बच्चों के आने की खबर ने ही गौरैया को प्रसन्नचित्त कर दिया कर दिया । गौरैया ने बच्चों के आगमन से पूर्व ही अपने अथक परिश्रम के द्वारा उनके लिए एक मजबूत और बड़ा घोंसला बनाकर तैयार कर लिया । कुछ ही दिनों में गौरैया का आंगन बच्चों की किलकारियां से गूंज उठा । बच्चों को पाकर गौरैया बहुत खुश थी परंतु कुछ दिनों बाद गौरैया की छोटी बच्ची ने उससे कहा
"मां ये घोंसला कितना छोटा है इसमें तो हम ठीक से सो भी नहीं सकते । काश ये घोंसला थोड़ा बड़ा होता तो कितना अच्छा होता"

गौरैया वक्त के साथ बच्चो की बढ़ती जरूरतो को भलीभांति समझती थी लिहाजा उसने दिन रात मेहनत करके । अपने घोंसले को पहले से थोड़ा और बड़ा बना दिया ।

नन्हीं गौरैया, पहले से बड़े घोंसले को पाकर बहुत खुश है । वह बहुत दिनो बाद, काफी सुकून की नींद सोती है ।

परंतु एक दिन जब नन्हीं गौरैया अपने घोंसले में बड़ी ही उदास और गुमसुम बैठी है, तब मां उससे पूछती है

"क्या हुआ बेटा तुम इतनी उदास क्यों हो"

तब नन्हीं गौरैया ने मां से कहा

"मां ये घोंसला कितना छोटा है । इसमें तो मैं ठीक से खेल भी नहीं सकती । यदि ये घोंसला थोड़ा बड़ा होता तो कितना अच्छा होता है"

मां बच्ची की भावनाओ को समझते हुए,  थोड़े और परिश्रम के द्वारा घोंसले को पहले से थोड़ा और बड़ा कर दिया ।

नन्हीं गौरैया बड़े घोसले को पाकर बहुत खुश है वह उसमें खूब सारी मस्ती कर रही है ।
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परंतु उसकी यह खुशी इस बार भी ज्यादा दिन तक टिक न सकी । एक दिन वह  नीचे सर गड़ाए, अपने घोंसले के एक कोने में शान्त बैठी थी

चंचल स्वभाव वाली गौरैया को ऐसे हाल मे देख, मां को रहा नहीं गया । उसने एक बार फिर नन्हीं गौरैया से पूछा

"क्या हुआ मेरी प्यारी बच्ची कोई बात है क्या"

"मां ये घोसला कितना छोटा है इसमें तो मैं अपने दोस्तों को बुला भी नहीं सकती । काश से घोंसला थोड़ा बड़ा होता"

मां बड़ी हो रही बच्ची की, बढ़ती जरूरतों को भली-भांति समझ रही थी इसलिए उसने एक बार फिर दिन रात पसीना बहाकर पहले से काफी बढ़ा घोसला तैयार कर दिया ।

नन्हीं गौरैया पहले से काफी बड़े घोसले को पाकर काफी खुश हुई । उसने अपने सभी दोस्तों को घोंसले में आमंत्रित किया । उनके आने पर नन्हीं गौरैया ने उनके साथ वहां खूब मस्ती की । 
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वैसे तो गौरैया ने बच्चों के आगमन से पूर्व ही, घोसले को काफी देखभाल कर सही जगह और काफी मजबूत बनाया था परंतु ईश्वर के आगे भला किसकी चली है । एक दिन जब गौरैया और उसके बच्चे चैन की नींद सो रहे थे तभी न जाने कहां से बहुत जोर का आंधी-तूफान शुरू हो गया । गौरैया और उसके बच्चे डर गए । कुछ ही मिनटों में उनका बसा बसाया आशियाना टूट कर बिखर गया ।

परिणास्वरूप गौरैया एवं उसके बच्चे पूरी रात बारिश में भीगते रहे । जमीन पर बिखरे अपने घोसले के अनुसार अवशेष को देखकर, नन्हीं गौरैया बहुत मायूस हो जाती है, वही उसकी मां उसके दुख को भलीभांति समझ रही है । सुबह, बारिश रुकते ही, गौरैया और उसके बच्चों ने जी तोड़ मेहनत के द्वारा शाम ढलने से पहले ही एक छोटा सा घोसला बनाकर तैयार कर लिया ।

पूरी रात भीगकर गुजारने और फिर सारा दिन पसीना बहाने के बाद बनाए इस नए घोसले में गौरैया उसके बच्चे काफी चैन की नींद सोए ।

सुबह की पहली किरण के साथ ही नन्हीं गौरैया जग जाती है । वह अपने छोटे से घोसले को पूरे मन से सजाने संवारने में लग जाती है, जिसके बाद वह अपनी बड़ी बहन के साथ खूब मस्ती करती है । शाम होने पर उसके दोस्त जब उसका हालचाल लेने उसके घर पहुंचते हैं, तब नन्हीं गौरैया बड़े प्यार से उन्हें अपने इस छोटे से घोसले में आमंत्रित करती है । वे सब वहां काफी देर तक मौज मस्ती करते हैं ।
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कहानी से शिक्षा | Moral Of This Short Inspirational Story In Hindi


  दोस्तों, एक से दो, दो से चार, चार से दस चाहे कितने भी ऊँची इमारत कोई क्यूँ न बनवा ले परंतु जगह की कमी हमेशा रहेगी है अर्थात आवश्यकताओं का अंत कभी नहीं हो सकता इसीलिए बेहतर है कि आपके पास जो है और जितना है उसमें संतुष्ट रहने की कोशिश करें, उसी में जीना सीख लीजिए क्योंकि जिंदगी में कहीं न कहीं हम सबको एडजेस्ट करना ही पड़ता है जो समय के साथ समझौता कर लेते हैं उनकी जिंदगी में खुशियां ही खुशियां होती हैं अन्यथा ऐसे लोग हमेशा खुद व दूसरों से नाखुश ही नजर आते हैं !



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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  

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