जिंदगी का पत्ता


पैर से रौंदे हुए घास

फिर से उग आतें हैं,

मगर हाथों से तोड़े पत्ते

हमेशा बिखर जाते हैं,


बिखरे पत्ते उठाने का काम

शायद हीं कोई करता है

मगर करीब आने वाले

हमेशा पत्ते तोड़ जाते हैं,


हवा के किसी झोंके से

पत्ते आसमान छूतें हैं

और कभी-कभी

गर्त में गिर जातें हैं,


देते हो भले छाया

पर पत्तों का अस्तित्व है क्या?

लगे, दिखे और टूट जाये

या फिर बिखरकर किसी और के,

पैरों तले रौंद जाये।  



Pair se raunde hue ghaas 

Phir se ug aaten hain, 

Magar haathon se tode patte 

Hamesha bikhar jaate hain,   



Bikhare patte uthaane ka kaam 

Shaayad heen koee karata hai 

Magar kareeb aane vaale 

Hamesha patte tod jaate hain,  



Hava ke kisee jhonke se 

Patte aasamaan chhooten hain 

Aur kabhee-kabhee 

Gart mein gir jaaten hain,   



Dete ho bhale chhaaya 

Par patton ka astitv hai kya? 

Lage, dikhe aur toot jaaye 

Ya phir bikharakar kisee aur ke, 

pairon tale raund jaaye.                                 


                          

Poet
प्रेरणा गहलोत



यह कविता प्रेरणा कुमारी द्वारा लिखी गई है | प्रेरणा कुमारी बेगूसराय, बिहार की रहने वाली है | समाज की  बुराइयों पर कुठाराघात करना आपकी कविताओं की प्रमुख विशेषता है | MyNiceLine पर  आपकी अन्य प्रमुख रचनाएं कृपया यहाँ पढें!

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