सफल होने के आसान उपाय या तरीके पर हिन्दी स्टोरी,|ways to be successful in life inspirational story in hindi with moral

सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी क्या है कहानी | Inspirational Hindi Story


  निम्न वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले दो चचेरे भाई लव और कुश जिनकी पढ़ाई लिखाई में कुछ खास रुचि नहीं थी उन्होंने तीसरे श्रेणी मैं मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद पढ़ाई लिखाई छोड़ रोजगार करने की सोची। लव और कुश दोनों के पिता महानगर में दैनिक मजदूर का कार्य किया करते थे उनके परिवार में भी कोई इतना पढ़ा लिखा नहीं था जो उन्हें पढ़ाई लिखाई के महत्व को समझा सके ।

  वैसे तो उनके पास महानगर अपने पिता के पास जाकर रोजगार पाने का एक आसान सा विकल्प था । मगर लव और कुश काफी समझदार थे । वे जानते थे कि सिर्फ मैट्रिक की डिग्री के भरोसे आज के जमाने में कोई ढंग की नौकरी उन्हें मिलने से रही । इसलिए उन्होंने कोई नौकरी करने के बजाय कारोबार करने की सोची ।

  वैसे तो इस छोटे से शहर में व्यवसाय करने के कई विकल्प मौजूद थे परंतु किसी भी व्यवसाय में सफल होने के लिए जो चीज सबसे जरूरी होती है यानी पूंजी, वो उनके पास बिल्कुल भी नहीं थी ।


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  लव और कुश जल्दबाजी में कोई भी फैसला नहीं लेना चाहते थे क्योंकि वे जानते थे कि किसी भी व्यवसाय को चमकाने में अच्छा खासा समय लग सकता है इसलिए अगर उन्होंने जल्दबाजी में कोई गलत व्यवसाय को चुन लिया और फिर कुछ समय बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा तो वे अपने जीवन का स्वर्ण समय बर्बाद कर देंगे इसलिए वे दोनों अपनी क्षमताओं के मुताबिक कारोबार के लिए मौजूद सभी विकल्पो पर गंभीरता से विचार करने लगे ।

  कुश का एक दोस्त कुल्हड़ का व्यापार करता था । वह चाय की दुकानों पर और अन्य जगह जा-जाकर  कुल्हड़ पहुंचाया करता था । ऐसे में कुश ने भी कुल्हड़ और अन्य मिट्टी के बर्तनों का व्यापार करने की सोची । जब उसने अपने विचारों को लव के साथ सांझा किया । तब लव ने उसे इस व्यापार के कई नकारात्मक पहलुओं के बारे में बताया उसने बताया कि

   "वैसे तो मिट्टी के बर्तनों का काम करना ठीक होगा परंतु मिट्टी के सामानो को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में वे टूट सकते हैं । जिसकी भरपाई तुम्हें खुद से करनी होगी । तुम्हारे पास न तो अच्छा घर है और न ही कोई दुकान । ऐसे में तुम मिट्टी के बर्तनों को रखोगे कहां ? मुझे लगता है कि तुम्हे थोड़ा और सोचने समझने की आवश्यकता है उपयुक्त विकल्प मिलने तक हमे जल्दबाजी में कोई कदम नही उठाना चाहिए । वह बाद नुकसानदेह साबित हो सकता है"



  कुश अपने दोस्त की बातों को समझते हुए कुल्हड़ के व्यवसाय के विषय में किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले खुद को थोड़ा और वक्त देने की सोची ।

  कुछ दिन बाद कुश अपने साथ एक ठेले पर ढेर सारे कुल्हड़ और थोड़े मिट्टी के बर्तन लेकर घर आया । उसे देखते ही लव को उस पर बहुत गुस्सा आया । उसने उससे कहा

    "मैंने कहा था न जल्दबाजी में कोई फैसला मत लेना हमे अभी और सोचने की जरूरत है मगर मेरे समझाने के बावजूद तुम मिट्टी के ये बर्तन उठा लाए । अब जाओ और जाकर इसे बेचो । मुझे ये काम नहीं करना क्योंकि मैं जानता हूँ कि इसमें  नुकसान के सिवा और कुछ नहीं मिलेगा । तुम लाए हो तो तुम्हीं बेचो"


  ऐसा कहते हुए लव गुस्से में वहां से चला गया हालांकि कुश उससे बार-बार इस काम को एकबार करके देखने को कहता रहा मगर लव आजमाने वाला काम नहीं करना चाहता था । वह एक बार ठीक से समझ कर अपना लक्ष्य तय करना चाहता था ताकि बाद में उसे अपने फैसले पर पछताना न पड़े ।
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  लव के मना कर देने के कारण मन मारकर आखिरकार कुश अकेला ही कुल्हड़ को लिए इधर-उधर घूम-घूमकर बेचने लगा । कुश ने जैसा सोचा था यह काम उतना सरल नहीं था । एक तो पैदल चलकर दुकान-दुकान कुल्हड़ बेचने में बहुत मेहनत थी । दूसरे मार्केट में कंपटीशन इतना भीषण था कि लोग उसके कुल्हड़ो का जो दाम लगाते वो उसके खरीद रेट से भी कम था  ऐसे में अगर दिनभर की मशक्कत के बाद उसके सारे कुल्हड़ भी बिक जाते तो भी उसे कुछ खास लाभ नहीं होता ।

लव हमेशा उसे नए कुल्हड़ लाने से मना करता । मगर कोई और विकल्प न होने के कारण कुश इसी काम को आगे बढ़ाने में जुटा रहा । धीरे-धीरे उसके कुल्हड़ो की बिक्री काफी बढ़ गई जिससे उसकी खरीद भी बढी नतीजन अब वह कुल्हड़ बनाने वालों से ठीक से मोलभाव करने की स्थिति मे आ गया । जिसके कारण वही कुल्हड़ अब उसे पहले सस्ते दामों पर मिलने लगे जिससे उसका मुनाफा पहले से कुछ बेहतर हो गया ।

    कुछ ही दिनो मे उसने पास के चौराहे से थोड़ी सी दूरी पर स्थित फुटपाथ पर अपनी एक मिट्टी के बर्तनों की दुकान खोल ली । दुकान पर उसने अपनी पत्नी और बूढ़ी माँ को बिठा, खुद दुकान-दुकान कुल्हड़ बेचने लगा । उसकी दुकान सस्ते दामों पर कुल्हड़ और दूसरे मिट्टी के बर्तनों के लिए काफी प्रसिद्ध हो गई । अब तो आलम यह था कि उसे अपनी दुकान से ही फुर्सत नहीं मिलती । लिहाजा उसने मोहल्ले के दो लड़कों द्वारा मार्केट के अपने दूसरे ग्राहको के दुकानों पर कुल्हड़ भिजवाना शुरु कर दिया ।

  मगर वक्त ने एक बार फिर से उसकी परीक्षा ली । समय के साथ ही लोगों का मिट्टी के बर्तनों में रूचि खत्म होने लगी । चूंकि प्लास्टिक के सामान मिट्टी के बर्तनों से काफी सस्ते एवं टिकाऊ थे । ऐसे में लोगों ने मिट्टी के बर्तनों से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया । धीरे-धीरे कुश की दुकान मंद पड़ने लगी । तब लव ने उसे समझाया 

   "देखो दोस्त मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि हमें किसी भी व्यवसाय को चुनने से पहले उसके हर पहलू को ठीक से समझ लेना आवश्यक है । तुमने मिट्टियों के बर्तनों का भविष्य जाने बगैर ही उसमें हाथ डाल दिया और आज देखो तुमने इतने दिनों  के कड़ी मेहनत के बाद जो व्यवसाय खड़ा किया ।आज उसका भविष्य अंधकार में है । अभी भी वक्त है मेरे दोस्त हमें मिलकर किसी अच्छे व्यवसाय के बारे में विचार करना चाहिए मुझे यकीन है कि कोई न कोई बेहतर विकल्प हमें मिल ही जाएगा जिसे करके हम अपना भविष्य उज्जवल बना सकेंगे"


  कुश जानता था कि उसका फैसला गलत नहीं था, अब ये वक्त-वक्त की बात है कि किसी समय जो कुल्हड़ का व्यवसाय उसके लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करने में कामयाब रहा वही आज मिटता हुआ नजर आ रहा था । कुश ने हिम्मत न हारते हुए आगे की योजना पर विचार करने लगा । कुछ दिनों बाद जब लव उसकी दुकान पर आया तो उसने देखा कि उसके दोस्त ने कुल्हड़ के साथ-साथ कुछ प्लास्टिक के छोटे बड़े ग्लास तथा अन्य प्लास्टिक की वस्तुओं को भी अपनी दुकान में सजा रखा है ।

  वो समझ गया कि इसके अंदर धैर्य नहीं है । किसी भी विषय पर ये थोड़ा रुककर गंभीरता से कभी विचार नहीं कर सकता इसलिए इसका तो भगवान ही मालिक है । इसका कुछ नहीं हो सकता उधर कुश अपने नए व्यापार को आगे बढ़ाने में लगा रहा और धीरे-धीरे उसने स्वयं की मिट्टी के बर्तनों पर अपनी निर्भरता को खत्म करते हुए प्लास्टिक के सामानों से अपने व्यवसाय को चमकाने में कामयाब रहा ।
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  मगर जब किस्मत खराब हो तो मरी मछली भी पानी में कूद जाती है इतने वर्षों में वो विरान चौराहा अब काफी विकसित हो चुका था । वहां लोगों की बढ़ती भीड़ के कारण दुकानों की संख्या में भी दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही थी ।  

  ऐसे में कुश जिस खाली पड़े जमीन के आगे फुटपाथ पर अपनी दुकान लगाया करता अब वह खाली जमीन भी कॉन्प्लेक्स का रूप ले रही थी । काम्पलेक्स मालिक उसे जल्द से जल्द फुटपाथ खाली कर देने का दबाव डाल रहे थे । इस विषय पर जब कुश ने लव से बात की तो लव ने काफी तीखें स्वरों में उससे कहा 

   "तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता तुम हमेशा जल्दबाजी में रहते हो । मुझसे भला क्यूं पूछते हो जब सबकुछ तुम्हें अपने मन की ही करनी है, तुमने इस समस्या का भी कोई हल जरूर सोच रखा होगा । ऐसे में तुम्हें जो करना है करो तुम्हें समझा कर कोई फायदा नहीं तुम्हारे अंदर धैर्य नाम की कोई चीज नहीं है । तुम कोई भी फैसला तुरंत लेने के आदि हो । तुम्हें फुटपाथ पर दुकान खोलने से पहले सोचना चाहिए था कि ये जमीन हमेशा के लिए खाली नही रहेगी और जब तुम्हे इस जगह को खाली करना पड़ेगा तब तुम क्या करोगे"

  
  कुश को इस मुश्किल वक्त मे अपने दोस्त से जिस सपोर्ट की उम्मीद थी लव ने उसके ठीक विपरीत हर बार की तरह ही कोई भी सलाह देने से अपना पल्ला झाड़ दिया । मुश्किल की घड़ी में खुद को अकेला पाकर कुश काफी घबरा गया जैसे-जैसे कांप्लेक्स तैयार हो रहा था वैसे-वैसे उसका दिल बैठे जा रहा था । अब तो उसे सामने पड़ा भोजन भी अच्छा नहीं लगता ।

  चूंकि चौराहे के चारों ओर दूर-दूर तक कोई खाली जमीन अब नहीं बची थी जहां वह अपनी दुकान लगा सके और यहां से जाने का मतलब था, अपने बने-बनाए कारोबार को शून्य पर लाकर खड़ा कर देना क्योंकि इस मार्केट में उसने काफी अच्छी जान पहचान बना ली थी, क्षेत्र के लगभग-लगभग सभी लोग उसी से प्लास्टिक के सामान खरीदते ।

  मगर एक दिन वह हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी । एक दिन जब लव, कुश की दुकान के सामने से गुजर रहा था । तभी उसने देखा कि कुश की दुकान वहां से गायब है । वह समझ गया कि कॉन्प्लेक्स वाले ने आखिरकार उन्हे यहा से भगा ही दिया । मन ही मन वह कुश पर नाराज होते हुए जैसे ही वहां से आगे बढ़ा । अचानक उसे सामने कांप्लेक्स की एक छोटी सी दुकान में कुश नजर आया उसे देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया । 

  कुछ देर तक तो वह कुश और उसकी दुकान को एकटक बस देखता रहा वह समझ नहीं पा रहा था कि  कुश कांप्लेक्स की दुकान में क्या कर रहा है । जब यह जानने के लिए वह कुश के पास गया तब उसे पता चला कि कुश ने फुटपाथ पर अपने साथ दुकान लगाने वाले अन्य दुकानदारों से इस विषय पर काफी सलाह मशवरा किया और जिसके बाद उन्ही दुकानदारों में से एक दुकानदार ने उसके साथ सांझे में कांप्लेक्स में बनी दुकानों में से एक दुकान लेने की बात कही । यह राय कुश को भी बहुत पसंद  आई और उन फिर उन दोनों ने दुकान में भरे माल को बहुत हद तक कम कर और साथ ही मार्केट से थोड़े पैसे उधार लेकर ढेर सारी पूंजी इकट्ठा कर ली और मिलकर कांप्लेक्स में स्थित एक दुकान किराए पर ले ली । 

  अब आधी दुकान में कुश अपने प्लास्टिक के सामान बेचा करता है जबकि दुकान के बाकी आधे हिस्से मे उसके दोस्त ने जूते चप्पल की दुकान खोल रखी है । इस प्रकार सड़कों पर घूम-घूमकर कुल्हड़ बेचने वाला कुश अब एक छोटा मोटा सेठ बन गया है । वही लव अभी यही सोचने में लगा है कि उसे कौन सा व्यवसाय करना चाहिए ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 


किसी भी विषय पर फैसला लेने के लिए एक हद से ज्यादा विचार करने से बेहतर है कि हम उपलब्ध सभी विकल्पों के हर पहलुओं पर ठीक से विचार करे और उनमें श्रेष्ठतम विकल्प का चुनाव कर उस पर प्रयास करना आरंभ करें !

  हमेशा किसी भी विषय में फैसला लेते समय अक्सर दो राहें नजर आती है जिनमें से हमें किसी एक रास्ते को चुनना होता है उन दोनों रास्तों में से किसी एक रास्ते का चुनाव कर पाना अपने आप में काफी कठिन होता है खास करके तब जब हमें उन रास्तों के बारे में कुछ खास अनुभव या जानकारी न हो और न ही उनके बिषय मे कोई ठीक से बताने वाला हो तब एक ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है जब हम बार-बार उन्हीं दो रास्तों में से अपने लिए सबसे बेहतर रास्ते के विषय में सोचने लगते हैं मगर उनमे से किस रास्ते को चुने ? कौन सा रास्ता हंड्रेड परसेंट करेक्ट है और कौन सा रास्ता हंड्रेड परसेंट रॉन्ग है ? यह हम कभी तय नहीं कर पाते क्योंकि दोनों के बीच की लकीर काफी पतली होती है ।

  चाहे पढ़ाई की बात हो चाहे बिजनेस चाहे शादी और चाहे किसी अन्य विषय की बात कर ली जाए मगर हर बार जिंदगी दोराहे पर खड़ी होती है और उसमें से एक राह को चुन पाना काफी कठिन होता है कुछ लोग पूरी जिंदगी सिर्फ यही समझने में बिता देते हैं कि दोनों में से बेहतर रास्ता कौन है दोस्तों अगर पूरी जिंदगी सिर्फ विकल्पों का चुनाव ही करते रहोगे तो उन पर काम कब करोगे ।

मेरा यह मानना है कि आपको प्रत्येक ऑप्शन पर बारी-बारी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है । उसके हर पहलू पर विचार करने और उनके संबंध में अधिक से अधिक ज्ञान इकट्ठा करने की आवश्यकता है जरूरी हो तो दूसरों से भी राय ले मगर इन सबके बाद आपको सभी विकल्पों में से सबसे बेहतर विकल्प का चुनाव कम से कम समय में करना ही होगा । दोस्तों जब हमें जिस काम का कोई अनुभव नहीं है तो जाहिर सी बात है कि वह फैसला गलत भी साबित हो सकता है मगर सिर्फ यही सोच कर बैठे रहने से भी तो कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है आप उपलब्ध विकल्पों में से सबसे श्रेष्ठतम विकल्प का चुनाव करे और उस पर काम करें ।

  इस कहानी में हमने देखा की कुश के द्वारा लिए गए अधिकांश फैसले बार-बार गलत साबित हो रहे थे मगर वह उपलब्ध विकल्पों में से श्रेष्ठतम विकल्प का चुनाव कर उन पर हमेशा काम करने की कोशिश करता रहा वहीं लव हाथ पर हाथ धरे भविष्य के लिए एक अच्छा निर्णय लेने मे लगा रहा और फलस्वरुप उसका न तो करियर सेटल हो सका और न ही उसे किसी काम का कोई अनुभव ही हो सका किसी ने क्या खूब लिखा है 

 "भटकने वालों को मन्जिल आखिर मिल ही जाती है मिलता तो उन्हें कुछ नहीं है जो घर से कभी निकले ही नहीं"
                                                              


   Writer
  Karan "GirijaNandan"
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