समझदारी पर हिन्दी मे प्रेरणादायी कहानी | A Story In Hindi On Understanding with Moral,  www.MyNiceLine.com

   ये कहानी एक आदिवासी समुदाय की है । एक ऐसे आदिवासी समुदाय की जिसमें पुरुष लड़के को शादी के बाद लड़की के घर जाना  होता है । मीना भी ऐसे ही एक आदिवासी समुदाय से थी ताल्लुक रखती थी जिसमें मीना के पिता को विवाह के बाद मीना की मां के घर जाकर रहना पड़ा । शादी के साल भर बाद ही मीना का जन्म हुआ ।

  वैसे तो शादी के बाद ससुराल में दामाद का मान जान खूब था और मीना की मां पावनी भी मीना के पिता को बहुत ही प्रेम करती थी । मगर मीना के जन्म के कुछ  दिनों बाद ही जंगल में जब वह लकड़ीया बिन रही थी, तभी जंगल मे फैली आग का वह शिकार हो गई ।

  मीना से उसकी माँ का साया छिन गया । उधर पावनी के घर वालो ने, इस संयोग की वजह, कुछ महीने पहले जन्मी मीना के मनहूस कदम मान बैठे । जिसके कारण वे उसपर बहुत क्रोधित हुए परन्तु उसके पिता इन सब अन्धविश्वासो से दूर थे । वे पनौती जैसे बातो को नही मानते थे ।

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  उन्होंने, उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की पर, बात को समझने की बजाए उल्टे उन्होंने मीना के साथ-साथ पिता को भी इलाके से बाहर निकाल दिया ।

  कहीं ठिकाना न दिखने पर पास के जंगल में पिता ने एक झोपड़ी बनाया और फिर बास, कूश, और घास-पतवार इकट्ठा करके उनसे टोकरीयां, चटाइयों और दूसरी वस्तुएं बनाई, और फिर बेटी को लिए थोड़ी दूर स्थित, शहर में बेचने निकल पड़ा, मीना रोज रात को पिता से कहानियां सुनाने की जिद करती पिता उसे रोज एक समझदारी भरी कहानी सुनाता और वह कहानी सुनते-सुनते वह सो जाती ।

  धीरे-धीरे जब वह थोड़ी बड़ी हो गई तो पिता ने उसे शहर लेकर जाना बन्द कर दिया, वह उस अब घर में ही छोड़ जाता । हालांकि  इसके लिए उसने बहुत मेहनत करके बड़ी ही मजबूत झोपड़ी बनाई ताकि कोई जानवर उसमें घुस न सके ।

  शहर मे चटाई बेचने के बाद घर लौटते समय पिता उसके लिए उसकी फेवरेट जलेबिया लेकर  आता । वह भी पिता और उससे मिलने वाली जलेबियों का बेसब्री से इंतजार करती । जंगल में पिता के सिवा उसका कोई दोस्त नहीं था । पिता के साथ ही वह खेलती और चटाइयां बनाने में उसकी मदद करती है ।

  दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे । एक दिन जब वह बाहर खेल रही थी । अचानक काफी जोर-जोर की हवाएं चलने लगी  । उसी समय पिता घर मे अंगीठी पर खाना पका रहा, खाना पकाते-पकाते, पिता थोड़ी देर बिस्तर पर आराम करने लगा, वह लेटे-लेटे पावनी को याद करने लगा ।

  उसकी यादों में खोए खोए न जाने कब उसकी आंख लग गई । तेजी से अंदर आ रही हवाओं के कारण अंगीठी से चिंगारियां छटकने लगी उनमे से एक चिंगारियों उड़ कर  झोपड़ी की दीवार से जा टकरायी और पलक झपकते ही हवाओं के झोंके से, चारों तरफ आग फैल गई ।

  उधर खेल में मस्त मीना और इधर गहरी नींद में जा चुके पिता को इस बात का आभास ही नहीं हो सका कि घर मे आग लग चुकी है । धू-धू  करके जल रही झोपड़ी से एक आग का गोला नन्ही मीना के सामने आ गिरा ।
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  वह डर गई और पापा पापा चिल्लाते हुए घर की तरफ दौड़ी पर उसका घर तो आग का गोला बन चुका था । ये देख कर वह सहम गई । उसने अपने पिता को आवाज लगानी चाहि पर डर ने उसकी आवाज को कही गुम कर दिया था ।

  उधर आग से  बढ़ी गर्माहट ने पिता की आंखें खोल दी मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी । जब पिता की आंखें खुली तो उसने चारो ओर से खुद को आग से गिरा हुआ पाया । उसने पास ही पड़े, घड़े में देखा तो उसमे  थोड़ा पानी मौजूद था ।

  वह पानी उसने आग पर फेंका पर पानी ने तो आग में घी का काम कर दिया, वह और तेज हो चली । तभी पिता को अपनी मासूम बेटी का ख्याल आया वह उसे जोर-जोर से पुकारने लगा ।

  पिता की आवाज सुनकर बाहर से वह भी उसे बुलाने लगी अब तो दोनों तरफ से बाप बेटी बस चिखे जा रहे थे । अब, वह भागकर झील  के पास जाती और अपने छोटे-छोटे हाथों से पानी भरकर दौड़े-दौड़े वापस आती मगर इस दौड़ भाग में उसके नन्हे हाथों में भरा पानी कहीं खत्म हो जाता है और वह खाली हाथ ही रह जाती ।

  मगर फिर भी उसने कोशिश करना नही छोड़ा, शायद उसे इस बात का एहसास हो गया था कि आग से घिरे उसके पिता की जान अब सिर्फ वही बचा सकती है । इस भागदौड़ के बीच उसे अपने पिता द्वारा सुनाई गई समझदारी भरी कहानियां याद आने लगी थोड़ी देर में ही वह झील की तरफ जाते वक्त बीच रास्ते में ही ठहर गई और उल्टे पैर वापस आ गई ।

  शायद उसके मन कोई उपाय सूझा था और वह फटाफट वहां पड़े टोकरियों, चटाइयों आदि के कच्चे सामानों से मोटी चटाई जैसा कुछ बनाने लगी बनाने के बाद उसे फौरन उसने झील मे भिगोया और उसे खुद पर लपेटे, जल रहे घर की ओर  दौड़ी । पलक झपकते ही वह अपने पिता के सामने थी ।

  अपनी नन्ही सी बेटी का ये साहस भरा काम, पिता देखता ही रह गया । उसने झट से उसे गोद में उठाया और फिर खुद चटाई को लपेटे वह बाहर निकल गया । इस प्रकार मीना ने अपनी समझदारी से पिता की जान बचाई ।

Moral Of The Story

 बहुत सी Problems का Solution हमारे आसपास मौजूद रहता है जरूरत बस उन्हे ठीक से पहचानने और  उनके महत्व को समझने की है !!

              
   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
 Team MyNiceLine.com

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