आत्महत्या या खुदकुशी- प्रेरणादायक कहानी | बच्चों और युवाओं मे बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति के कारण व रोकने के उपाय top 1 suicide story and short speech in hindi

  "अब बस भी करो रोज-रोज एक ही रट लगा रखा है.. . कितनी बार समझाया, ये पेन किलर बहुत नुकसान करती हैं इन्हें रोज-रोज लेना जानलेवा हो सकता है मगर तुम हो कि मानती ही नहीं"

  "आज सर में बहुत दर्द था इसलिए ले लिया वरना रोज-रोज कहां लेती हूँ । तुम भी न, बस एक ही बात पकड़ कर बैठ जाते हो मानो कहीं के डॉक्टर हो, डॉक्टर होते तो न जाने क्या करते"

  प्रेम "मै डॉक्टर न सही मगर तुम देखना एक न एक दिन हमारा बेटा पुष्पेंद्र जरूर डॉक्टर बनेगा और तब तुम्हें बिना मतलब के इन दवाइयों को लेने का साइड इफेक्ट समझ आएगा"

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  सामने बैठा पुष्पेंद्र उनकी बातों को सुनकर जोर-जोर से हंस रहा है । दादी का लाडला पुष्पेंद्र शहर के जाने-माने पब्लिक स्कूल की पहली कक्षा का छात्र है वह स्वभाव से जितना सरल है, पढ़ाई-लिखाई में उतना ही तेज है उसके इसी स्वभाव के कारण दादी ही नहीं वरन पूरे परिवार का वह फेवरेट है । स्कूल में भी उसके इन्हीं गुणों के कारण काफी मान-जान है । स्कूल के सभी टीचर पुष्पेंद्र को बहुत मानते हैं ।

   परंतु स्कूल के नाम पर पुष्पेंद्र की अगर किसी से रूह कांपती थी तो वो थी, पुष्पेंद्र की गणित विषय की अध्यापिका संध्या मैडम, संध्या मैडम स्वभाव से काफी सख्त हैं । वह किसी प्रकार की अनुशासनहीनता या पढ़ाई-लिखाई में हिला हवाली पसंद नहीं करती छोटी से छोटी गलती के लिए वह बड़ी से बड़ी और कड़ी से कड़ी सजा बच्चों को दिया करती है । जिसके कारण उनके सामने जाने की अच्छे-अच्छे हिम्मत नही जुटा पाते ।
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  हालाँकि पुष्पेंद्र के पढ़ाई लिखाई मे अव्वल और अनुशासित होने के कारण, उन्होंने पुष्पेंद्र को कभी डाँटा तक नहीं सजा देना तो दूर की बात हैं ।

  एक दिन पुष्पेंद्र स्कूल से घर आते वक्त बारिश मे भीग जाता है । भीगने के कारण उसे काफी जोर का बुखार हो जाता है जिसके कारण वह अपना होमवर्क कंप्लीट नहीं कर पाता ।हालाँकि सुबह तक उसकी तबीयत ठीक हो जाती है परंतु वह स्कूल जाने से घबरा रहा है ।

   पुष्पेंद्र के माता-पिता काफी जागरूक हैं । वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं । वे नही चाहते कि उनके बच्चे एक दिन भी स्कूल मे गैर हाजिर हो ।

  विडंबना ऐसी की न तो वे पुष्पेंद्र की स्थिति को समझ पा रहें है और न ही पुष्पेंद्र उन्हें कुछ समझा पा रहा है । आखिरकार पुष्पेंद्र स्कूल चला जाता है । क्लास में दूसरी घंटी संध्या मैडम की है वह आते ही सबसे पहले बच्चों का होमवर्क चेक करती हैं । मगर आज पुष्पेंद्र ने तो होमवर्क भी नहीं किया । पुष्पेंद्र की ऐसी हरकत को देखकर वो बहुत नाराज होती हैं और उसे बाहर धूप में खड़े होने को कहती है । 

  धूप में खड़े-खड़े उसे चक्कर आने लगते हैं मगर संध्या मैडम बिल्कुल नहीं पिघलती । क्लास खत्म करके वे दूसरी क्लास में चली जाती हैं । वैसे तो स्कूल के सभी टीचर पुष्पेंद्र को वापस बुलाना चाहते हैं परंतु संध्या मैडम के डर से किसी मे भी ऐसा करने की हिम्मत ही नहीं हो रही है । लंच ब्रेक होता है परंतु खाना तो दूर पानी पीने की भी इजाजत पुष्पेंद्र को नहीं है ।

  धीरे-धीरे शाम हो जाती है और स्कूल की छुट्टी के साथ पुष्पेंद्र को भी सजा से छुट्टी मिल जाती है और वह घर चला आता है । शाम को जब माँ सब्जी लेने के लिए मार्केट जाने वाली होती है तभी उसे पता चलता है कि पुष्पेंद्र घर से गायब है वह घर में नहीं है । उसे आस पड़ोस हर जगह ढूंढा जाता है परंतु उसका कुछ पता नही चलता । माँ घबरा जाती है । वह पुष्पेंद्र की बड़ी बहन जो कि आठवीं कक्षा की छात्रा है । उससे पूछती है  
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"आखिर बिना बताए वह अकेले कहां गया होगा"

परन्तु उसके पास भी इन सवालो का जवाब नहीं है । थोड़ी देर में पुष्पेंद्र मुंह लटकाए घर वापस चला आता है ।  हमारी लेटेस्ट (नई) कहानियों को, Email मे प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें. It's Free !

"कहां गए थे?"

माँ उससे पूछती है मगर पुष्पेंद्र बिना कुछ बताए अपने कमरे में चला जाता है । 

  बाजार के लिए देर हो रही माँ भी मन मार कर सब्जी लेने चली जाती है तभी पुष्पेंद्र अपनी बड़ी बहन से एक गिलास पानी मांगता है और उस एक गिलास पानी को पीकर वह हमेशा-हमेशा के लिए सो जाता है । सब्जी लेकर माँ जब घर लौटती है तब कमरे में पुष्पेंद्र बेहोशी की हालत में पाया जाता है । सब उसे लेकर भागे-भागे अस्पताल पहुंचते हैं परंतु रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो जाती है । इस घटना से पुष्पेंद्र के माता-पिता के पैरों से जमीन खिसक जाती है । वे गला फाड़-फाड़कर रोने लगते हैं । इस घटना की सूचना मिलते ही दादी भी भागे-भागे गांव से वापस लौट आती है ।

  आखिर पुष्पेंद्र की मौत कैसे हुई ? यह सभी के लिए एक रहस्य है । पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि पुष्पेंद्र ने ढेर सारी पेन किलर एक साथ खा ली थी जिसके कारण उसकी मौत हो गई ।

  घर लौटने पर उन्हें पुष्पेंद्र का लिखा हुआ सुसाइड नोट मिलता है जिसमें उसने मैडम का जिक्र किया है और लिखा है 

"किसी को इतनी बड़ी सजा न दो कि ऐसा लगे जैसे सजा बड़ी है"

पुष्पेंद्र मे ज्यादा समझ तो नहीं थी मगर उसने अपनी टूटी फूटी भाषा में जो लिखा था वह हृदय को द्रवित करने के लिए काफी था ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 


इस कहानी से हमें तीन शिक्षा मिलती है

अपनों की मन की स्थिति को जाने उनसे संवाद स्थापित करें उनसे Friendly Relation बनाए  ताकि वो अपनी हर छोटी बड़ी परेशानी को आपसे Share करें और समय रहते उन्हे ऐसे गलत कदम उठाने से रोका जा सके !

बच्चों के सामने ऐसी कोई बात शेयर न करें जिसके इस्तेमाल से उनको हानि पहुंचाती हो !

गलती चाहे छोटी हो या बड़ी परंतु माफ कर देने वाला हमेशा बड़ा होता है परंतु यदि दण्ड देना आवश्यक है तो उसकी भी सीमा तय होनी चाहिए !

आज की competitive life में हर किसी को अपने बच्चों को आगे बढ़ाना है । अध्यापकों को भी स्कूल को ऊंचाई पर ले जाना है । मगर जरा सोचे कहीं आपके इस सनक में किसी के साथ कुछ गलत तो नहीं हो रहा सफलता जरूरी है मगर उसकी कीमत किसी को अपनी जान देकर न चुकानी पड़े ।

                             


   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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