24 December, 2017

सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डाले ? | How To Wake Up Early In The Morning In Hindi



एक महान विचारक ने कहा है कि , "शुरुआत अच्छी हो तो समझो आधा काम हो गया" मेरा ये मानना है कि "जो लोग सूर्योदय से पहले उठते हैं उनकी जिन्दगी में कभी अँधेरा नहीं होता" हम सभी जीवन में एक aim लेकर चलते हैं और उसको पूरा करने का हर संभव प्रयास करते हैं, अपने मकसद में कामयाब होने से पहले हमें कई मुश्किलों से गुजरना पड़ता है, इनमे से कुछ प्रोब्लम्स ऐसे भी हैं जो हर किसी के सामने होती है और प्रॉब्लम भी ऐसी जो बिल्कुल सामान्य सी दिखती जरुर हैं मगर कभी सोल्व नहीं होती,  हां ऐसी ही एक समस्या हम सबके सामने अक्सर रहती है और वह है सुबह जल्दी उठने की प्राब्लम,  दोस्तोंं हर काम को एक चुनौती समझें तो आइए बताते हैं कुछ खास तरीके जो कर देगी आपकी सुबह जल्दी उठने की मुश्किल आसान

सुबह जल्दी कैसे उठे ? / How to wake up early morning ?


 दोस्तों चुनौती चाहे जैसी भी हो तैयारी तो उसकी पहले से ही करनी पड़ती है, इसलिए सुबह जल्दी उठने के लिए भी कुछ कार्य  आपको पिछली रात में ही पूरे करने होंगे मेरे कहने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आप सुबह उठने के लिए पूरी रात सोए ही ना हां लेकिन सोने से पहले कुछ कार्य जरूर ले ...

¤ रात के भोजन का अपना समय निर्धारित करें संभव हो तो निर्धारित समय के अंदर ही भोजन कर ले 

¤ भोजन करने के बाद तुरंत ना सोएं और ना ही समय जाया करें भोजन के उपरांत अपना सारा ध्यान next day में आपको क्या-क्या करना है, इस बारे में एक एक्शन प्लान बनाए संभव हो तो आप पूरे 1 सप्ताह भर का एक्शन प्लान एक चार्ट के रूप में बना ले, जहां तक पूरे सप्ताह भर का एक्शन प्लान बनाने की बात है यह डिपेंड करता है कि आपका प्रोफेशन क्या है 

¤ इसके बाद सुबह उठने का एक फिक्स टाइम बना लें और अलार्म क्लॉक या अपने मोबाइल में ही फिक्स टाइम से अगले आधे घंटे के मध्य में 6 से 7 बार लगाएं

¤ अभी थोड़ा काम और, जी हां सोने से ठीक पहले आपको दो काम निपटाने हैं सबसे पहले तो आप अपना स्पोट्स शुज, जहां आप सोते हैं उस बेड के नीचे रख लें, क्यों, यह मैं आपको इस लेख के अंत में बताऊंगा

¤ देर रात की चर्चाओं से बचें दोस्तों सुबह उठकर भी क्या होगा, क्योकि कुछ भी अच्छा करने के लिए हमारे शरीर और दिमाग दोनों तरोताजा होने चाहिए, जिसके लिए एक पूरी कंप्लीट नींद जरूरी है सो दोस्तों इन सब कार्यों के बाद आप जरूरी से जरूरी विषयों पर अपनों से चर्चा करने की बजाय  चर्चाओ से बचे और सोने चले जाएं जरूरी बातों को सुबह भी डिस्कस कि कर सकते हैं या तो खाने से पूर्व ही कर ले 

¤ एक और बात खुद से यह प्रॉमिस करें कि भोजन के बाद किसी भी वजह से आप मोबाइल को हाथ नहीं लगाएंगे अगर आप एक से अधिक नंबर और एक से अधिक मोबाइल हैंडसेट यूज करते हैं तो अपना मेन नंबर और सम्बंधित मोबाइल के अलावा बाकी मोबाइल एवं इंटरनेट को बंद कर दें कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की अनियमित दिनचर्या, अनिद्रा, डिप्रेशन का जिम्मेदार देर रात तक किए जा रहे मोबाइलों का उपयोग है जो लोग यह मानते हैं की टाइम पर सोने से कोई फायदा नहीं मेरा अनुभव है कि जिस तरह भोजन हमारे पेट की भूख को पूरा करता है और हम जिस समय भोजन करते हैं उस वक्त अगर हम भोजन ना करें तो हमें भूख की अनुभूति होती है वैसे ही दिमाग का भोजन नींद है और उसका अपना एक समय भी बनता चला जाता है और अगर इसमें कोई दिक्कत आती है तो हमें दिक्कत बढ़ाने की बजाय उसे सॉल्व करना चाहिए ऐसे में मेरा मानना है कि हमारे सोने का फिक्स टाइम होना ही चाहिए

¤ नींद लेने में ना करें कंजूसी दोस्तों,न आपने सुना होगा कि कुछ लोग सिर्फ 4 घंटे ही सोते हैं कुछ लोग तो केवल 2 घंटे, आपको शायद ये बात झूठी लग सकती है मगर दोस्तों ऐसा नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है  ईश्वर ने हर किसी में कुछ विशिष्ट गुण दिए हैं डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों ने भी माना है कि हर किसी के नींद की अवधी एक समान नहीं होती कुछ लोग 4 घंटे की नींद में ही तरोताजा महसूस करते हैं तो कुछ 8 घंटे की नींद में  इसलिए आप दूसरों को देख कर अपने सोने के समय निर्धारण या उसमें कटौती ना करें आप अपनी पूरी नींद लें

¤ अलार्म को बजने दे, जिस तरह हमारे सोने का समय फिक्स होना चाहिए उसी प्रकार मेरा मानना है कि हमारे उठने का समय भी फिक्स होना चाहिए क्योंकि यह सोच कर कि आज देर से सोए हैं नींद देर से आई है तो देर से ही उठा जाए मगर ऐसा करने परअगले दिन आपका आलसी मन आप पर हावी हो जायेगा, जब आप सुबह उठने के समय सोच विचार करेंगे तो कभी उठ नहीं पाएंगे इसलिए अपने उठने के टाइम को एकदम से फिक्स कर ले चाहे आप पूरी रात जागे हो चाहे 2 घंटे ही सोए हों मगर आप अपने फिक्स टाइम पर उठ जाए नींद का क्या है आज कम आई है तो कल जरूर अच्छी आएगी ऐसा विचार और विश्वास मन में जगाएं अलार्म को बंद ना होने दें हम अक्सर अलार्म सेट करते हैं मगर सुबह कभी कभी आधी नींद में तो कभी आलस्य में तो "कभी यार अब तो उठ ही गए हैं अभी 2 मिनट में उड़ते हैं" आदि आदि कारणों से अलार्म बंद कर देते हैं ऐसा बिल्कुल न करें स्वयं में यह संकल्प लें कि "मै जबतक उठ कर फ्रेश नही हो लूँगा तब तक अलार्म को बजने दूंगा"

¤ टहलना, आजकल के युवा को लगता है कि, मॉर्निंग वॉक एक उम्र के बाद के लोगों के लिए ही ज्यादा जरूरी है जो कि शुगर, BP आदि को नियंत्रित करता है मगर आज मैं आपको ऐसे सत्य से परिचित कराऊंगा जिसके बाद आप इस सोच को कभी अपने मन में दोबारा आने नहीं देंगे दोस्तों सुबह उठने में हम सभी को आलस घेरे रहता है और इस समस्या का एक सरल सा उपाय है ये कि आप सुबह उठने के बाद बिना कुछ सोचे मॉर्निंग वॉक पर निकल जाएं क्योंकि जैसे ही आप सोच विचार करना शुरू करेंगे बात कल पर चली जाएगी शुरु-शुरु में ज्यादा दूर ना जाएं वरना पूरा दिन आप थकावट और कमजोरी महसूस करेंगे और अपने जीवन का कीमती 1 दिन खराब कर देंग

वाक से लौटने के बाद आपसे निद्रा और आलस मिलो पीछे छूट चुके होंगे साथ होगी तो सिर्फ तरोताजा मन और उत्साह जिससे आप दिन का पूरा उपयोग अपने मकसद को पाने के लिए बनाए गए एक्शन प्लान के हिसाब से कर सकेंगे और कामयाबी की नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे आप मेरे बताए गए हर पॉइंट को एक बार जीवन में उतार कर देखें मुझे उम्मीद है कि आप सुबह उठने की चुनोतियों में सफल होंगे

मॉर्निंग वॉक के लिए एक बात जो सबसे इंपोर्टेंट है और जिसे अक्सर हम करते नहीं  हैं,  मैंने शुरुआत में ही कहा था कि हर काम को एक चुनौती समझें और हर चुनौती की तैयारी यानी होमवर्क पहले ही करना होता है इसलिए दोस्तों रात में सोने से पहले अपने स्पोर्ट्स शूज बेड के नीचे रखें साथ ही मॉर्निंग वॉक के लिए ढीले, आरामदेहक  और मौसम के मिजाज के हिसाब से कपड़े रात में ही बिस्तर के पास रख ले सुबह अक्सर ढूंढने की झंझट इस मामले को कल पर टाल देती है और कल कब आया है यह हम सब बहुत अच्छी तरह जानते हैं


Writer -   Karan "GirijaNandan"




        
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