23 February, 2018

बुरे काम का बुरा नतीजा | Bad Results Of Bad Work Motivational Story In Hindi

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बुरे काम का बुरा नतीजा | Bad Results Of Bad Work A Motivational Story In Hindi


  एक बहुत ही घने और सुन्दर जंगल में एक शेर रहता था । जंगल में काफी जानवर थे मगर शेर वहां खुद को बिल्कुल अकेला महसूस कर रहा था । एक दिन शेर ने जंगल में एक हिरनी को देखा, वह हिरनी से कुछ बात करने के लिए उसकी तरफ जैसे ही आगे बढ़ा शेर को अपनी तरफ आता देख हिरनी वहां से सरपट भागी? शेर "रुको रुको" कहता हुआ उसके पीछे दौड़ा, काफी दूर भागते-भागते अचानक हिरनी ठहर गई । उसके सामने जीभ लपलपाता हुआ, एक लोमड़ी खड़ा था वह तुरंत पीछे मुड़ी परन्तु उसके पीछा कर रहा शेर  तबतक वहां पहुंच चुका था, अब तो बेचारी हिरनी बहुत बुरी फसी उसके आगे कुआं और पीछे खाई थी । लोमड़ी हिरनी की दशा पर जोर-जोर से हंसने लगा और हिरनी से बोला 

  "अब बताओ कहां बचकर जाओगी" हिरनी समझ गई कि उसका समय निकट है । 
  अगले ही पल लोमड़ी उसपर जोर से झपटा, पर यह क्या है उसके तो आगे शेर जाकर खड़ा हो गया, उसने अपने एक ही दांव से उसे चित्त कर दिया । लोमड़ी उससे माफी मांगने लगा । शेर ने हिरनी को बताया कि वह जंगल में बिल्कुल अकेला है वह तो उससे बस दोस्ती करना चाहता था और उससे बात करने के लिए उसकी तरफ आगे बढ़ा था । 
  मगर वह उसे गलत समझ बैठी शेर से ऐसा सुनकर उसे अपनी मूर्खता का एहसास हो गया । उसने शेर से अपनी गलतियों की माफी मांगी और दोनों अब अच्छे दोस्त हो गए । अब सारा दिन वह साथ-साथ रहते शेर से दोस्ती हो जाने के कारण जंगल का कोई जानवर उसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखता । अब वह शेर पर खुद से ज्यादा विश्वास करती । शेर ने भी परिवार से बिछड़ जाने की अपनी कहानी उसे सुनाई । 
  वह शेर को अपने घर लेकर आई और शेर से अपने छोटे-छोटे बच्चों को मिलवाया बच्चे शेर से मिलकर काफी खुश हुए शेर को मानो अपने खोए बच्चे मिल गए हो । वह उसके दोनों बच्चों को अपने बच्चों जैसा प्यार देता । कभी-कभी शेर बच्चों को अपने साथ घुमाने भी ले आता  । जब लोमड़ी ने शेर के साथ दोनों बच्चों को देखा तो वह समझ गया हो न हो ये उसी हिरनी  बच्चे होंगे । 
  लोमड़ी उस दिन को भुला न सकी थी, जब उसके नाते सारे जंगलवासियों के सामने शेर ने उसकी बेइज्जती की थी और अब जंगल के सारे जानवर उस दिन की बात को उससे कहकर उसे चिढ़ाते । लोमड़ी अपनी बेइज्जती का बदला हिरनी से लेना चाहता था । मगर शेर के डर से वह उसका कुछ नही बिगाड़ सकता था । उन बच्चों को देखकर, काफी दिनो से गायब, लोमड़ी के चेहरे की मुस्कुराहट फिर से वापस आ गई । मगर उसकी ये मुस्कुराहट कुछ अजीब थी । 
  एक दिन हिरनी को अकेला पाकर लोमड़ी उसके पास आया और उससे अपने द्वारा किए गए गलतियों की माफी मांगने लगा और मित्रता के लिए हाथ बढ़ाया हिंरनी तो स्वभाव बहुत अच्छी थी और सबको माफ कर देने वालो मे से थी । वह फौरन लोमड़ी की बातों में आ गई और लोमड़ी से दोस्ती करने की भूल कर बैठी । उससे दोस्ती के बाद लोमड़ी उसके घर आने-जाने लगा और फिर उसने उसके बच्चों से भी मेलजोल बढ़ा ली ।
  एक दिन उसके न रहने पर लोमड़ी उसके घर आ धमका उसने दरवाजा खटखटाया है । हालांकि हिरनी ने अपने बच्चो को अनजान लोगो के आने पर दरवाजा न खोलने की नसीहत दे रखी थी । मगर काफी दिनों से आते-आते लोमड़ी उन बच्चों के लिए अब अनजान नहीं था । इसीलिए बच्चों ने लोमड़ी के लिए दरवाजा खोल दिया दरवाजा खोलते समय बच्चों ने सोचा भी नहीं था कि आज तक भला दिखने वाला लोमड़ी कैसे रंग बदल  लेगा अंदर आते ही लोमड़ी ने बच्चों को अपना शिकार बना ढाला । 
  लोमड़ी के घर लौटते समय रास्ते में शेर ने उसे देखा उसने देखा कि लोमड़ी के मुंह में खून लगा हुआ है । जब हिरनी घर लौटी तो बच्चों को घर मे न पाकर और खून के धब्बे नीचे बिखरे देखकर स्तब्ध रह गई । वह वहीं नीचे बैठ कर  बिलखने लगी । कई दिन गुजरने के बाद भी वह वापस जंगल नही गई, कई दिनों तक उसे न पाकर शेर को उसकी चिंता होने लगी । वह और देर न करते हुए उसका हाल-चाल लेने उसके घर की तरफ चल पड़ा ।
  घर पहुंचने पर उसने हिरनी को बेसुध पाया बार-बार पूछने पर भी उसे वह कुछ न बताकर बस रोती ही रही । किन्तु कुछ देर बाद उसने सारी बात उसे  बताई वह समझ गया कि हिरनी के  बच्चों को किसने मारा है । लोमड़ी की चाल को समझ कर वह उसपर बहुत क्रोधित हुआ और लोमड़ी को सबक सिखाने निकल पड़ा । 
  परन्तु हिरनी ने उसे रोक दिया क्योंकि वह चाहती थी कि जिस प्रकार लोमड़ी ने उसके बच्चों उससे छीना  है, वह भी उसे वैसे ही सबक सिखाए । इसीलिए शेर और हिरनी, दोनों ने मिलकर एक योजना बनाई । शेर लौटकर लोमड़ी से कहा 
  "मैं हिरनी के बच्चों की न जाने कब से बड़ा होने की राह देख रहा था । मैं उन तीनों को एक साथ खाना चाहता था । मगर उसके बच्चे कहीं चले गए हैं उसे लगता है कि बगल वाले जंगल मे जो हिरनो का झुंड रहता है उसके बच्चे शायद वहीं चले गए हैं । कल वह मेरे साथ वहां जाएगी जैसे ही वह उनसे मुझे मिलवाएगी, मै उनपर हमला बोल दूंगा और ढेर सारा शिकार एक साथ कर लूंगा ।"
  ढेर सारे शिकार की कल्पना मात्र से ही लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया । उसे अभी कुछ दिनों पहले ही खाएं हिरनी के दोनों स्वादिष्ट बच्चो की याद आ गयी । लोमड़ी ने शेर से शिकार पर उसे भी साथ ले जाने का आग्रह किया और शिकार में उसकी मदद करने की बात कहने लगा । शेर उसे अपने साथ ले जाने को तैयार हो गया । क्योंकि यही तो हिरनी और शेर का प्लान था । 
  रास्ते में शेर, लोमड़ी और हिरनी के बीच में चलता रहा चलते-चलते रास्ते में जब भी हिरनी की आंखें लोमड़ी से टकराती, उसे अपने नन्हें बच्चों के का चेहरा सामने दिखाई देने लगता । वह सहम सी जाती । मगर इशारो-इशारो में शेर उसका ढाढ़स बढ़ाता । दूसरे जंगल मे जाने के लिए एक नदी पार करनी पड़ती थी । नदी पार करते समय जब लोमड़ी हिरनी को देख कर बड़े ही अजीब तरीके से मुस्कुराने लगा तो वह फफक पड़ी । वह खुद को रोक नही पायी और बोली
  "तुम्ही ने मेरे बच्चो की जान ली है न, बताओ ? वह तुम पर कितना भरोसा करते थे" 
  उसके ढेरों सवालों को सुनकर लोमड़ी बौखला गया और बोला 
  "हां और अब तेरी बारी है"
  ऐसा कहकर वह जैसे ही उसकी ओर झपटा, शेर बीच में आ खड़ा हुआ । लोमड़ी को पुराना दिन याद आ गया और वह थोड़ा पीछे हट गया और बोला 
 "तुम शेर हो, एक शेर और हिरनी दोस्ती कैसे हो सकती है"
  शेर बोला 
  "दोस्ती किसी से भी हो सकती है । शेर की बस शेर से ही दोस्ती हो ये कोई जरूरी नहीं,  जो तुम्हे अच्छा लगे, जिसके साथ रहकर तुमको खुशी मिले और जो तुम्हे समझ सके वह तुम्हारा दोस्त हो सकता है"
  आगे लोमड़ी कुछ कहता मगर तब तक पीछे से मगरमच्छ ने लोमड़ी को दबोच लिया । लोमड़ी मदद के लिए शेर को पुकारते रहा और उसे अपने बरसों पुरानी दोस्ती का याद दिलाई पर शेर ने कहा 
  "तुम किसी के दोस्त नहीं हो सकते तुमने जैसा किया आज तुमको हमने वैसे ही सजा दी"
  उस नदी में एक मगरमच्छ रहता है, ये बात शेर अच्छी तरह जानता था । नदी में प्रवेश करते समय उसकी नजर उस मगरमच्छ पर टिकी थी जबकि लोमड़ी की नजर हिरनी पर थी । शेर ने उसको हमेशा उसी तरफ रखा जिधर मगरमच्छ था ताकि मगरमच्छ लोमड़ी पर ही दांव लगाए । इस प्रकार दोनों ने लोमड़ी को उसी के तरीके से जवाब दे दिया । 


Moral Of The Story :-
हर रिश्ता विश्वास की डोर पर टिका होता है परन्तु किसी पर विश्वास करने से पहले उसे भली भांति जान लेना आवश्यक है ।

                       Writer
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