा कि जो हमारे हाथ में है उसे हम करें बाकी सब भगवान पर छोड़ दें"
(पत्नी उससे कहती है)

पत्नी की बातों से प्रभावित होकर, जग्गन खेत में कद्दू के बीज बोने निकल पड़ता है । 

बुवाई के बाद से ही जग्गन रोज अपने खेत को बड़ी आशा और उम्मीद से निहार रहा है परंतु वक्त बिताने के साथ बढती निराशा से वह मायूस होने लगता है ।

परंतु एक दिन जग्गन के खेत में कद्दू के पांच पौधे निकल आते हैं जिसे देखकर उसके खुशी की सीमा नहीं रही । जग्गन अब पूरे मन से उन पौधों की सेवा में जुट जाता है जिसके फलस्वरूप जग्गन के खेत में हरियाली छा गई है परंतु बड़े अचरज की बात ये है कि आलसी जोखन के खेत, जग्गन से कहीं ज्यादा हरे-भरे हैं ।

असल में जोखन ने, जग्गन को धोखा दिया था । उसका कोई पैसा चोरी नहीं हुआ बल्कि उसने गांव में अपने एकमात्र कम्पटीटर जग्गन को मात देने के लिए ये चाल चली थी जिसमें उसने उसे एक कच्चा कद्दू पकड़ाया जबकि स्वयं जग्गन के पैसों से कद्दू के अच्छे बीज खरीदा ताकि एक तरफ जहां जग्गन फसलों के अभाव में भूखा मरेगा वही वह कंपटीशन के अभाव में अपने सब्जियों को मुंह मांगी कीमत पर बेजकर अच्छे पैसे कमा सकेगा 

परंतु जग्गन के अथक प्रयास व ऊपर वाले की कृपा से उसकी खेतों में कद्दू की पैदावार जोखन से कहीं  ज्यादा हुई है और बस इतना ही नहीं जग्गन के कद्दू से बनी सब्ज़ीयों का स्वाद जोखन के कद्दू से बनी सब्जियों से बहुत अच्छा है जिसके कारण लोगों की पहली प्राथमिकता जग्गन बन गया है ऐसी स्थिति में जोखन अपने कद्दू को औने पौने दाम में ही निपटाने के लिए मजबूर हैं । 


कद्दू और किसान की प्रेरणादायक कहानी से शिक्षा 

दोस्तो सफलता संसाधनो पर निर्भर नही करती अर्थात संसाधन कम हैं या ज्यादा इससे बात से बहुत फर्क नही पड़ता बल्कि फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कैसे करते हैं । कुछ लोग सीमित रिसोर्सेज को ही अपनी असफलता के लिए दोष देते रहते हैं परंतु कुछ लोग उन्ही रिसोर्सेज का सही उपयोग करके अपने सपनों को साकार बनाते हैं । इसीलिए व्यर्थ में अपनी असफलता के लिए किस्मत को दोष देने की बजाय आपके पास जो है और जितना है उसका सही इस्तेमाल करने का प्रयास करें फिर देखना कैसे सफलता आपके कदम चूमेगी!



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  Karan "GirijaNandan"
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