जीत पक्की है गर यकीन सच्चा है !  

अगर मैं पक्षी होता – कविता - निशा कौशल सिंह

 अगर मैं पक्षी होता।

दूर - दूर तक घूमकर आता,

अगर मैं पक्षी होता।

मम्मी जो बुलाती अंदर आओ- श्याम हो गई ,

चू- चू  कर फिर उड़ जाता,

अगर मैं पक्षी होता।

खूब देर तक करता अचर- विचर मैं,

भूख लगने पर पेड़ से ताज़ा मीठे फल खाता,

अगर मैं पक्षी होता।

ना पढ़ने की चिंता,

ना बीमारियों का डर,

बस सेर ही सेर करता मैं नभचर ,

अगर मैं पक्षी होता।

अगर मैं पक्षी होता।।

                                      

अगर मैं पक्षी होता – कविता - निशा  कौशल सिंह


Poet
निशा  कौशल सिंह


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