05 March, 2018

सोने के अंडे देने वाली मुर्गी | Motivational Story In Hindi


Sone ke ande dene wali murgi, kahavat par Hindi me Motivational Story

  कस्बे में ही किशन हलवाई की दुकान थी । कस्बा छोटा था, मगर किशन हलवाई की दुकान किशन हलवाई के परिश्रम और सूझबूझ के कारण काफी प्रसिद्ध थी । किशन हलवाई की दुकान पर रोज ग्राहकों का ताता लगा रहता । सभी किशन हलवाई के बनाए मिष्ठान एवं अन्य चीजों की बड़ी प्रशंसा करते । शादी ब्याह में दूर-दूर से लोग आते और किशन हलवाई की मिठाइयां खरीद कर ले जाते । इस तरह किशन हलवाई की कमाई खूब होती, पर किशन हलवाई थोड़ा कंजूस था या शायद किशन हलवाई अपने और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाना चाहता था ।  उसके हलवाई के दो पुत्र थे । दोनों अभी युवा जीवन में कदम रखे थे । दोनों की इच्छाएं और आवश्यकताएं बहुत थी पर पिता उन्हें इतने ही पैसा देता जिससे उनकी जरूरी आवश्यकताए पूरी हो सके । ये बात दोनों बेटों को नहीं भाती थी । दोस्तों की लाइफ स्टाइल को देखकर दोनों में बहुत हीनता की भावना जागृत होती । 

    इन्हे भी पढे :- :-

  एक दिन उन्होंने सोचा अगर पिताजी न रहते तो दुकान की कमाई से तो उनकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती  । धीरे-धीरे उन्हें यह बात सही लगने लगी । पिता उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन प्रतीत होने लगा जो उस मुर्गी के समान था, जिसके पास सोने के अंडे तो थे परन्तु उनका लाभ उसके दोनो बेटो को नही मिल रहा था । वह उनके सारे सपनों पर ताला मारे बैठा था ।
  फिर क्या था, एकबार जब पिता स्नान के पर्व पर अपने बच्चों के साथ नदी के तट पर स्नान कर रहे थे उसी समय दोनों बच्चों ने पिता को धक्का दे दिया जिसके कारण नदी में डूबकर उसकी मृत्यु हो गई । इस प्रकार पिता को अपने रास्ते से हटा कर वे दोनों दुकान का मालिक बन बैठे, अब दुकान की सारी कमाई उनकी थी । 
  अब उन्हें रोकने वाला कोई  नही था । दोनों की सारी इच्छाएं पूरी होने लगी । पहले जिन दोस्तों के सामने वे दोनों दबे रहते और हीनता का अनुभव करते आज वही दोस्त उनकी जी हजूरी करते । अब दुकान में शाम को ग्राहकों के जाने के बाद तकरीबन रोज पार्टी होती । वाकई जिंदगी अब जिंदगी लगने लगी थी । 
  जहां तक काम का सवाल था तो युवा जिंदगी में अक्सर काम बोझ ही लगता है और मौज मस्ती के बाद अगर फुर्सत मिले तो ही किसी काम के बारे में सोचा जा सकता है । ऐसे में दोनों भाइयों ने तय किया कि सुबह दुकान बड़ा भाई संभालेगा और दोपहर बाद छोटा भाई दुकान पर बैठेगा । 
  सर पर काला चश्मा हाथों में फेसबुक और कानों में पॉप सॉन्ग बजाता ब्लूटूथ, सामने सामान के लिए मजबूर खड़ा ग्राहक और बड़ी मुश्किल से जनाब की नजर-ए-इनायत हो भी गई या नौकरो ने खुद आगे आकर ग्राहक को सामान लाकर दे भी दिया तो, नजारा कुछ ऐसा होता, एक तरफ साहब मन ही मन मुस्कुराते और उंगलियां मोबाइल पर थिरकती, वही सामने हाथ में पैसा लिए मूकदर्शक बना ग्राहक खड़ा उसे पैसा लेने का इन्तजार करता । कुछ ऐसा नजारा हो गया था पिता के जाने के बाद उसकी दुकान का ।
  उनके दोनों बेटों को ग्राहकों को सामान देने की न चिंता थी और न ही सामान के बदले पैसा लेने की फुर्सत, हद तो तब हो जाती जब ग्राहक अपने ₹50 के सामान के लिए सौ रुपए देता और युवराज अपने सामान का मूल्य काटकर ग्राहक को ₹110 वापस लौटा दिया करते । वे बस अपने ही रामधुन में मगन थे । 
  भला हो उन ग्राहकों का जो अधिक पैसा मिलने पर, अधिक पैसा खुद ही उन्हे लौटा देते । भला ऐसे ग्राहक मिलते कहां हैं और मिलते भी हैं तो कितने, नतीजा दुकान घाटे में चलने लगी । बेटे पिता के बनाए हुए वसूलों में कोई बदलाव नहीं लाना चाहते थे मगर मौके का फायदा उठाने वाले तो हर कहीं मौजूद होते हैं । दुकान पर कच्चा सामान देने वालों ने काम को लेकर इनकी बेफिक्री को देखते हुए, सामानो मे मिलावट शुरू कर दी । 
  हालांकि ये काम वे पिता के रहते भी करने की कोशिश करते रहे पर वे इसमे कभी कामयाब नहीं हुए क्योंकि वह  ईमानदार होने के साथ-साथ अपने काम को भी ठीक से समझता था । वह जानता था कि अमीर बनने के ये शॉर्टकट उसे ज्यादा आगे नहीं ले जा सकते इसलिए वह ऐसे लोगों को कभी पसंद नहीं करता था जो मिलावटी सामान देते थे । 
  मगर किशन के जाते ही जवानी में अंधे हुए दोनों लड़कों के नाक के नीचे से ही मिलावट का काम बढ़ने लगा उधर उनके हलवाई भी काम में ढिलाई करने लगे बिना मेहनत के राजगद्दी पाने वालों को इस के पीछे की कड़ी मेहनत का अंदाजा नहीं था ।
  माना कि बरसों से पिता ने दुकान की ऐसी इमेज बनाई थी जिसकी क्वालिटी और रेट से हर कोई प्रभावित था जिसका लाभ उसके न रहने पर भी उसके दोनों बेटों को मिलता था पर ऐसा कब तक चलने वाला था । देखते ही देखते दुकान के रेगुलर ग्राहकों ने कुछ दूसरी दुकानो की ओर रुख कर लिया । 
  दोनों की अनुभवहीनता ने दुकान के नाम को कुछ ही दिनों में अर्श से फर्श पर लाकर, पिता के नाम में चार चांद लगा दिया, जैसे-जैसे कमाई कम होती गई दोनों की नींदे भी टूटने लगी । दोनों ने, दुकान टूटने का दोष एक दूसरे पर लगाना शुरु कर दिया ।
  आखिरकार पिता के दुकान के दो फाट हो गए । अब एक पर बड़ा तो दूसरे पर छोटा भाई बैठता । अब मौज मस्ती तो दूर, दो जून की रोटी का इंतजाम कर पाना भी दोनों भाइयों पर भारी पड़ने लगा ।

Moral Of The Story :-

इच्छाओं और आवश्यकताओं का कोई अंत नहीं परन्तु उनको पूरा करने के लिए हमेशा सही रास्तों का ही चुनाव करना चाहिए, ये रास्ते थोड़े कठिन जरूर हो सकते हैं मगर इन्हीं कठिनाइयों से जूझकर कोई अपने सपनों को साकार कर सकता है और महान बन सकता है !!

              Writer

तो दोस्तो ये थी, हमारी आज की कहानी ये कहानी आपको कैसी लगी कृपया कमेंट करके हमें जरूर बताएं । हमें आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा ।
आपके विचार हमारा मार्गदर्शन
  कहानी पसंद आई हो तो कृपया अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को हमारी वेबसाइट www.MyNiceLine.com  के बारे में जरूर बताएं ।
  आप से request है कि, ऊपर दिए गए सोशल मीडिया साइट्स [facebook, twitter आदि] के Share बटन पर जाकर, इस कहानी को Share जरूर करें ताकि आप से जुड़े लोग भी इस कहानी का आनंद ले सकें और इससे लाभ उठा सकें ।
 हमारे, सभी नए पोस्ट्स की सूचना आप अपने Email मे प्राप्त करने के लिए, अपना Emai-id, नीचे दिए गए सब्सक्रिप्शन [Subscription] फार्म में भरकर हमें भेजें, यह बिल्कुल मुफ्त है !

 

 हमें Email-id भेजने के बाद, आपको एक कन्फर्मेशन Email  भेजा जाएगा, जिसमें केवल एक लिंक होगा और जिस पर आपके द्वारा एक क्लिक मात्र से ही इस बात की पुष्टि हो जाएगी कि आप हमारे New पोस्ट्स की सूचना अपने Emai-id में प्राप्त करना चाहते हैं । आपकी ईमेल आईडी,  किसी से शेयर नहीं की जाएगी और केवल नए पोस्ट्स की सूचना ही आपके मेल पर दी जाएगी, आप जब चाहे इस सेवा को बन्द भी कर सकते हैं । ये सेवा Google की एक सर्विस  FeedBurner द्वारा प्रदान की जाएगी ।
  हमारे YouTube वीडियोज को सबसे पहले देखने के लिए हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब [Subscribe] करना ना भूलें, यह बिल्कुल मुफ्त है !


  अगर आपके पास कोई कहानी, विचार, जानकारी या कुछ भी ऐसा है जो आप इस वेबसाइट पर पोस्ट [Publish] करना चाहते हैं तो उसे कृपया अपने नाम और अपने फोटो के साथ हमें भेजें
  अपनी कहानी भेजें
 --या--
हमें ईमेल करें हमारी Email-id है:-
   [email protected]
  हम  आपकी पोस्ट को, आपके नाम और आपकी फोटो के साथ यहाँ www.MyNiceLine.com पर Publish करेंगे ।
  हमसे सोशल मीडिया साइट्स [facebook, twitter आदि] पर जुड़ने के लिए नीचे दिए गए follow बटन पर जाए और कृपया हमें follow करें ।
  हमारे FACEBOOK लाइक पेज को कृपया लाइक करें ।
  आपको यहाँ अबतक की सबसे नयी और अच्छी प्रेरणादायक हिन्दी कहानियो का संग्रह मिलेगा । ये हिन्दी कहानिया ऐसी है जो न सिर्फ मनोरंजन करती है बल्कि मनोरंजन के साथ-साथ ये हिन्दी स्टोरीज आपके जीवन मे एक सकारात्मक परिवर्तन भी लाती  हैं । प्रेरणादायक हिंदी कहानियों [Hindi Inspirational Stories] के  साथ-साथ यहाँ हिंदी प्रेम कहानियां [Hindi Love Stories] और सत्य घटनाओं पर आधारित सच्ची हिंदी कहानिया  [True Hindi Stories] भी मौजूद हैं । दिल को छू लेने वाली [Heart Touching Stories in Hindi] और जीवन में नया परिवर्तन लाने वाली  [Life Changing Stories in Hindi], सीख से भरी, इन हिंदी स्टोरीज को दूसरो से भी कृपया शेयर करें। So please read the big  collection of the latest and best  Inspirational Hindi  Stories . it's for all
MyNiceLine. com
MyNiceLine. com

MyNiceLine.com शायरी, कविता, प्रेरणादायक कहानीयों, जीवनी, प्रेरणादायक विचारों, मेक मनी एवं स्वास्थ्य से सम्बंधित वेबसाइट है । जिसका मकसद इन्हें ऐसे लोगों तक ऑनलाइन उपलब्ध कराना है जो इससे गहरा लगाव रखते हैं !!

Follow Us On Social Media

About Us | Contact Us | Privacy Policy | Subscribe Now | Submit Your Post