13 फरवरी 2014 विशुनपुरम,मुम्बई, दो शख्स जिनके साथ एक औरत भी है। दरवाजे पर नाॅक करते हैं, अन्दर से पूनम निकलती है। पूनम उन्हे अन्दर ले जाती है, काफी देर तक उनमे बाते होती है।
कुछ देर बाद.

प्रेम के घर से जा रहे एक शख्स को ऊपर फ्लैट से कोई चीख पुकार सुनाई देती है। ऊपर देखने पर एक बुजुर्ग औरत हाथ हिला रही है, मानो वो किसी परेशानी मे है, और मदद के लिये बुला रही है।

   कुछ ही पलो मे वहा भीड़ इकट्ठा हो जाती है। लोग फ्लैट का दरवाजा खोलते है नजारे होश उड़ा देने वाले है। फर्श पर खून के धब्बे है, और अन्दर बूढी औरत की चीख सुनाई दे रही है। कोई समझदार व्यक्ति घटना की नजाकत को समझते हुए फौरन पुलिस को इतेला करता है।

   कुछ ही पलो मे सूचना  पाके दिल्ली पुलिस वहा पहुंच जाती है। पुलिस मकान के अन्दर दाखिल होती है। फर्श पर खून के छींटे है। अन्दर जाने पर बाथरूम मे एक महिला है। जिसे बड़ी बेरहमी से मारा गया है। वो खून से लथपथ है, उसके कपड़े भी फटे हुए है। मकान का सारा सामान बिखरा पड़ा है। अन्दर एक कमरा है, जो बन्द पड़ा है। जिसकी खिड़किया रोड की तरफ खुलती है, उसे खोलने पर उसमे एक बुजुर्ग महिला मौजूद है जिसकी चीख-पुकार से ही लोग सड़क पर इकट्ठा हो गए थे। महिला के सर पर किसी धारदार हथियार से हमला किया गया है।

    इंस्पेक्टर सत्यपाल सिंह उस बुजुर्ग महिला से घटना के बारे मे पूछते है, वो बताती है कि सुबह कुछ लोग वहा किराए का रूम देखने आए थे। थोड़ी देर बात करने के बाद मेरी बेटी पूनम जैसे ही कुछ काम से अपने कमरे मे गई। उन्होंने मेरा मुँह दबा कर मुझ इस कमरे मे लाए और मेरा हाथ पैर बाँधकर, मेरे मुँह मे रूमाल ठूंस दिया। उसके बाद मैंने बड़ी कोशिश कर के अपने हाथो की रस्सी खोली,फिर मैंने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की,और अपनी बेटी पूनम को आवाज लगाया। पर जब दरवाजा नही खुला तो मैने बाहर की तरफ खिड़की से आते-जाते लोगो को पुकारना शुरू किया।

      माँ ने तुरंत अपनी बेटी के बारे मे सत्यपाल से पूछा, पर वो तो जाने कब की मर चुकी थी।

    किसी ने इन सब की सूचना पूनम के पति को दी,प्रेम भी वहा पहुंच गया वह पूनम को मरा पाकर फूट-फूटकर रोने लगा। पूनम की माँ इस हादसे से सदमे मे आ गई थी। वो कुछ ऐसा व्यवहार करने लगी थी, मानो उसने अपना मानसिक सन्तुलन ही खो दिया हो, और ऐसा होना लाजिमी था। आखिर इस उम्र मे अपनी जवान बेटी की ऐसी नृशंस हत्या भला कौन माँ सहन कर सकती थी। सनसनीखेज मामला पूरे शहर मे गूंज गया, लोग किरायेदार रखने से कतराने लगे, जो लोग किरायेदार रखे भी थे, उन्हे वो शक की निगाह से देखने लगे, उनसे दूरी बनाने लगे।

     हालांकि प्रथम दृष्या यह, लूट का मामला लगता था। क्योंकि हत्यारो ने पूनम के शरीर के सारे गहने, घर मे रखे सारे गहने व सारे पैसे अपने साथ ले गए थे।

     तो क्या ये एक लूट का मामला था, और महज चंद पैसो और गहनो के लिए कोई दरिंदगी की इस हद तक जा सकता है।

  प्रेम और पूनम एक-दूसरे को कालेज के दिनो से जानते है, और आगे चलकर वह एक-दूसरे को दिल दे बैठते है। दोनो के प्यार के आगे परिवार को भी झुकना पड़ता है। दोनो शादी के बंधन मे बध जाते है। प्यार, शादी और फिर परिवार, प्रेम और पूनम के तीन बेटे थे।
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   तीनों की परवरिश का जिम्मा पूनम पर होता है।पूनम का मायका वही पास मे था।उसकी माँ अक्सर वहाँ आया करती थी नही तो ये लोग चलें जाते थे।पूनम की माँ शारदा अपनी बेटी से उसके दो बड़े बेटे जिसमें से एक सातवी और दूसरा पाँचवी कक्षा मे पढ़ते है।को अपने पास रखने को कह देती है। उसके दोनों बेटे आदि और अभि नानी के वहाँ रहकर काफी खुश थे।क्योकि वहाँ न ही माँ की डाँट का डर और न ही पिता के मार का खौफ माँ के इस कदम से पूनम और प्रेम के बीच कम हो चुका रोमांस अपने शिखर पर पहुंच जाता है। बच्चो की जिम्मेदारी कम होने के कारण दोनो एक-दूसरे को फिर से वक्त दे पा रहे है। सैर-सपाटा, सिनेमा और खूब सारी मस्ती दोनो की जिन्दगी मे नये रंग भर देती है ।

   प्रेम पूनम को गोलगप्पे की दुकान पर ले जाता है, बातों-बातो मे वो पूनम से कहता है।

  "पूनम आज शादी के इतने सालो बाद तुमने फिर से कालेज की यादे ताजा कर दी"

पूनम "अरे यार ये तो शुरुवात है, आगे-आगे देखो होता है क्या"

  तभी पूनम का पुराना दोस्त राजेश जो उसके साथ ही कालेज मे पढता था। वहा आ जाता है, और दोनो को हाय कहता है। प्रेम को राजेश बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

   पूनम को सीढियो से उतरते वक्त पैर फिसलने से  पैरो मे थोड़ी चोट आ जाती है। इस दौरान प्रेम उसकी बहुत सेवा करता है। पर उसे अपनी जाॅब भी देखनी थी।

    शाम को जब प्रेम घर लौटता है,तो उसे देखकर पूनम सरप्राइज़ हो जाती है। और खुशी से झूम जाती है काफी दिनों बाद पूनम अपनी मां और अपने बच्चों को देख पाती है प्रेम उनको अपने साथ लेकर आया था। इसके लिए प्रेम को थैंक्स कहती है, एक दिन प्रेम ऑफिस के लिए जा रहा होता है। तभी दो लोग वहां आते हैं, वह किराए का रूम के लिए वहां आए हैं, प्रेम के घर के पीछे दो कमरे खाली पड़े थे। काफी समय से कोई नया किराएदार उन्हें नहीं मिला था। प्रेम उनसे पूरी जानकारी लेने के बाद पूनम से मकान दिखाने को कह कर ऑफिस के लिए चला जाता है, जो उन्हें पसंद आता है, दूसरे दिन वो फिर आने को कहते हैं, और फिर दूसरे दिन ही पूनम की हत्या हो जाती है।

अविश्वास की घटना में मुंबई वासियों को झकझोर कर रख दिया था। आखिर कौन थे, वो हत्यारे क्या यह किसी हत्यारों की गैंग की सोची समझी रणनीती के द्वारा हुआ था।
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   आखिर इस घटना के पीछे की सच्चाई क्या थी, पुलिस पूरी मुस्तैदी से घटना की जांच में जुट जाती है। उसे जो कोई भी उस मकान के पास या चौराहे पर दिखता है, उससे वह पूछताछ करने में जुट जाती है। हालात यह हो जाते हैं, कि कोई भी व्यक्ति अपने लड़कों को बाहर जाने से रोकता है।          

   धीरे-धीरे मोहल्ले में सन्नाटा छाने लगता है बढ़ते प्रेशर और कोई सुराग ना मिलने के कारण केस की सीबीआई जांच को आदेश हो जाता है। जांच कर रहे सीबीआई के लोग सादे वेश में आसपास के क्षेत्रों में घूमने लगते हैं, एक दिन चाय की दुकान पर कुछ दोस्त काफी खुश नजर आते हैं, वह आपस में बातें कर रहे हैं, आज उनके द्वारा किए गए किसी काम के बदले मोटी रकम मिलने वाली है। शक के बिना पर जब उनका रिकॉर्ड खंगाला जाता है तो वो पेशेवर अपराधी मिलते हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ शुरु करती है, उसके बाद जो सच सामने आता है वह पहले लग रही हकीकत को पूरी तरह झूठा साबित कर देता है ।

हत्या कराने वाला सख्स कोई और नहीं बल्कि उसका पति प्रेम है। पुलिस को प्रेम पर शक तब ही हो गया था जब प्रेम के बच्चों से पूछताछ में ये सच्चाई सामने आई थी, कि पूनम के मृत्यु के दूसरे दिन ही वो खुद एवं बच्चों को कोल्ड्रिंग और चिप्स खिला रहा था पुलिस की शक की सुई तभी से प्रेम की तरफ घूम गई थी।

   रघुवीर जोकि स्वयं किसी लड़की के प्रेम में पड़ कर सजायाफ्ता था। उसकी पत्नी जूही पर मृतक पूनम के पति यानी प्रेम का दिल आ गया धीरे धीरे जैसे नए वस्तुओं के सामने पुरानी वस्तुएं फीकी पड़ने लगती हैं, वैसे ही पूनम का प्यार जूही के नए प्यार के आगे प्रेम को फीका लगने लगा था। यह प्यार इस हद तक आगे बढ़ गया कि अपने  प्यार पूनम का जान से मारने का निर्णय ले लिया उसने यह काम खुद ना करके एक योजना के अंतर्गत गुंडों को पैसे देकर करवाया अपनी सोची-समझी चाल के मुताबिक बड़ी ही चालाकी से उसने अपने सासु मां को विश्वास में लेने के लिए उन्हें पूनम की हेल्प के लिए पहले अपने साथ अपने घर लाया जिससे मां को अपने दामाद का अपनी बेटी के प्रति केयर और प्यार का अंदाजा हो जाए।

   जिससे कभी उसके ससुराल पक्ष को उस पर शक ना हो, इसके बाद उन गुंडों को एक दिन पहले वह खुद बुलाता है। और गुंडे एक किराये का मकान खोजने वाले बनकर उस से इस प्रकार मिलते हैं, जैसे वो प्रेम से पहले कभी मिले नहीं,

   दोस्तों पत्नी कोई वस्तु नहीं होती वो आपकी सबसे अच्छी दोस्त होती है। जो हर गम को भुला कर सुख दुख में आप का साथ निभाती है, जिसकी चमक हर दिन बढ़ती है, पर उस चमक को देखने के लिए मन की आंखों की आवश्यकता होती है, पर प्रेम तो सही मामलों में जीवनसंगिनी का मतलब ही भूल गया था हत्या के इस सगीन मामले में प्रेम को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

Moral of  the story

तन की झूठी चमक में मन की असली चमक को ना भूलें जो गलती प्रेम ने कि उसे आप ना दोहराएं !!

       Writer
      Karan "GirijaNandan"
     With  
     Team MyNiceLine.com

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