06 November, 2017

ईष्या तू न गई मेरे मन से | Jealous Is Bad Inspirational Story In Hindi




बसंतपुर का राजा अपनी दोनों पत्नियों से बहुत अधिक प्यार करता था। दोनों को एक बराबर ही महत्व देता था।
   उस की पहली पत्नी स्वभाव से बहुत सरल थी। उसके मन में हर किसी के लिए मानवता का भाव था। वह किसी के प्रति ईष्या या बदले की भावना नहीं रखती थी। वह राजा की दूसरी पत्नी संयोगिता को भी बहुत मानती, उसका काफी ख्याल रखती उसके इस भोले-भाले स्वभाव की वजह से सभी उसकी तरफ खींचे चले आते थे।
     राजा की दूसरी पत्नी संयोगिता स्वयं काफी सुंदर थी परन्तु,  राजा की पहली पत्नी मृदुला से थोड़ा कम सुन्दर थी, वह मृदुला के स्वभाव को महज एक दिखावा मानती थी। मृदुला अत्यधिक सुंदर थी,  उसके सुन्दरता के चर्चे पूरे राज्य मे थे। हर कोई उसके रूप-रंग की बड़ी प्रशंसा करता था, मृदुला की सुंदरता के काफी तारीफ को सुनते-सुनते संयोगिता उससे बहुत ईष्या करने लगी थी। वह हमेशा उससे अधिक सुंदर दिखने का प्रयत्न करती साथ ही वह उसके खिलाफ राजा के रोज कान भर्ती जिससे राजा एक दिन मृदुला से नाराज होकर उसे अपने राज्य से ही निकाल दें और फिर मृदुला की जगह सिर्फ संयोगिता की सुन्दरता की ही बात हो ।
     संयोगिता का एक पुत्र था जबकि मृदुला की कोई संतान नहीं थी।  
    एक दिन महल में एक जोगी आता है। वह संयोगिता के अंतर्मन की बात जान लेता है। वह  संयोगिता को बताता है, कि वह उसके सपनों को साकार कर सकता है। संयोगिता उसे ढेर सारे सोने के सिक्के देती है। जिसके बदले जोगी उसे जादुई कंघी देता है।
    उस दिन आधी रात को संयोगिता मृदुला के कमरे में जाती है। और मृदुला के बालों में कंघी करने लगती है।
   अगली सुबह दासियां जब मृदुल को उठाने जाती हैं। तो मृदुला अभी भी सो रही होती है, पर उसके सर पर एक भी बाल नहीं थे। उसका यह रूप देख कर सब उस पर जोर जोर से हंसने लगते हैं। उनकी हंसी सुनकर मृदुला जाग जाती है।
    यह खबर जब राजा को पता लगती है, तो वह भी वहां पर पहुंच गए, रानी ने  अपना ऐसा रूप स्वंय नहीं बनाया था। मगर अपनी दासियों के सामने अपनी जिल्लत राजा को बर्दाश्त नहीं हुई, उन्होंने रानी को राज्य से बाहर कर दिया। राज्य से निकाले जाने पर रानी एकदम से टूट गई। वह एक नदी के किनारे जाकर बैठ गई। उसे समझ में नहीं आ रहा था वो क्या करें, वह फूट फूट कर रोने लगी।
    रोती हुई रानी को सुनकर वहां अचानक एक परी प्रकट हुई, उसने रानी से पूछा
  "हे रानी तुम इस नदी किनारे क्यों बैठकर विलाप  कर रही हो"
    रानी ने उसे अपनी आपबीती सुनाई, परी ने रानी को एक छड़ी दी और बोली
  "वो सामने जो पपीते का पेड़ देख रही हो उस पर लगे फलों को इस छड़ी से मारकर फल को तोड़ना ध्यान रहे फल नीचे न गिरे उसे अपने हाथ से पकड़ लेना"
   रानी ने ऐसा ही किया उसने पपीते की फल को हाथ मे लेने के बाद जैसे ही उसे तोड़ा रानी के सर पर बाल वापस आ जाते हैं और वो परी फिर प्रकट हो जाती है। वह रानी से कहती है,
   "तुम इस नदी में नहा लो तुम्हारे बाल और तुम्हारा पूरा शरीर अत्यधिक सुंदर हो जाएगा"
   रानी ने ऐसा ही किया, फिर जब रानी वापस महल में पहुंची तो राजा उसे देखते ही रह गए। उसको बहुत सम्मान दिया, मृदुला के अति सुंदर और उनके प्रति राजा के प्यार, सम्मान को देखकर संयोगिता अत्यधिक ईष्या से जल उठी। वह एक दिन रानी के पास आयी, और उसकी खूब सेवा की इसी बीच उसने रानी से उसके बालो के वापस आने और इस सुन्दरता का रहस्य  जान लिया, फिर किसी को बिना बताए वो अकेले नदी के तट पर जा पहुंची।
   नदी के तट पर बैठकर जोर-जोर से रोने लगी। उसकी करूण रूदन सुनकर वह परी पुनः प्रकट हुई, उसने  संयोगिता से उसके दुख का कारण पूछा तो उसने उसे अपने बारे में कुछ वैसे ही कहानी सुनाई जैसी बड़ी रानी मृदुला ने परी को सुनाई थी। परी उसकी बातें सुनकर मन ही मन थोड़ा मुस्कुराती है। पर फिर भी उसे एक छड़ी देती है, और पपीते के पेड़ पर मारने को कहती है।
   संयोगिता जैसे ही पपीते के फल को तोड़ती है। उसमें से सांप निकल आता है। और वह उसको डंस लेता है।
    संयोगिता की वही मृत्यु हो जाती है।


 इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है :-
   दोस्तों, हर किसी मे कोई न कोई विशेषता जरूर होती है, मगर दूसरा की विशेषताओ को  देखकर अपने मन में ईष्या की भावना पैदा करना, हमेशा खुद को नुकसान ही पहुंचाता है ।


Writer -   Karan "GirijaNandan"



            
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