एक बार जंगल में चार भालूओ के बीच मीटिंग चल रही थी। उन्हें जानकारी मिली थी कि पास के ही एक दूसरे जंगल में जीवन के लिए परिस्थितियां काफी ज्यादा बेहतर है। वहां वो ज्यादा खुशहाल रहेंगे। पर एक भालू बरसों से रह रहे अपने जंगल में काफी घूल मिल गया था। उसे जंगल से काफी लगाव भी हो गया था। वो उसे छोड़कर जाने को तैयार नहीं था ।

   मगर जंगल को बदलने के पक्ष वाले लोगों की संख्या ज्यादा थी। फिर क्या जिधर का पलड़ा भारी जीत उधर की ही होती है। आखिरकार ये तय हुआ कि सभी भालू ये जंगल छोड़ देंगे।

   मगर जंगल को छोड़ने का फैसला तो आसान था पर जो सबसे बड़ी मुश्किल थी वो थी इस जंगल को छोड़ दूसरे जंगल में जाने का रास्ता वो पहाड़ों के मध्य से होकर गुजरता था। जो काफी कठिन और जोखिम भरा भी था।

   मगर जब "ओखली में सर डाल ही दिया, तो मुसरो से क्या डरना"

   बस फिर क्या था सब निकल पड़े अपने नए ठिकाने की ओर सभी भालूओ में अपने नए ठिकाने को लेकर काफी उत्साह और उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी। सब बड़े खुश थे, जंगल को पार करने के बाद अब समय था पहाड़ की चढ़ाई करना समय के साथ सब के चेहरे पर थकान की लकीर दिखाई देने लगी, पर जोश उनमे कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था।

   अचानक पहाड़ पर चलते समय काफी दुविधा में डालने वाला एक दृश्य सामने प्रकट हुआ। पहाड़ों के रास्ते में एक जगह ऐसा रास्ता था जो काफी सकरा था हालांकि वो थोड़ा ही लंबा था, पर नीचे काफी गहरी खाई थी। उसे देखते ही सारे भालू मन ही मन काफी भयभीत होने लगे। घबराहट उनके चेहरे पर दिखने लगी।
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   उनमे कुछ वापस लौटना तो चाहते थे। मगर चूंकि स्वयं उन्होंने लड़ झगड़ कर ये फैसला लिया था इसलिए अब उनके पास कदम आगे बढ़ाने के सिवा दूसरा कोई चारा भी नहीं था।

   हालांकि जाने भर का रास्ता तो था, मगर जोखिम को देखकर सब के सब सिहरने लगे। सभी के पैर डर के कारण इधर उधर पड़ने लगे, सारे भालू सामने कम जबकि नीचे खाई की ओर ज्यादा देखते।

    धीरे धीरे घबराहट काफी बढ़ने लगी। लड़खड़ाते कदम रास्ते के किनारो से दूरी बनाकर चलने के बजाए किनारों की ओर ही मुड़ने लगे। नतीजन उनका पैर फिसला और वे नीचे गिरने लगे, जिसे देखकर बाकी भालूओ मे भी रास्ता जल्दी से पार करने की होड़ मच  गई। जिससे वो एक दूसरे से टकराकर और घबराहट से नीचे गिरने लगे।

   अन्त मे सिर्फ एक भालू ही उनमे बचा जो रास्ता पार कर सका। वो भालू एक मामले में उनसे अलग था। वो अंधा था।
      
        कहानी से शिक्षा

  हम अक्सर मुश्किलों को देखकर अत्यधिक घबरा जाते हैं। और फिर हम वो करते हैं, जो सामान्य स्थिति में शायद ना करे, परिस्थितियों से अनभिज्ञ रहना ठीक नहीं मगर मुश्किलों से घबराना भी सही नहीं उन का डटकर सामना करने मे ही भलाई है !



   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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