व्यापारी की प्ररेणादायक कहानी | धन कमाने की सीख देती, व्यापारी की कहानी | Short Inspirational Story of Traders in Hindi. बचत के साथ कमाई भी जरूरी कहानी

Short Inspirational Story of Traders in Hindi


एक बार व्यापारी, अपने दोनों बेटों को दो-दो सोने के सिक्के देते हुए, उन्हें दो विभिन्न प्रदेशों में रहने वाले, अपने दो व्यापारी मित्रों के पास पूरे एक साल के लिए छोड़ गया और जाते-जाते व्यापारी ने उन्हें वहां टिक्कर साल भर तक रहने की सख्त हिदायत भी दी ।

किन्तु महीना बीतते-बीतते उन दोनों व्यापारी मित्रों ने उसके बेटों को बिना तनख्वाह दिए ही काम से निकाल दिया परंतु अपनी दोस्ती की लाज रखते हुए उन्होंने व्यापारी के बेटों को अपने द्वारा दी गई रहने की जगह से नही निकाला ।

इस प्रकार एक अनजान शहर में रह रहे व्यापारी के दोनों बच्चे एक गहरे संकट से घिर गए । उनके सामने एक जैसा सवाल था कि "आखिर पिता से मिले हुए मात्र दो सोने के सिक्को से, बचे हुए 11 महीनों का गुजारा कैसे होगा ?"

बड़े भाई ने समझदारी दिखाते हुए उन दो सोने के सिक्को में से एक सिक्के को सुनार के पास बेच आया और सिक्के के बदले मिले पैसों को वह बड़े ही किफायत से खर्च करने लगा । वह रोज सुबह किराने की दुकान से थोड़ा आटा व आलू खरीद लाता और उसी से अपना एक-एक दिन काटता ।

वही उसके छोटे भाई ने अपने खान-पान में किसी प्रकार की कोई कटौती नहीं की जिसके कारण महीना बीतते-बीतते उसे अपने एक सिक्के के बदले मिले पैसों में से आधे पैसे खर्च हो गए । अब बड़ा सवाल यह था कि "आखिर बचे हुए एकमात्र सिक्के और थोड़े पैसों से अगले 10 महीनों का गुजारा कैसे होगा ?"

परन्तु इस सवाल का जबाब उसने पहले ही ढूंढ लिया था । असल में पिता के व्यापारी मित्र द्वारा निकाले जाने के बाद उसने किफायत से दिन काटने की बजाए, आगे आने वाले कठिन दिनों को आसान बनाने का रास्ता तलाशने में लगा रहा जिसमें उसे सफलता मिली और उसने महीना बीतते-बीतते अपने लिए उपयुक्त धन्धे का जुगाड़ कर लिया उसने बचे पैसों से ढेर सारे फल खरीदें और उसे ठेले पर लादकर बेचने निकल पड़ा । देखते ही देखते उसने नगर में अच्छा खासा धंधा जमा लिया । धंधे को फलता फूलता देख उसने अपने पास बचे हुए एक अंतिम सिक्के को भी बेचकर एक छोटी सी दुकान किराए पर ले ली इस प्रकार उसने अपने व्यवसाय को स्थाई कर लिया ।

वादे के मुताबिक एक साल गुजर जाने के बाद जब व्यापारी अपने दोनों बच्चों को लेने पहुंचा तब उसने देखा कि उसका छोटा बेटा न सिर्फ नगर का जाना माना फल विक्रेता बन गया है बल्कि उसने दो चार बंदे भी अपने यहां काम पर रख लिए हैं जबकि वहीं दूसरी तरफ पैसे बचाने के चक्कर में उसका बड़ा बेटा काफी दुर्बल एवं अस्वस्थ हो गया था । अस्वस्थ हो जाने पर उसने अपने बचे कुचे पैसों को भी अपने दवा-दारू में खर्च कर दिया जिसके कारण अब उसका हाथ बिल्कुल खाली हैं ।

नगर से जाते-जाते व्यापारी ने अपने दोनो मित्रों का धन्यवाद किया जिन्होंने उसके कहे अनुसार उसके बच्चों को नौकरियों से निकाला ताकि उनकी समझ की परीक्षा हो सके और जिसके फलस्वरूप व्यापारी अपने व्यापार के लिए अपने दोनो बेटो में से योग्य उत्तराधिकारी का चुनाव कर सके ।

दोस्तों यदि कहीं भी कुछ अच्छा सीखने को मिलता है तो उसे सीखने में कोई हर्ज नही है । ईसाई धर्म में एक बड़ी अच्छी बात कही गई है की "धन कमाना, धन बचाने के बराबर है" कुछ लोगों का पूरा जीवन सिर्फ बचत करने में ही गुजर जाता है जिसके परिणामस्वरूप वे एक नारकीय जीवन जीने के बावजूद ज्यादा कुछ नहीं कर पाते और एक दिन अपना बचाया हुआ धन भी कहीं न कहीं खर्च कर बैठते हैं इसलिए धन बचाने के साथ-साथ उससे कमाने पर भी जोर दें क्योंकि "धन कमाना भी, धन बचाने के बराबर है" ।


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  Karan "GirijaNandan"
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