31 July, 2018

ईश्वर को धन्यवाद कहानी Thankyou God No Complaints From You Hindi Story

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धन्यवाद भगवान आपसे कोई शिकायत नही -प्रेरणादायक हिन्दी कहानी,ईश्वर को करें धन्यवाद -हिन्दी स्टोरी| story in hindi with moral-thankyou god, no complaints from you

धन्यवाद भगवान आपसे कोई शिकायत नही कहानी | Thanks God Story In Hindi


   "क्या भाई लक्ष्मण तुम्हारी भैसे बीमार हैं क्या दो दिनों से तुम दूध पहुचाने नहीं आए"

तब लक्ष्मण ने कहा

  "नहीं नहीं मालिक ऐसा नहीं है असल में हमारी एक भैंस ने दूध देना पहले से काफी कम कर दिया है । उससे मिलने वाला दूध तो कस्बे मे ही खप जाता है इसलिए यहां शहर आने की मुझे जरूरत ही नहीं पड़ती, मगर चिंता की कोई बात नहीं है मेरी दूसरी भैंस बहुत जल्द ही बच्चा देने वाली है फिर दूध की कोई कमी नहीं रहेगी"

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असल में लक्ष्मण के पास दो भैंस हैं जिनके सहारे उसका घर परिवार चलता है परंतु उसकी एक भैंस जो कि काफी दिनों से दूध दे रही थी । उसका दूध अब काफी कम हो गया है वहीं उसकी दूसरी भैंस अभी बच्चा देने वाली है ।

  इन सब वजहों से उसकी आमदनी बहुत कम रह गई है । मगर उसकी यह परेशानियां बहुत जल्दी ही खत्म होने वाली है क्योंकि उसकी भैंस को बच्चा होने मे अब ज्यादा दिन नहीं बचें हैं ।
  देखते ही देखते वह शुभ दिन आ ही गया जिसका लक्ष्मण को बहुत दिनो से  इंतजार था उसकी भैंस ने एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया परंतु इस शुभ समाचार के साथ-साथ एक पीड़ादायी खबर भी है असल में लक्ष्मण की भैंस बच्चे को जन्म देते ही खुद इस दुनिया से चल बसी । 

  इस बात से लक्ष्मण के परिवार में मातम का माहौल बन गया है क्योंकि लक्ष्मण की दो भैंसो मे से एक ने तो  पहले दूध देना बंद कर दिया था । वहीं जिसपर वह आश लगाए बैठा था वह तो उसे बीच मझधार में ही छोड़ चल बसी । 

  अब लक्ष्मण का गुजारा कैसे होगा ? उसके दाल रोटी कैसे चलेगी ?

  इन सब चीजो से लक्ष्मण बुरी तरह घिर गया । उसे अब कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि उसके पास अपने छोटे से मकान और दो भैंसो के सिवाय और कुछ नहीं था । किसी तरह गुजारा करने वाले लक्ष्मण के पास इतना भी धन नहीं था कि वह फौरन एक दूसरी भैंस खरीद लें । जिससे उसका घर का खर्च चल सके ।

  हालांकि उसपर यह संकट मात्र उतने दिनों के लिए ही था जबतक उसके पास बची एक मात्र भैंस, फिर से दूध देने के लायक न हो जाए परंतु इसमे अभी काफी समय था ।

  अब तो बस हाय तौबा करने के सिवाय और ईश्वर को कोसने के सिवाय उसके पास दूसरा कोई चारा नहीं था । अब तो जहां देखो वह, बस ईश्वर को कोसता रहता वह हमेशा गांव वालों से कहता 

  "ऊपर वाला भी न जाने किस जन्म का बदला मुझसे ले रहा है । यहां औरों को देखो, सब के सब न जाने कितने ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं । वही हमें सिवाय झोपड़े के उसने कुछ नहीं दिया । बड़ी ही मेहनत करके मैंने दो भैंसो का जुगाड़ किया   जिनके सहारे मेरे और मेरे परिवार का भरण-पोषण हो रहा था मगर उसको यह भी नहीं देखा गया । उसने ऐसे वक्त पर मेरी एक भैंस को छीन लिया जबकि दूसरी भैंस बिल्कुल भी दूध नहीं दे रही है । यह बात बिलकुल वैसी ही है जैसे गरीबी में आटा गीला होना । अब मैं करूं तो क्या करूं मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आता । अब तो मै हर वक्त बस यही सोचता हूँ कि काश वह मुझे मिल जाता तो मे उससे पूछता आखिर किस जन्म का बदला तुम मुझसे ले रहे हो ? रोज-रोज हमें तिल-तिल मारने से तो अच्छा था कि एक ही बार हमारी जान ले लेते तो हमे भी इस जी के जन्जाल से छुट्टी मिल जाती" 


वाकई लक्ष्मण खुद को बहुत असहाय महसूस करने  लगा था तभी एक गांव वाले ने उससे कहा कि, जब तक उसकी दूसरी भैंस दूध नहीं देने लगती तब तक के लिए उसे शहर चलकर कुछ मेहनत मजदूरी करनी चाहिए ।
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  यह सुझाव लक्ष्मण को बहुत अच्छा लगा हालांकि उसे यह सब करने की आदत तो नहीं थी मगर मजबूरी इंसान को क्या-क्या न करा दे । ऐसे में मजबूर लक्ष्मण शहर की ओर चल पड़ा । वहां कड़ी धूप में मजदूरों द्वारा किए जा रहे, गारे-माटी और ईट-बालू का काम काफी थका देने वाला था मगर मरता क्या न करता ।

  माथा पीटने, ईश्वर को कोसने और मजदूरी करने के सिवाय उसके पास अब कोई दूसरा चारा नहीं था । उसे यहां काम करते हुए काफी दिन गुजर गए इतने दिनों से यहां काम करते हुए लक्ष्मण ने देखा कि कई बूढ़ी औरतें जिनके शरीर पर झुर्रियां पड़ चुकी हैं और जिन्हें अब साफ दिखाई भी नहीं देता वे भी इस चिलचिलाती धूप में दो जून की रोटी का इंतजाम करने के लिए मेहनत मजदूरी कर रही हैं सिर्फ यही नहीं वहां उसने एक ऐसी औरत को भी देखा जो पीठ पर अपने नवजात बच्चे को बांधे काम मे लगी हुई है और बहुत खुश दिख रही है । 

  वहां कुछ ऐसे लोग भी थे जो कई विकारों से ग्रस्त थे । उनमें से कुछ तो ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे । कुछ को पांव में चोट लगी थी मगर फिर भी वह हंसके मुस्कुराके अपना काम किए जा रहे थे । इन सबके बीच उसने एक ऐसे शख्स को देखा जिसको देखकर उसकी रूह कांप गई । वह सर पर तेरह-तेरह ईट लादे मकान की दूसरी मंजिल पर ईट पहुंचा  रहा था ।

  उसमें हैरान करने वाली बात यह यह थी कि उसका सिर्फ एक ही हाथ था जिसे देखकर लक्ष्मण कि आँखे तन गई । वह बहुत ही आश्चर्य भरी निगाहों से उसे बस एकटक देखता रहा । शाम को जब वह घर जा रहा था तब लक्ष्मण ने उससे थोड़ी बातचीत करनी चाही । लक्ष्मण ने उसने कहा

"भाई बड़ी अजीब बात है ईश्वर जिसको देता है उसको छप्पड़ फाड़ कर देता है । वही जो उसकी निगाहों में गिड़ जाता है उससे वह सब कुछ छीन लेता है । अब तुम खुद को ही देख लो एक तो तुम्हें भगवान ने गरीब बनाया दूसरे तुमसे मेहनत करने के लिए तुमसे तुम्हारे हाथ भी छीन लिए अब इसे तुम्हारी मजबूरी कहें या महानता है कि तुम अपने एक हाथ से भी मेहनत मजदूरी करके अपना पेट जिला रहे हो"

  तब उस बंदे ने लक्ष्मण से कहा

 "नहीं-नही भाई ऐसा मत कहो ईश्वर ने हमें बहुत कुछ दिया है यह जिंदगी आखिर उसी की देन है अगर वह हमारा दुश्मन होता तो हमें ये जिंदगी देता ही क्यूं । अगर वह नहीं चाहता तो हम यह खूबसूरत दुनिया कभी देख भी नहीं पाते इसलिए हमें जो कुछ भी मिला है उसमे हमें सदा खुश रहना चाहिए और इस जीवन के लिए हमे सदैव ही ईश्वर का धन्यवाद देना चाहिए"


  लक्ष्मण उसकी बातों को सुनकर मन ही मन स्वंय को ईश्वर को कोसने के लिए धिक्कारने लगा ।

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कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 


यह जीवन जैसा भी है उसके लिए हम सदैव उसके ऋणी हैं जिसके द्वारा हमें यह जीवन प्राप्त हुआ है अर्थात ईश्वर इसीलिए हमें अपने बड़े से बड़े कष्ट को भूल ईश्वर से मिले इस जीवन के लिए उसे हमेशा धन्यवाद करना चाहिए और हर हाल में खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए !



  दोस्तों यहां हर कोई अपनी छोटी बड़ी समस्याओं को सामने पाकर अक्सर ईश्वर को कोसने में लग जाता है । उसे लगता है कि ईश्वर ने तो उसे कुछ भी नहीं दिया और शायद यह जन्म देकर वह उससे किसी जन्म का बदला ले रहा है परंतु जरा अपने आसपास नजर डालकर देखें तब पता चलेगा कि आप कितने खुशकिस्मत हैं ।
  दुनिया में आपसे भी अधिक परेशानियां झेलने वाले लोग हैं और वे उसमे भी खुश हैं । सच मानिए अगर ईश्वर आपका दुश्मन होता तो यह जीवन आपको कभी नहीं प्राप्त होता । उसने आपको इस अनमोल जीवन के योग्य समझा है तभी उसने आपको यह जीवन दिया है । इसलिए जीवन मे मिले हर पल का आनंद उठाइए परेशानियों का सामना कीजिए और हां ईश्वर का धन्यवाद करना कभी मत भूलीए । दोस्तो ये जीवन अनमोल है ।


Writer 
  Karan "GirijaNandan"
 With  

                              




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