A best moral story in hindi on fear

  शादी के कुछ सालों बाद पुष्पा ने एक बहुत ही सुंदर कली को जन्म दिया । जिसका नाम दीपिका रखा गया । उसके पिता उसे दीपा कह कर पुकारते थे । इस नई पीढ़ी में जन्मी पहली नन्ही किरण का मान जान बहुत था । नन्ही कली स्वभाव से ही काफी सरल थी ।

  उसकी मासूम अदाओं से घर ही नहीं आस पड़ोस के लोग भी दीवाने थे । हर कोई उसे अपने पास लिए  रहना चाहता था । जब वह करीब 5 महीने की हुई तब एकदिन अचानक वह बिस्तर पर लेटे लेटे जोर-जोर से चिल्लाने लगी ।

  वह इधर उधर भागना चाह रही थी  परंतु वह कुछ भी कर नहीं पा रही थी । उसके चिखने चिल्लाने की आवाज सुनकर घरवाले वहां भागे आये और उसको गोद में लेकर उसको देखने लगे कि कहीं किसी कीड़े ने तो इसे नही काटा मगर ऐसा तो कोई भी निशान उसके शरीर पर नही था ।

  तभी किसी ने कहा शायद इसने नींद में कोई बुरा सपना देखा होगा । जिसकी वजह से वह चिखने लगी परंतु तभी किसी की नजर छत की दीवार पर चिपकी छिपकली पर पड़ी । वह जोर-जोर से हंसने लगा ।

  सब ऐसे हसते देख सब आश्चर्य मे पड़ गए । तभी उसने छत की दीवार से चिपकी एक छिपकली की ओर इशारा करते हुए कहा 

 "वो देखो वो रही हमारी नन्ही परी की जान की दुश्मन जिसने हम सबको दौड़ा दिया"


  उसे देखकर बाकी सब भी हंसने लगे और बिटिया को पुचकारते हुए कहने लगे

 "तो हमारी परी को छिपकली से डर लगता है"


  वक्त बीतने के साथ परी भी बड़ी होने लगी । समय  के साथ उसमें बहुत बदलाव आया । अब नन्ही परी एक खूबसूरत परी का रुप ले चुकी थी परंतु उसकी एक आदत अभी नहीं बदलती थी ।

  वो आज भी जब कभी भी छिपकली को देखती तो बहुत डर जाती और डर के मारे भागने और चिल्लाने लगती । अब तो सब उसके इस डर से भलीभांति परिचित थे । यदाकदा वे इस बात के लिए उसे चढाया करते ।
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 परी के विवाह का समय हो गया । उसे देखने के लिए घर में कुछ लोग आए । कुछ देर बाद जब वह अपने होने वाले हस्बैंड के साथ पीछे गार्डन में बैठी उससे बातें कर रही थी ।

  तभी अचानक न जाने उसके जुबान पर ये सवाल आया उसने लड़के से पूछा 
 "आपको छिपकली से डर लगता है"
  पहले तो लड़के उसका सवाल ठीक से सुन नहीं सका या फिर समझा नहीं पाया परंतु उसके द्वारा सवाल दोबारा दोहराने पर उसे बातें समझ में आ गई"
 वह ठहाके मार कर बोला 
  "हां"
  परी ने बोला
  "सच"
  लड़का

 "हां सच, एकदम सच, पर जिस छिपकली को तुम समझ रही हो उससे नहीं बल्कि मुझे तो तुम जैसी छिपकलियों से डर लगता है"


  परी ने बोला "धत"
  और शर्माकर घर में भाग गई विवाह के पश्चात परी काफी खुशी थी । उसके ससुराल में उसका काफी मान जान था । धीरे-धीरे शादी को काफी वक्त बीत गया । अब तो ससुराल हो या मायका हर तरफ "एक बेटा", "एक बेटा" की सब रट लगने लगी । अखिर सब की दुआएं रंग लाई ।

  परी माँ बनने वाली थी । नये मेहमान के आने की तैयारी पहले से ही शुरु हो गई । इस खबर से दोनो पक्षों के लोग बहुत खुश थे । नए मेहमान के आने मे अभी काफी वक्त बाकी था लेकिन अचानक उठे दर्द के कारण उसे फौरन शहल के सबसे जाने-माने हॉस्पिटल में ले जाया गया । जहां परी ने सब की मनोकामना को पूरा करते हुए एक शहजादे को जन्म दिया । पूरे अस्पताल में मिठाइयां बांटी गई ।

  परंतु इन सब खुशियो के बीच कुछ चिंताजनक खबर भी थी, वो ये कि एक तो समय से पहले जन्मे बच्चे की स्थिति नार्मल नही थी दूसरे डॉक्टरो द्वारा किए गए ऑपरेशन के बाद परी को काफी ब्लीडिंग हो रही थी । कई घंटों के प्रयास के बाद डॉक्टर रक्त के बहाव को रोकने में कामयाब हुए । 
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  मगर तब तक परी का काफी खून बह चुका था । उसकी कंडीशन काफी खराब हो चुकी थी । उसे विशेष निगरानी में रखा । सब कुछ धीरे-धीरे नॉर्मल  हो रहा था ।

  सुबह से शाम हो चुकी थी । सब थोड़ा रिलैक्स हो रहे थे । नींद में जा चुकी परी की जब आँख खुली तो उसने अचानक छत पर चिपकी एक छिपकली को देखा जो उसे घुरे जा रही थी । वह कुछ सोचे समझे बगैर घबराकर बेड से नीचे कूद पड़ी । उसके हाथों से चढ़ रही ड्रिप की सुई उखड़ गई ।


  वह बड़ी जोर जोर से चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगी । तभी सारा स्टाफ वहाँ जा पहुंचा उन्होंने परी का ढाढ़स बढ़ाया पर परी को सम्भालना मुश्किल हो रहा था । इसी बीच माँ के वहां आने और उनके द्वारा उसे समझाने-बुझाने पर वह शांत  हुई । उसे वापस बेड पर लिटाया गया परंतु तब तक डॉक्टर द्वारा किया गया दिन भर का प्रयास बेकार हो चुका था ।

  परी को फिर से बहुत जोरों की बिल्डिंग शुरू हो गई डॉक्टर की टीम इस समस्या से निपटने में जुट गई  करीब 3 घंटे तक ऑपरेशन थियेटर की बत्ती जलती रही । थोड़े समय पश्चात डॉक्टरों के वहां से निकलने पर परिवार के लोगों ने उनसे परी का हाल-चाल जानने की कोशिश की परंतु उन्हें निराशा हाथ लगी ।

  डॉक्टरों ने परी की हालत गंभीर बताते हुए उसे फौरन बड़े सेंटर पर ले जाने की सलाह दी । परी के घर वाले भागे-भागे उसे बड़े सेंटर ले गए । जहां डॉक्टरों ने अपने अथक प्रयास से परी को बचा तो लिया परंतु इन सबके बीच परी के मां बनने की इच्छा को ही हमेशा के लिए खत्म कर दिया, हुआ ये था कि परी को बचाने के प्रोसेस में डॉक्टरों को मजबूरन उसका गर्भाशय निकालना पड़ा । उधर समय से पहले जन्मे नवजात ने एनआईसीयू में ही जूझते-जूझते जिन्दगी की जंग हार बैठा ।

        Moral Of The Story


Moral of the story
                         

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         Writer
        Karan "GirijaNandan"
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