गोलू की प्रेरणादायक कहानी, आप में है कुछ खास कहानी | You Are Unique Inspirational Story in Hindi. You Are Special Story With Inspiring Speech in Hindi

You Are Special Story With Inspiring Speech in Hindi


लम्बा सफर तय करके छुट्टियों में घर लौटे रणविजय को, सवेरे-सवेरे ही दोस्तों के साथ गिल्ली डंडा खेल रहे बेटे को देखकर बहुत गुस्सा आया । वो उसे जोरदार फटकार लगाते हुए कहता है

तुम्हारे जन्म पर, मैं और तुम्हारी मां कितना खुश थें । हमें लगा कि तुम गांव के दूसरे बच्चों से अलग हो मगर हम गलत थें । तुम बिल्कुल उन्हीं के जैसे हो, तुम उनसे जरा भी अलग नहीं

"अरे क्यों सफर का गुस्सा, अपने बेटे पर उतार रहे हैं । चलिए चलकर हाथ मुंह धो लीजिए, मैं नाश्ता लगाती हूं । गोलू तुम भी चलकर कुछ खा-पी लो"

रणविजय को बीच में टोकती हुई, उसकी पत्नी वृंदा उससे कहती है । रणविजय बीएसएफ में अफसर है । वह अपने बेटे को भी अपने जैसा ही बनाना चाहता है । आज वह काफी दिनों बाद छुट्टियों में घर लौटा है परंतु थके हारे रणविजय को बेटे द्वारा सुबह-सुबह पढ़ाई-लिखाई करने की बजाय, गिल्ली डंडा खेलता देख बहुत गुस्सा आ जाता है और वह उसपर बरस पड़ता है ।

पूरे 10 महीने बाद घर वापस लौटे पति की आवभगत में समय न जाने कैसे बीत जाता है और सुबह से दोपहर हो जाती है तभी वृंदा को गोलू का ख्याल आता है । वह रणविजय से कहती है

"पता नहीं गोलू कहां चला गया । अभी तक नहीं आया सुबह से कुछ खाया भी नहीं है । मैं जाकर देखती हूं आखिर मेरा लाडला कहां रह गया"

"अपने आवारा दोस्तों के साथ कहीं गिल्ली डंडा खेल रहा होगा । तुम परेशान ना हो, आ जाएगा"
(रणविजय थोड़े कठोर स्वरो में वृंदा से कहता है)

धीरे-धीरे दोपहर से शाम होने को है परंतु गोलू अभी तक घर नहीं आया । वह आस-पड़ोस में भी नहीं है । बीतते वक्त के साथ रणविजय भी बेटे के लिए चिन्तित होने लगता है । वह पत्नी के साथ गोलू को ढूंढने गांव में निकल पड़ता है । धीरे-धीरे अंधेरा होने को है परंतु गोलू का कुछ पता नहीं चल रहा है हां परंतु गांव वालो ने उन्हें इतना जरूर बताया कि उनका गोलू सारा दिन गांव के छोटे-बड़े हर टोलों मे घूमता नजर आया परंतु वह अब तक घर क्यों नहीं लौटा यह वृंदा और रणविजय के लिए एक बड़ा सवाल था ।

बच्चे के ना मिलने पर रणविजय को अब अपने किए पर अफसोस हो रहा है शायद उसे अपने बच्चे को इतना नहीं डांटना चाहिए था । वहीं वृंदा की आंखों से आंसुओं की धार बह निकली है । वह अपने पति से कहती है

"न जाने मेरा भूखा प्यासा गोलू किस हाल में होगा । कुछ कहने से पहले, ये भी नहीं सोचते कि आपकी ऐसी बातों का उस छोटे बच्चे पर क्या असर पड़ेगा । इतनी छोटी सी उम्र में, ना जाने आप उसे क्या बना देना चाहते हैं"

बच्चे के ना मिलने पर आखिरकार थक हारकर वे घर वापस चले आते हैं । घर पर पूरे गांव वालों का जमावड़ा है । एक तरफ जहां वृंदा की आंखों से आंसुओं की धार बहना नहीं थम रही है वहीं रणविजय के माथे पर चिंता की रेखाएं खींचती चली जा रही हैं ‌। अब तो गांव के बुद्धिजीवी लोग रणविजय को पुलिस में रपट  लिखवाने का मशवरा दे रहें हैं परंतु तभी एक मासूम सी आवाज रणविजय के कानों में गूंज उठती है ।

पापा, मैंने पूरा गांव घूम कर देख लिया, यहां मेरे जैसा दूसरा कोई नहीं । किसी की आंख मुझसे मिलती है तो नाक नहीं । किसी की नाक मुझसे मिलती है तो आंख नहीं और यदि दोनों मिलते हैं तो उसका रंग मुझसे थोड़ा अलग है फिर आप ये कैसे कह रहे थे कि मैं बिल्कुल गांव के दूसरे बच्चों जैसा ही हूं।

बेटे के सवालों को सुनकर वृंदा हंस पड़ती है और उसे गोद में उठाकर कहती है "हां मेरे लाडले जैसा दुनिया में कोई नहीं"

दोस्तों इस बात को आप कब समझोगे कि आप दुनिया में यूनिक हैं । पूरी दुनिया में आप जैसा न कोई था, न कोई होगा । आप पूरे ब्रह्मांड में सिंगल पीस हैं । आप बेवजह दूसरों के जैसा ही क्यों बनना चाहते हैं ? दूसरों की नकल करने में क्यों लगे हैं ? उनके जैसा दिखने की कोशिश, उनके जैसा बोलने की कोशिश, उनके जैसे हाव भाव, हेयर स्टाइल क्यों, आखिर क्यों ?

जरा सोच कर देखो यदि पूरी दुनिया सिर्फ किसी एक रंग की होता तो कैसा होता जैसे सब वाइट, या सब रेड, या सब कुछ ग्रीन होता तब ये दुनिया कैसी दिखती है, जरा इमैजिन करके देखो ‌। मेरे ख्याल से उससे बदसूरत दुनिया कोई हो ही नहीं सकती है अर्थात इस दुनिया की खूबसूरती किसी एक रंग जैसे रेड या ग्रीन के होने से नहीं है बल्कि ये सारे अलग-अलग रंग मिलकर ही इस दुनिया को इतना खूबसूरत बनाते हैं । 

यदि ये सारे अलग-अलग ना होकर, एक जैसे होते तो दुनिया इतनी खूबसूरत कभी नहीं होती । बिल्कुल ठीक ऐसे ही भगवान ने हर किसी को दूसरों से अलग बनाया है, कुछ अलग करने के लिए । आप में भी कुछ अलग करने का टैलेंट जरूर होगा ‌। उसको परखो और उसे तराशकर दुनिया के सामने लाओ फिर देखना लोग कैसे तुम्हारी नकल करने की कोशिश करते हैं । भीड़ का हिस्सा मत बनो । अपनी एक अलग पहचान बनाओ । भीड़ को अपने पीछे लाने की कोशिश करो ‌। याद रखो जो लोग अकेले चलने का दम रखते हैं भीड़ भी उन्हीं के साथ होती हैं ‌!


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  Karan "GirijaNandan"
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