15 August, 2018

सच्ची मित्रता पर कहानी Heart Touching Friendship Short Story In Hindi

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सच्ची मित्रता शीर्षक पर आधारित हिन्दी कहानी, मित्रता क्या है, मित्रता का महत्व बताती हिन्दी स्टोरी true friendship emotional moral story in hindi on two friends


मित्रता शीर्षक पर आधारित कहानी | True Friendship Moral Story In Hindi



  बहुत समय पहले की बात है एक गांव में माधव नाम का एक युवक रहा करता था माधव की दोस्ती गांव के ही एक लड़के हीरा से थी जहां एक तरफ माधव काफी रसूखदार घराने से था वही हीरा एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था । दोनों के परिवारों में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद उनकी दोस्ती काफी गहरी थी ।

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  उधर माधव के पिता अपने पैसों की अकड़ में अपनों को भी कुछ नहीं समझा करते थे । ऐसे में माधव अपना सारा दुख-सुख हीरा से ही सांझा (share) करता था । माधव हीरा को सिर्फ अपना दोस्त (friend) ही नहीं बल्कि अपना भाई अपना सब कुछ समझता था । वैसे माधव काफी सरल स्वभाव (nature) का एक भोला-भाला युवक था । वह ज्यादा समझदार भी नहीं था वही उसका दोस्त हीरा उसके सामने अंधों में काना राजा था क्योंकि ज्यादा दिमागदार तो वह भी नहीं था मगर हां माधव से थोड़ा समझदार जरूरत था ।


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  ऐसे में माधव अपनी सारी समस्याओं (problems) को हीरा के सामने रखता और हीरा उसकी सारी प्रॉब्लम का फौरन एक बेहतर हल निकाल कर रख देता परंतु वह अक्सर माधव की परेशानियों को हल करते करते खुद ही काफी परेशान हो जाया करता । परंतु परिस्थितियां चाहे जो हो हीरा और माधव ने एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ा ।

  माधव उसी गांव की एक युवती गौरी से बहुत प्रेम (love) करता था हालांकि गौरी काफी निम्न परिवार से ताल्लुक रखती थी । ऐसे में माधव जानता था कि उसके अहंकारी पिता गौरी से उसका विवाह (marriage) करवा कर अपने मान सम्मान को ठेस नहीं पहुंचने देंगे मगर फिर भी माधव गौरी के प्रेम में बिल्कुल अंधा हो चुका था ।

  ऐसे में उसने पिता के खौफ (fear) को दरकिनारे करते हुए गौरी से ब्याह कर लिया और उसे साथ लेकर घर चला आया हालांकि उसके पिता भी माधव और गौरी के संबंधों से अनभिज्ञ नहीं थे मगर जैसे ही माधव, पत्नी को लेकर घर में दाखिल हुआ । उनको साथ देखकर उसके पिता तमतमा (angry) गए और जवान बेटे की जबरदस्त पिटाई कर दी ।

  माधव और गौरी के विवाह को काफी वक्त हो चुका था मगर पिता ने  अभी तक गौरी को बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया था । वह हमेशा उसे एक ऐसे बाहरी शख्स (person) के रूप में देखा करते जिसने उनके सम्मान को ठेस ही नहीं बल्कि समाज में उनकी इज्जत को तार-तार कर दिया था इसलिए वे गौरी को हमेशा कष्ट पहुंचाने की कोशिश किया करते थे ।

  एक दिन गौरी की तबीयत अचानक खराब हो गई । माधव और हीरा उसे लेकर भागे-भागे अस्पताल (hospital) पहुंचे जहां कुछ जांचों के बाद डॉक्टर ने जो उन्हें बताया उसको सुनकर मानो माधव पर समस्याओं का पहाड़ टूट पड़ा हो । माधव की पत्नी गौरी की दोनों किडनी खराब हो चुकी थी और उसे फौरन बदलना बहुत आवश्यक था । अन्यथा गौरी की जान भी जा सकती थी ।

  वैसे किडनी (kidney) मिलने में कुछ खास मुश्किल नहीं थी क्योंकि माधव अपनी एक किडनी गौरी को देने के लिए पूरी तरह तैयार था मगर समस्या बस इतने में ही खत्म होने वाली नहीं थी । अब सवाल था कि किडनी को ट्रांसप्लांट करने में जो अस्पताल का खर्च आ रहा था उसे कैसे चुकाया जाए । यह रकम (money) मामूली नहीं थी जिसे माधव आसानी से चुका सके ।

  ऐसे में वह भागे-भागे अपने पिता के पास मदद के लिए गया । उसने पिता से मदद की गुहार लगाई मगर उसके पिता को गौरी फूटी आंख नहीं भाती थी इसलिए उन्होंने माधव की किसी प्रकार की कोई भी मदद (help) करने से इन्कार करते हुए उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया ।

  पिता से उसको बड़ी उम्मीदें थी जिसके चकनाचूर होते ही वह बिल्कुल टूट गया और बेसुध होकर पास के तालाब के किनारे जाकर बैठ गया । तब हीरा ने उसकी ढाहस बढ़ाते हुए "सब कुछ ठीक हो जाएगा"  का आश्वास (promise) न देने लगा । मगर माधव जानता था कि उसके आश्वासन में जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं ।
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  एक दिन हीरा माधव के पास आया और बताया कि पैसों का इंतजाम हो गया है । अब हमें देर नहीं करनी चाहिए । फटा-फट (fast) गौरी का ऑपरेशन कराना चाहिए । तब माधव ने उससे जानना चाहा कि आखिर इतने पैसों का जुगाड़ उसने कहां से किया तब हीरा ने बताया कि

   "किसी सेठ से उसने ये पैसे काफी ऊंचे सूद (money on interest) पर उधार लिए हैं मेहनत मजदूरी करके वे दोनों इस रकम को जरूर चुका देंगे"

  माधव की जिंदगी (life) मे खुशियां आने ही वाली थी कि परन्तु वक्त न एक बार फिर करवट बदला वो कहते हैं न   "जब वक़्त बुरा हो तो मरी मछली भी पानी में कूद जाती है" संजोगवश माधव की किडनी गौरी से नहीं मैच (matching) कर रही थी । ऐसे में अब हीरा के जुटाए हुए पैसे भी किसी काम के नहीं थे । माधव एक बार फिर से टूट गया तब हीरा ने एक बार फिर उसका ढाहस बढाया । 

  शाम को वह फिर से दौड़े-दौड़े माधव के पास आया और बोला चल किडनी का जुगाड़ हो गया है । माधव ने उससे पूछा 

  "अबे अब ये किडनी कौन देने लगा"

तब उसने बताया कि 

   "एक जरूरतमंद मिला है जो कुछ पैसों में हमें अपनी किडनी दे रहा है तू चिंता मत कर हम उसके भी पैसे सूद समेत चुका देंगे"

 आखिरकार ऑपरेशन सफल रहा और गौरी की जान जाते-जाते रह गई जब वो लोग अस्पताल से छुट्टी पाकर (relief) घर लौट रहे थे तब हीरा और उसकी पत्नी न जाने क्यों अस्पताल के गेट पर ही ठहर गए । 

  कुछ दूर आगे जाने के बाद माधव ने पीछे पलट कर देखा तो हीरा और उसकी पत्नी उनके पीछे न आकर वही अस्पताल के दरवाजे (door) पर खड़े थे और इधर-उधर कुछ देख रहे थे । तब माधव उनके पास आया और पूछा 

 "यार चलना नहीं है क्या यहां क्यों रुक गए, कोई बात है क्या"

तब हीरा ने उससे कहा 

 "नहीं नहीं कोई बात नहीं है तुम चलो, बस कुछ जरूरी काम है उसे निपटा कर हम आते हैं"

 हीरा की बातों को सुनकर माधव के मन में कुछ शंका पैदा हो गई । उसने हीरा पर वह जरूरी (Important) काम बताने के लिए दबाव डालने लगा मगर हीरा के पास इस सवाल (question) का कोई जवाब नहीं था ।
    धीरे-धीरे उनमें इसी बात को लेकर गरमागरम बहस छिड़ गई । इसी बहस के बीच में अचानक माधव को पता चला कि जिन पैसों का इंतजाम हीरा ने किया था । वह पैसे उसने किसी सेठ से उधार लेकर नहीं बल्कि उसने अपना घर (home) खुद बेचकर (sell) किया था । इतना ही नही वह किडनी भी किसी जरूरतमंद ने नहीं बल्कि हीरा की पत्नी ने दी है ।


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कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 



  दोस्ती इस दुनिया में किसी भी रिश्ते से ज्यादा मूल्यवान है इसीलिए हमें दोस्ती के रिश्ते को किसी से कम नहीं आंकना चाहिए क्योंकि कभी-कभी हमारे दोस्त वो कर जाते हैं जो शायद हमारे अपने भी हमारे लिए नहीं करते ।


  इसीलिए शायद किसी ने कहा है क्योंकि हर एक दोस्त जरूरी होता है । हीरा ने जो माधव के लिए किया वह कोई नई बात नहीं है ऐसी दोस्ती की हजारों मिसाल (example) हैं जिन्होंने अपनी दोस्त के लिए अपना सब कुछ गंवा दिया इसीलिए  दोस्तों की बड़ी से बड़ी बात को भी दरकिनारे करते हुए अपनी दोस्ती को कभी कमजोर न पड़ने दें । वक्त (time) के साथ और इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम सिर्फ अपने परिवार (family) को ही साथ लेकर चलने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने दोस्तों से सिर्फ मोबाइल (mobile) से बात करने के सिवाय उनसे मिलना कभी जरूरी नहीं समझते । थोड़ा वक्त निकालिए उनसे मिलकर अपने पुराने रिश्ते को मजबूत (strong) कीजिए क्योंकि जिंदगी का सफर अकेले भी तय किया जा सकता है परंतु अगर दोस्त साथ हो तो उस का मजा  ही कुछ और है ।



Writer 
  Karan "GirijaNandan"
 With  

                              



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