एक गांव में ध्रुव व धीरज दोनों काफी अच्छे दोस्त रहते थे। दोनों की दोस्ती गांव में एक मिसाल के तौर पर देखी जाती थी। दोनों दोस्त एक दूसरे के खिलाफ कोई बात बर्दाश्त नहीं कर सकते थे, वक्त के साथ-साथ दोनों बड़े होते हैं और देखते ही देखते दोनों की शादी और फिर परिवार हो जाता है। पर वक्त की धूल ध्रुव और धीरज की दोस्ती पर नहीं पड़ती उनकी दोस्ती की चमक बरकरार है।

   एक दिन गांव के बीचों-बीच से होकर एक नहर पास होती है। जिसमें ध्रुव के खेत का कुछ टुकड़ा भी जा रहा होता है। गांव का मुखिया जो कि ध्रुव व धीरज की दोस्ती से काफी जलता था। ध्रुव को बताता है कि नहर में तो धीरज का खेत आ रहा था मगर उसने इंजीनियर को पैसे देकर उसे थोड़ा आगे बढ़ा दिया चूंकि तुम्हारा खेत धीरज के जमीन के सटे है। इसलिए नहर अब तुम्हारे खेत से जाएगी। अब धीरज का नुकसान तुमको चुकाना होगा।

   ध्रुव को मुखिया की बातों पर विश्वास हो जाता है ध्रुव को अपने खेत के नुकसान का गम नहीं था। बल्कि धीरज द्वारा चली गई इस चाल से उसमें काफी गुस्सा था। ध्रुव धीरज के घर की तरफ चल पड़ता है। तभी रास्ते में जाता हुआ धीरज ध्रुव को दिखाई देता है, वह उसे आवाज लगाता है ।

    धीरज ध्रुव को देखता है पर वो रूकने की बजाए चलता चला जाता है। फिर क्या था धीरज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। सुबह तड़के ध्रुव धीरज के घर पहुंच जाता है। धीरज को देखते ही वह उसपर भड़क जाता है। देखते ही देखते सारे गांव की भीड़ वहां इकट्ठा हो जाती है। दोनों दोस्तों को इस तरह लड़ता देख पूरा गांव अश्चर्य मे पड़ जाता है। ध्रुव की बेटी रचना को अपने पिता का अपमान सहन नहीं होता, वो नित्य धीरज से बदला लेने का उपाय सोचने लगती है।

   एक दिन संयोगवश ध्रुव को किसी काम से शहर आना पड़ता है । इसी बीच दोपहर के समय रचना खुद पर मिट्टी का तेल डालकर खुद को जला लेती हैं, उसके चिल्लाने से गांव वाले पहुंचते हैं, बहुत प्रयासों से गांव के लोग रचना को लगी आग बुझाने  में सफल हो जाते हैं। मगर तब तक ध्रुव की बेटी रचना काफी झूलस जाती है। बेटी के जलने की सूचना पाकर ध्रुव गांव वापस चला आता है ।

   वहा अस्पताल में रचना अपनी अंतिम सांसे गिन रही होती है। रचना को ध्रुव इस हाल में पाकर फूट-फूट कर रोता है। रचना पुलिस को बताती है कि, जब वह बाहर बरामदे में सो रही थी। तभी धीरज ने उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया, जब उसकी आंख खुली तो वह आग की लपटों में घिरी हुई थी और धीरज उसके घर से भागे जा रहा था।
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  पुलिस के सामने दिए गए इस बयान को सुनकर ध्रुव धीरज पर बौखला गया वह धीरज को मारने को उसके घर की तरफ दौड़ा मगर तब तक पुलिस ने धीरज और उसके भाई को पकड़ कर जेल में डाल दिया। धीरज निर्दोष होते हुए भी जेल की काल कोठरी में रहने को मजबूर था। धीरज के पिता के प्रयासों से कोर्ट ने उसे निर्दोष करार दिया। झूठे आरोप लगाने के जुर्म में रचना को जेल भेज दिया गया।

    ध्रुव को अपनी गलती का एहसास हो गया। रचना के जेल से छूटने के बाद ध्रुव अपनी प्यारी बेटी के लिए रिश्ते ढूंढने लगा मगर ऐसी चालबाज लड़की से शादी करने को कोई तैयार नहीं हुआ।रचना की चाल उसी पर भारी पड़ गई। उसका भविष्य अंधकार में चला गया। हताश होकर ध्रुव अपने सच्चे मित्र के प्रति गलतियों के लिए मन ही मन पछतावा करने लगा था। पर धीरज अपनी गलतियों की माफी मांगने का साहस नहीं जुटा पा रहा था।

     एकदिन रचना ध्रुव को खाना परोस रही थी तब तक दो लोगों ध्रुव के सामने प्रकट होते हैं। खाना खा रहा ध्रुव अचानक किसी को पास भापकर सामने देखता है। तो सामने धीरज अपनी पत्नी जयंती के साथ खड़ा है, उनके साथ एक लड़का भी है। धीरज के मुख पर अपने प्रिय मित्र के लिए प्यार भरी मुस्कुराहट है

     ध्रुव खाना छोड़ कर उठ जाता है। धीरज के यहां अचानक आने पर थोड़ा चकित भी है। उन्हें बैठने को कहता है, तब तक रचना भी वहां आ जाती है। धीरज का बेटा चंदन आज ही एमबीए करके शहर से लौटा है। धीरज पुरानी सारी बातों को भुलाकर वहाँ आया है। वह ध्रुव से कहता हैं।

     "देखो ध्रुव रचना मेरी बेटी जैसी नहीं बल्कि मेरी बेटी ही है। मैंने हमेशा इसे अपनी बेटी ही माना है, मेरे मन में हमेशा इस दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल लेने की इच्छा थी। पर तब मेरा यह बेटा चन्दन किसी लायक नहीं था। आज ही मुंबई से ये एमबीए करके यहां लौटा है । मैं तुमसे रचना को अपनी बहू बनाने की विनती करता हूं।"

    यह सुनकर ध्रुव और रचना दोनों फफक-फफक कर रोने लगते हैं। ध्रुव धीरज के गले लग जाता है। उसे समझ में आ गया था, की "मित्रता सर्वोपरी है"।

   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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