07 September, 2018

आत्मनिर्भरता (स्वावलंबन) | Story And Essay On Self-Reliance In Hindi

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आत्मनिर्भरता या स्वावलंबन क्या है? अर्थ, कहानी, निबंध एवं विश्लेषण | महिलाओं की आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भर कैसे बने ? | story and essay on self-reliance in hindi

आत्मनिर्भरता क्या है, अर्थ, विश्लेषण | महिलाओं की आत्मनिर्भरता, कहानी


  मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली किंजल अपने छोटे भाई सुशांत से तकरीबन छः साल बड़ी थी । दोनों भाई बहन को अपने माता-पिता से समान स्नेह प्राप्त था । किंजल के पिता एक ठेकेदार के वहां काम किया करते थे ।

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  किंजल शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज थी किंजल की माँ उसके इन गुणों से काफी खुश रहा करती थी । उसे लगता था कि एक न एक दिन किंजल बड़ी होकर डॉक्टर बनेगी और माता-पिता का नाम रोशन करेगी 


  चूँकि कभी किंजल की माँ का भी सपना डॉक्टर बनने  का हुआ करता था जोकि किसी कारणवश पूरा नहीं हो सका था ।इसलिए वह किंजल के रूप में अपने सपने साकार होते देखना चाहती थी परंतु किंजल का मन पढ़ाई लिखाई में कम और साज सज्जा में ज्यादा था वह जब भी समय पाती तो माँ के कमरे के बड़े से शीशे के सामने खड़े होकर बालो को नए-नए डिजाइने बनाने और चेहरा चमकाने में लगी रहती ।


  सिर्फ इतना ही नहीं वह अपने पॉकेट खर्च से जुगाड़ करके । बाजार मे सुंदर बनाने वाले तमाम उत्पादो को खरीद कर घर ले आती और उनको इस्तेमाल करती  मानो उसे किसी मिस इंडिया कांटेस्ट में जाना हो ।

  वहीं उसकी माँ, उसके इन सब बातों से बहुत नाराज हुआ करती । वह जबभी किंजल को सजते-सवरते देखती तब वह उसपर बरस पड़ती, वह कहती

"महारानी इतना सज सवर के कहां जाने की तैयारी है, जाकर थोड़ी पढ़ाई कर लेती तो शायद जिन्दगी मे कुछ बन जाती.. मगर तुम्हें तो बस, चेहरा चमकाने को कह दो"

  हालांकि किंजल को अपने पिता से मिले घुंघराले बाल उसके माॅडल बनने मे एक बड़ी बाधा थे । तभी एक दिन उसे अपनी एक सहेली से बालों को सीधा करने वाली मशीन के बारे मे पता चला चूँकि मशीन काफी महंगी थी जिसका पॉकेट मनी के द्वारा जुगाड़ कर पाना नामुमकिन था ।

  परंतु किंजल मजबूत इरादों की लड़की थी उसने जो एक बार ठान लिया वह करके ही दम लेती थी । अपने इसी स्वभाव को चरितार्थ करते हुए एक दिन किंजल ने, न जाने कहां से जुगाड़ करके वह मशीन खरीद लाई । मशीन वाकई काफी बेहतरीन थी उसने किंजल के सारे घुंघराले बालों को बिल्कुल सीधा कर दिया ।
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  माँ ने जब किंजल से, उसके घुंगराले बालो के सीधा होने का राज जानना चाहा तब किंजल ने माँ को इधर-उधर की बातों में घुमा दिया परंतु सच कब तक छिपने वाला था ।

  एक दिन किंजल की माँ की नजर उसके पैरों पर पड़ी जो बिल्कुल सूने थे । उसके पैरों से पायल गायब थी । माँ द्वारा उन पायलों के बारे में पूछने पर किंजल चुप रही परंतु माँ के बढते गुस्से के आगे किंजल को सच बताना ही पड़ा

  किंजल ने माँ को बताया कि उसने बाल सीधे करने वाली मशीन खरीदने के लिए अपनी पायल को सुनार के वहां गिरवी रख दिया है ऐसा सुनते ही माँ ने किंजल के गालों पर तड़ा-तड़ दो चांटे जड़ दिए जब इस बात का पता किंजल के पिता को चला तो उन्होंने उसकी माँ को बहुत डांटा और उल्टे पांव सुनार के दुकान पर जाकर किंजल की पायल को छुड़ा लाएं ।

  किंजल अब बहुत खुश रहा करती थी वह रोज कॉलेज में नई नई हेयर स्टाइल बना कर जाया करती थी आस पड़ोस में सब उसके स्टाइलिश लुक की तारीफ करते । अब किंजल किसी बड़े पर्दे की ना सही परंतु मोहल्ले की हीरोइन जरूर बन चुकी थी । अब तो उसकी सहेलियां भी पार्टियों में जाने के लिए उसी से अपना मेकअप करवाती और अपनी हेयर स्टाइल बनवाती । 

  तभी एक दिन किंजल के हंसते-खेलते जीवन में भूचाल आ गया और अकस्मात उसके पिता का निधन हो गया किंजल और उसका परिवार बहुत सदमे में आ गया धीरे-धीरे इस हादसे को कई महीने गुजरे गए । घर अब आर्थिक तंगी से गुजर रहा था ।

  चूँकि किंजल की माँ कुछ ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी इसलिए उन्हें नौकरी मिलना मुश्किल था वहीं सुशांत अभी छोटा था लिहाजा उससे कोई उम्मीद करना बेकार था । तभी एक दिन किंजल की माँ को ठेकेदार ने अपने यहां झाड़ू पोछा का करने का प्रस्ताव रखा किंजल की माँ ने इसे सहस्त्र स्वीकार कर लिया ।

  अगले दिन जब माँ झाड़ू पोछा के लिए घर से फटे पुराने कपड़ों को पहनकर जाने लगी तब किंजल ने उसका हाथ पकड़ लिया । अपनी माँ के गालों पर हाथ रखते हुए कहा उसने कहा 
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"मत जाओ माँ कुछ दिन और थोड़ा इंतजार कर लो तुम्हें यह सब करने की कोई जरूरत नहीं है मैं जल्द ही कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लूंगी"

  किंजल की माँ की आंखों में आंसू की धार बह रही थी शायद उसने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा, उसे दूसरे के घरों में झाड़ू पोछा करने की नौबत आ जाएगी । माँ को दिलासा देते हुए वह घर से चुपचाप निकल गई । माँ की अब सारी उम्मीदें किंजल पर टिकी थी ।

  आज किंजल का एक नया रूप देखने को मिला, वह मिस यूनिवर्स के स्वरूप से बाहर निकलकर लक्ष्मी बाई बन चुकी थी । अब किंजल रोज सुबह घर से  निकल जाती और देर शाम तक घर आती । जब माँ इस बारे में उससे पूछती तब वह इसकी वजह अपनी एक्स्ट्रा क्लासेस बताती ।

  धीरे-धीरे तकरीबन एक महीना बीतने को था माँ समझ नहीं पा रही थी कि वह किंजल पर भरोसा करके रुके या आगे बढ़े । कहीं ऐसा न हो कि बड़ी मुश्किल से मिली यह छोटी सी नौकरी भी हाथ से निकल जाए ।

  एकदिन शाम को किंजल मुस्कुराते हुए माँ के पास आई और तखत पर बैठी माँ से अपनी आंखें बंद करने को कहा, माँ के आंखें बंद करते ही उसने माँ की गोद में एक लिफाफा रखा ।

  माँ ने जब वह लिफाफा खोला तो उसमें ₹3000 थे । असल मे किंजल ने शहर के एक ब्यूटी पार्लर  में नौकरी कर ली थी और यह उसकी पहले महीने की पगार थी । कल तक किंजल की माँ किंजल के जिन गुणों को अवगुण समझकर उन्हें अक्सर दबाने की कोशिश करती रही । आज उसके वही गुण उनके काम आ रहे थे ।

  किंजल की माँ ने समझ लिया था कि किताबी ज्ञान ही सब कुछ नहीं है अपने बच्चों की नेचुरल टैलेंट को रोकने की बजाय उसे और ज्यादा प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है । धीरे-धीरे किंजल ने अपने घर में ही ब्यूटीशियन का कार्य करना शुरू कर दिया ।

  उसका काम इतना बेहतरीन था जिससे प्रभावित होकर दिन-प्रतिदिन उसके दुकान पर लोगों की भीड़ बढती गई जिसके भरोसे वह अपने अपने पिता की सारी जिम्मेदारियों को निभाने में कामयाब रही ।


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कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 


पढ़ाई लिखाई में बच्चों को बेहतर बनाना आज के युग मे बिल्कुल सही और Important भी है परंतु उनकी अंदर छुपी प्रतिभा को दबाना किसी भी लिहाज से सही नहीं हैं अच्छा होगा कि हम अपने बच्चों के अंदर छुपी नेचुरल प्रतिभा को आगे बढ़ाने का काम करें उसके लिए उन्हें प्रोत्साहित करें, उनका मार्गदर्शन करें । हो सकता है कि उनकी यही नेचुरल टैलेंट एक दिन उनके उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें ।

स्वयं पर विश्वास करके, स्वयं के प्रयासों से जीवन मे आगे बढ़ने को ही आत्मनिर्भरता कहते है अर्थात आत्मनिर्भरता आत्म यानी स्वयं मे ही निहित है । इस कहानी से सीख लेकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए ।

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Writer 
  Karan "GirijaNandan"
 With  

                             

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