हर माँ की तरह सरोजनी अपने बेटे रवि से बहुत प्यार करती थी | और उसका     पूरा ख्याल रखती थी | एक दिन दरवाजे से किसी ने आवाज लगाई | कौन आया इतनी सुबह- सुबह ये सोचते हुए रवि तेजी से बाहर दरवाजे की तरफ बढा अचानक  किनारे रखे एक टेबल से रवि का पैर जा टकराया  रवि ने उस एक    क्षण कोशिश तो बहुत की पर अफसोस की उसकी सारी कोशिश बेकार गई क्योंकि टेबल तो नही गिरा पर टेबल पर रखा जार उसके हाथ मे आते-आते  रह गया  और जार मे  सरोजनी के बनाए आम के अचार जो की रवि को बहुत पसन्द थे जार के टूटते  ही फर्श पर बिखर गए |

 जोशीले रवि को जार के टूटने का दुख कम मगर जार को बचा पाने मे अपनी अकुशलता से, उसे खुद पर बहुत गुस्सा आया | किचन मे काम कर रही सरोजनी भी किचन से बाहर आयी और रवि के इस कृत को देख कर, जो कि उसने जानबूझकर नही किया था, उसपर बरस पड़ी | रवि कुछ देर तक तो सुनता रहा, पर थोड़ी ही देर मे  उसके  सब्र का बाँध टूट गया  | उसने जार के टूटने की वजह को महज इत्तफाक मानते हुए, अपनी गल्तीओ से पल्ला झाड़ने लगा | जोकि, सच तो था पर, आधा और वैसे भी कई बार जल्दबाजी मे हम सब से ये गलतियाँ होती रहती हैं, हाँ पर इसके  कुछ दोषी तो हम भी होते हैं, पर रवि इस बात को मानने को तैयार न था | इस बात को लेकर काफी देर तक बहस चलती रही ,अन्त  मे माँ ने रवि को पूरे दिन भोजन न देने की हठ ठान ली इधर रवि भी अपने  बात पे अडिग रहा |


     नाराज रवि घर की बालकनी मे जाकर चुपचाप बैठ गया, उधर सरोजनी भी अपने काम मे लग गयी | रवि जो अक्सर माँ के साथ ही खान खाता और जब कभी ऐसा न हो पाता तो समय मिलते ही माँ से जरूर पूछता, "माँ तूने खाना खाया" आज हठ पर अड़े माँ बेटे ने एक-दूसरे के साथ न खाना खाया, न एक-दूसरे को खाने को पूछा | धीरे-धीरे दिन ढलता गया, रवि कभी बालकनी मे टहलता, कभी बैठता तो कभी कुछ सोचने लगता | हालांकि जैसे-जैसे समय गुजरता गया क्रोध घटने लगा और भूख बढती गई | मगर दोनो अपने हठ पर अड़े रहे | रवि ने घर मे बने भोजन की तरफ देखा तक नही, तभी अचानक ठेले पर मूंगफली वाला जो शाम को अक्सर घर के  सामने से गुजरता था उसकी आवाज सुनते ही, रवि को रहा नही गया वो झट से ठेले के पास पहुंचा और ठेले वाले से दस रुपये की मूंगफली खरीदी |उसे खाकर थोड़ी देर क लिए मन को सुकून तो मिल गया परंतु उससे भूख कहाँ मिटने वाली थी | रात के नौ बज गए, रवि भी बालकनी से अपने कमरे मे चला आया | भूख तो बहुत लगी थी पर झुकना मंजूर नही, थोड़ी ही देर मे सरोजनी उसके कमरे मे थाली मे रवि के पसंदीदा भोजन लेकर पहुंची और रवि से खाने के लिए बोली, पर रवि कहाँ सुनने वाला | वो मुँह मोड़कर दिवार की तरफ नीचे देखने लगा, तभी सरोजनी की आंखो से ममता के आंसू छलक पड़े बहते आंसूओ के साथ, रवि से कहा "सुबह से तुमने कुछ नही खाया, खाना खा लो | माँ के बहते आंसूओ को देख रवि भी खूद को रोक नही सका, उसने कुछ कहा तो नही पर माँ के सीने से लिपट के बस रोता रहा जैसे माँ को दिनभर भूखा रखने का दुख   उसके आंखो से बहते आंसू बया कर रहे हो ।

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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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