प्रसिद्ध नगर के राजा ने युद्ध में विजय प्राप्त की उन्होंने  विरोधी राजा को बंदी बनाने के बाद विरोधी राजा की पुत्री जो अत्यंत सुंदर थी, राजा उसे देखते ही उस पर मोहित हो गए, और उसे दिल दे बैठे देर न करते हुए उन्होंने राजकुमारी से विवाह करने का प्रस्ताव रखा। राजा के वैभव से सभी वाकिफ थे । अतः राजकुमारी ने ज्यादा कुछ सोचे बगैर विवाह के लिए हां कर दिया। राजा ने उससे वही विवाह कर लिया और राजकुमारी के पिता को उनका राज्य वापस कर अपने राज्य की ओर प्रस्थान किया।

वहाँ महाराजा का भव्य स्वागत हुआ। राजा वैसे तो कई युद्धों में पहले भी विजय प्राप्त कर चुके थे। मगर इस बार वह सिर्फ राज्य ही नहीं रानी भी जीत कर आ रहे थे। राजा अपनी नई नवेली रानी को बहुत सम्मान देते, दोनों को साथ रहते काफी वक्त गुजर गया।

  पर उनकी कोई संतान नहीं हुई। संतान को लेकर परिवार के बढ़ते दबाव में रानी ने राजा से दूसरा विवाह करने को कहा, मगर रानी से अथाह प्रेम करने वाले राजा ने उनकी एक न सुनी। मगर बढ़ती उम्र के साथ राजा को भी अपने राज्य के उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी। आखिरकार राजा ने संतान प्राप्ति के लिए विवाह करने को विवश हो गए ।

  उन्होंने दूसरा विवाह किया, दूसरे विवाह के बाद भी राजा ने पहली रानी का स्थान किसी को नहीं दिया। वह आज भी उनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण थी। दूसरी रानी को यह बात बहुत बुरी लगती थी। धीरे-धीरे उसे राजा और बड़ी रानी के आपस का प्रेम देखकर मन ही मन ईष्या होने लगी। अपने योवन के बल पर उसने राजा को पहली रानी से दूर करने का भरसक  प्रयास किया।

  मगर उनके प्रेम की ताकत पर छोटी रानी की काली छाया कमजोर पड़ती रही । कुछ सालों बाद उसको एक पुत्र पैदा हुआ। भावी युवराज का जन्म उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। उत्सव में छोटी रानी का भाई भी पहुंचा, उसने भाई से राजा द्वारा बड़ी रानी को खुद से ज्यादा महत्व देने की बात को बताया। उस दिन के बाद दोनों बड़े रानी के खिलाफ राजा को भड़काने के लिए नित्य नए रास्ते तलाशने लगे। युवराज के जन्म से बड़ी रानी भी बहुत प्रसन्न थी।

  वह उसे अपने बेटे जैसा प्यार देना चाहती थी। मगर ईष्या के कारण रानी उसे अपने बेटे के पास भटकने भी नहीं देना चाहती थी। उसके इस व्यवहार से बड़ी रानी को बहुत दुख हुआ। मगर फिर भी उसने राजा से इस बात की शिकायत कभी नहीं की, उधर माँ की देखरेख में राजकुमार बड़ा हुआ। जैसे-जैसे राजकुमार बड़ा हुआ उसके अंदर भी माँ से मिले संस्कार घर करने लगे।

   देखते ही देखते युवराज बड़ा हो गया। युवराज को पड़ोसी मित्र राष्ट्र की राजा की अति सुंदर कन्या से प्रेम हो गया। फलतः दोनों का विवाह हो गया। शादी से जुड़े सभी रस्मो-रिवाजो से बड़ी रानी को छोटी रानी ने दूर रखा।

  परंतु जब इस बात की भनक राजा को लगी। तो सरेआम राजा ने छोटी रानी को कसके फटकार लगाई, और आगे से ऐसा न करने की नसीहत दे डाली। इस घटना मे छोटी रानी को अपना अपमान महसूस हुआ। उसने हर हाल में बड़ी रानी को राज्य से बाहर निकालने एवं राजा से उसे दूर करने की ठान ली। अपने मकसद को पूरा करने में वह इतना डूब गई, कि वह दिन का खाना और रातों की नींद भी भूल गई।

  सारे दिन वह बस अपमान का बदला लेने की ही सोचती रही। कुछ दिनों बाद राजा काफी आश्वस्त हुए। उनकी हालत बिगड़ती देख राज्य वैध ने बड़ी रानी को दूर जंगल से कुछ दुर्लभ जड़ी बूटी लाने को कहा- रानी ने फौरन मंत्री को आदेश दिया। जड़ी-बूटी आने पर उस वैध के कहे अनुसार कोई लापरवाही न करते हुए बड़ी रानी ने स्वयं उसे आंच पर पकाना शुरू किया।
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इस मौके को न गंवाते हुए, अपमानित छोटी रानी ने दासी की मदद से चुपके से आकर उबलते औषधि में जहर डाल दिया, और स्वयं बीमारी का बहाना बनाकर अपने कक्ष में सो गई। इन सब बातों से अनजान बड़ी रानी ने वह औषधि राजा को लाकर पिलाई, जिससे थोड़े देर बाद ही राजा का शरीर नीला पड़ने लगा। पहले से तैयार बैठी छोटी रानी ने फौरन राज्य वैद्य को बुलाया।

  खैर राजा को वैद्य ने बड़ी मुश्किल से बचा लिया। मगर पिलाई गई औषधि को देख कर राज्य वैध समझ गया, कि हो न हो राजा को औषधि के माध्यम से जहर पिलाया गया है। वैध द्वारा इस सत्य का उद्घाटन करते ही छोटी रानी बड़ी रानी पर भड़क गई, और उस पर राजा को मारने के षड्यंत्र रचने का आरोप लगाने लगी।

  बड़ी रानी ने बहुत समझाया बहुत हाथ जोड़े मगर राजा भी छोटी रानी की बातों में आ गया। उसने रानी की एक नहीं सुनी, उसने तुरंत सैनिक से कहकर रानी को कारागार में डालने को कहा, तब छोटी रानी ने दया का दिखावा करते हुए उसे इतनी कठोर सजा न देने को कहा,

  फलतः राजा ने उसे कारागार में न डाल कर राज्य की सीमा से बाहर कर दिया।अब तो छोटी रानी की चांदी हो गई। उसकी दस की दसों उंगलियां घी में थी। राजा का सारा प्रेम अब उसे ही मिलने लगा। इन सबके बीच युवराज ने विवाह कर के नव वधू के साथ नए जीवन में प्रवेश किया।

  प्रेम विवाह करके लौटे युवराज पत्नी पर मोहित थे । कुछ दिनों तक तो रानी और बहु में काफी पटी, माँ, बेटे-बहू को सर आंखों पर रखती, मगर कुछ दिन बीतते-बीतते चालबाज रानी की बहू से खटक गई। दोनों के बीच तकरार की स्थिति आ गई। युवराज के प्रेम में आत्मविश्वास से लबरेज बहू भी दबने के मूड में नहीं थी।

  अंत में माँ ने बेटे से बहू की शिकायत की परंतु  बेटा माँ को बखूबी समझता था। लिहाजा उसने उसकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। नतीजन रानी ने तरह-तरह से राजा का कान भरना शुरू कर दिया। पड़ोसी राज्य में इस राज्य का विलय बहु रानी करा सकती हैं। ऐसी झूठी आशंका राजा के मन में जगाती रही।

  परिणाम स्वरुप बहू को मायके भेजने की नौबत आ गई। परंतु युवराज माँ की करतूतों से वाकिफ था। रानी के संस्कार उसमें कूट-कूट कर भरें थे ।
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वक्त की नजाकत को समझते हुए राजकुमार ने पत्नी पर हर हाल में मिल जुलकर रहने का दबाव डाला। पति के भरोसे लक्ष्मीबाई बनी बहू उसके हाथ खींचते हैं, धड़ से जमीन पर आ गई ।

  कुछ दिनों बाद युवराज काफी बीमार हुए । हालत संभालते न देख वैध ने फौरन राजा से कुछ दुर्लभ जड़ी बूटियां जंगल से लाने को कहा बेटे की हालत देख रानी का तो रंग ही फीका पड़ गया था। जैसे ही जड़ी बूटी लेकर मंत्री महल में पहुंचा। वैध के बताए विधि अनुसार रानी ने स्वयं उन्हे पकाया और फिर जैसे ही युवराज को दवा पिलाई उसकी हालत बिगड़ने लगी । वह खून की उल्टियां करने लगा । रानी सर पर हाथ रख कर वही जमीन पर बैठ गई ।   

  योजना के अनुरूप बहू ने फौरन वैद्य को बुलाया। वैद्य ने पुनः औषधि में विष होने की बात राजा को बताई। रानी अभी कुछ समझ पाती इससे पहले बहू और बेटे ने रानी कि उस खास दासी को राजा के सामने प्रस्तुत कर दिया।

  जिसने छोटी रानी के कहने पर बड़ी रानी द्वारा पकाए जा रहे औषधि मैं ज़हर मिलाया, और दोष बड़ी रानी पर आया। जिसके बाद उन्हें राज्य से बाहर निकाला दिया गया था । दासी ने अतीत में की गई, अपनी गलती को और छोटी रानी के उस षडयंत्र का राजा के समक्ष उद्घाटन किया, साथ ही आज की इस घटना में भी छोटी रानी को ही जिम्मेदार ठहराते हुए मजबूरन ये काम करने की बात राजा को बताई।

  रानी जब राजा को समझाने में असमर्थ रही तो उसने स्वयं अपने गुनाह को स्वीकार कर लिया। परंतु युवराज को उसने जहर नहीं दिया, कि बात पर वह अड़ी रही।

  तब राजकुमार ने रहस्य का उद्घाटन करते हुए राजा को बताया कि वे सिर्फ रानी के चरित्र को आपके समक्ष उजागर करना चाहता था। इसलिए काफी दिनों से वह पत्नी के साथ मिलकर बीमार होने का नाटक करता रहा, और अंत में दासी पर दबाव डाल, औषधि में जहर डालने और इल्जाम रानी पर लगाने की योजना बनाई।

  रानी के किए को जानने के बाद आग बबूला हुए राजा ने रानी को राज्य से बाहर निकाल दिया, और बड़ी रानी को वापस सम्मान सहित महल ले आए ।

Moral Of The Story :-


 जैसे को तैसा | Tit For Tat - on Hindi Quotes
                    


   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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