दोस्तो "मेरे जीवन का लक्ष्य" "My Aim in Life" यह विषय हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है खासकर युवाओ के लिए । "मेरे जीवन का लक्ष्य" (Aim of my life) पर लिखा गया यह निबंध उम्मीद है आपको पसंद आएगा ।


भूमिका:

जिस प्रकार पानी की धारा को आगे बढ़ने के लिए एक निश्चित दिशा की आवश्यकता होती है उसी प्रकार हर व्यक्ति को जीवन में आगे बढने के लिए उसे अपना लक्ष्य निर्धारित करना बहुत इंपॉर्टेंट होता है । हालांकि हर व्यक्ति के सपने अलग-अलग हो सकते हैं जैसे कोई डॉक्टर बनना चाहता है तो कोई इंजीनियर बनना चाहता है कोई वकील बनना चाहता है तो कोई नेता बनना चाहता है और इसके पीछे हर किसी का मकसद भी भिन्न-भिन्न हो सकता है जैसे कोई डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहता है तो कोई पैसा कमाना चाहता है

परंतु मकसद चाहे जो भी हो मगर "मेरे जीवन का लक्ष्य" क्या है या होना चाहिए ? यह हर किसी को समझना आवश्यक है क्योंकि आपके जीवन का लक्ष्य आपका भविष्य निर्धारित करता है जो लोग समय रहते अपने जीवन के लक्ष्य को निर्धारित कर उसे हासिल करने मे जुट जाते हैं उनकी लाइफ अक्सर सुखमय और ईजी हो जाती है ।


मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध | जीवन का लक्ष्य क्या हो ? My Aim in Life Essay in Hindi. essay on aim of my life to become a successful person in hindi

Essay On Aim Of My Life To Become A Successful Person


जो मारोगे वो पाओगे अर्थात चूहों का शिकार करके तुम कभी शेर नहीं बन सकते और यदि तुमने शेर को मार गिराया तो फिर चूहे तो चूहे, शेर भी तुमसे टकराने का जल्दी साहस नहीं करेंगे !

अर्थात तुम जैसा कर्म करोगे तुम्हें फल भी बिल्कुल वैसा ही मिलेगा इसलिए यदि लाइफ में दूसरों की तरह तुम भी बड़ा और महान बनना चाहते हो तो तुम्हारा लक्ष्य भी ठीक वैसा ही बड़ा होना चाहिए और तुम्हारा प्रयास भी उसी के अनुरूप जबरदस्त व विस्फोटक होना चाहिए ।

बड़े बनने के लिये सपने भी बड़े देखो, अपना लक्ष्य भी बड़ा चुनो और उसी हिसाब से कर्म भी करते जाओ । वैसे तो बूंद-बूंद से सागर भरते हैं मगर ऐसा करने में कभी-कभी पूरी उम्र निकल जाती है इसलिए यदि सागर को भरना है तो फिर बूंद-बूंद भरने की बजाए कुछ और रास्ते तलाशने होंगे यानी अगर बड़े लक्ष्य को हासिल करना है तो कर्म भी बड़े और महान करने होंगे ।

बहुत से लोग किसी बड़े लक्ष्य की तैयारी करने से पहले कोई वैकल्पिक (optional) करिए तैयार करने पर जोर देते हैं मगर मेरा यह मानना है कि जो लोग ऐसा सोचते हैं वो अक्सर छोटी मोटी सफलता प्राप्त करके रह जाते हैं चूंकि बड़े सपने देखने वालों में रिस्क लेने का साहस होना बहुत जरूरी है और यदि आप मे वो साहस है तो फिर ज्यादा क्या सोचना इसलिए करियर को सिक्योर करने की सोच को आज ही त्याग दो ।

एक बड़ी अचीवमेंट के लिए आपने जो लक्ष्य चुना है उसके लिए पैर आगे बढ़ाओ असफलताओं के बारे में मत सोचो क्योंकि सफलता सिर्फ और सिर्फ एक बात पर निर्भर करती है और वो है "सफलता का विश्वास" । कुछ लोगों को यह बात शायद हवा हवाई लगे परंतु हकीकत यही है कि आपकी सफलता सिर्फ इस बात पर निर्भर करती है कि आपको इस बात का कितना विश्वास है कि आप अपने काम में सफल हो सकते हैं आपको अपनी सफलता का जितना अटूट विश्वास होगा, आपको सफलता मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी परंतु याद रखें कि इस विश्वास में जितना संशय (Doubt) होगा, आपकी सफलता में भी उतना ही संशय बढ़ता चला जाएगा ।

  • यदि सफलता नहीं मिली तो क्या होगा ?
  • तब क्या करेंगे ?
  • तब कौन सा विकल्प चुनेंगे ?
  • लोग क्या कहेंगे ?
  • लोग हंसेंगे 


ऐसे ख्यालों को कभी अपने आसपास भटकने भी मत दो । ये वो ख्याल हैं जो हमें कभी भी ऊंची छलांग लगाने ही नहीं देते और ऐसे विचार कहीं बाहर से नहीं आते बल्कि हमारे मन के किसी कोने में पड़े होते हैं जो बार-बार हमारे पैरों को पीछे खींचने की कोशिश करते हैं । असल में हमारी असफलता के लिए सिर्फ और सिर्फ ये विचार ही जिम्मेदार हैं । यदि ये विचार हमारे जेहन में ना आएं तो हमें सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता । हालांकि ये भी सच है कि इन विचारों को हम अपने जहन में आने से रोक नही सकते परंतु हां इतना जरूर है कि इन नेगेटिव थिंकिंग्स पर चिंतन करना या ना करना हमारे बस में हैं और हमें इन्हें टालना ही होगा ।

दोस्तों मेरा शुरू से ही ये विचार रहा है कि ये जिंदगी बार-बार नहीं मिलती और इस जिंदगी में अवसर भी बार बार नहीं मिलते इसलिए यदि शिकार करना ही है तो क्यों ना शेर का किया जाए । यदि हम छोटे-छोटे लक्ष्य को हासिल करने में अपना गोल्डन टाइम लगा देंगे तो इस प्रकार हम स्वयं, ही खुद को बड़े मुकाबले से पीछे खींच लेंगे इसीलिए अपना लक्ष्य बस एक बार सेट करें एक ऐसा लक्ष्य जिस पाकर आपको सेटिस्फेक्शन मिले, चाहे वो लक्ष्य कितना भी कठिन क्यों ना हो क्योंकि आसान से लक्ष्य का चुनाव करके यदि उसे अचीव कर भी लिया जाए परंतु फिर भी हमें वो सेटिस्फेक्शन या वो खुशी ना मिले तो फिर ऐसे लक्ष्य को हासिल करने का क्या फायदा ।

अर्थात लक्ष्य ये सोच कर डिसाइड ना करें कि उसे पाना आसान है या कठिन बल्कि ये सोचकर करें कि उसे पाने के बाद आपको संतुष्टि मिलेगी या एक बार फिर आप खुद को असंतुष्ट ही पाएंगे उदाहरण के तौर पर यदि आपको प्यास लगी हो और आपके सामने दो विकल्प हों

  • पहला जिसमें आपके बिल्कुल पास एक पानी से भरी ग्लास है परंतु ग्लास बहुत छोटी है यानि उसमें पानी भी कम होगा ।
  • दूसरा जिसमे आप से बहुत दूर एक बड़ी ग्लास है जिसमें पर्याप्त पानी भरा हुआ है ।


ऐसे में आप किस विकल्प का चुनाव करेंगे यदि आप पास स्थित ग्लास का चुनाव करते हैं तो आपको कम मशक्कत में ही पानी मिल जाएगा मगर हां उससे आपको संतुष्टि नहीं मिलेंगे अर्थात आपकी प्यास नहीं बुझेगी परंतु यदि आप बड़ी ग्लास की तरफ रुख करते हैं तो आपको ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी जिसमें ज्यादा समय लग सकता है अर्थात आपको अपनी प्यास को कुछ देर के लिए बर्दाश्त करना पड़ सकता है यानी धैर्य रखना पड़ सकता है परंतु इस परिश्रम के बाद यदि आप ग्लास तक पहुंचने में सफल रहें तो आप अपनी प्यास बुझाने में भी सफल रहेंगे और इस प्रकार आपको सेटिस्फेक्शन मिलेगा तो इसप्रकार पहले आप ये तय कर लीजिए कि आपको प्यास कितनी है क्योंकि आपका लक्ष्य भी बिल्कुल उसी के अनुरूप होना चाहिए । 

यदि आप महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व के स्वामी हैं तो आप अपनी महत्वाकांक्षाओं के अनुसार अपने लक्ष्य का निर्धारण करें और फिर वैसे ही कर्म भी करें । यदि इन दोनों को ठीक से करने में कहीं भी चूक हो जाती है अर्थात सही लक्ष्य का निर्धारण करने में या फिर उसके लिए मुकम्मल कोशिश करने में तो ऐसी सूरत में आप कभी संतुष्ट नहीं हो सकते ।

निष्कर्ष:

तो दोस्तों स्पष्ट है कि हमारे जीवन का लक्ष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी अभिलाषायें क्या हैं । इसे एक बार समझने के बाद हमें उसे पूरा करने के लिए उसके अनुरूप अपना लक्ष्य तय करना चाहिए । यदि आपको अपने लक्ष्य से संबंधी कोई समस्या आ रही हो तो कृपया आप उसे यहां हमसे पूछ सकते हैं ‌। हमें आपकी समस्या का समाधान करने में खुशी होगी ।


अस्वीकरण: 

उक्त बातें लेखक के अपने निजी विचार हैं । इस विषय में कोई राय बनाने से पहले इसपर स्वयं गंभीरता से विचार कर लें अन्यथा किसी भी प्रकार की क्षति होने पर लेखक या वेबसाइट की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी !





 Writer

  Karan "GirijaNandan"
 With  
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