बेड पर पड़ी एक छोटी सी रस्सी के एक सिरे से, अपने छ: माह के नन्हें बेटे, कान्हा के दाहिने पैर को, व दूसरे सिरे को बेड से बांध काव्या किचन का काम निपटाने निकल पड़ती है । मां के जाते ही कान्हा की आंख खुल जाती है । वह बिस्तर पर लेटे-लेटे अपने बाएं पैर का अंगूठा चूसने लगता है अंगूठा वह कुछ ऐसे चूस रहा है मानो वह उसका अंगूठा न होकर उसकी फेवरेट लॉलीपॉप हो ।

 तभी उसकी निगाह बेड की दूसरे छोर पर पड़े झुंझुने पर पड़ती है । वह झुंझुने को पाने के लिए बिस्तर पर सरकता हुआ सरपट आगे की ओर बढता है परंतु थोड़ा आगे बढ़ते ही कान्हा के नन्हें पैरों में बंधी रस्सी, तनकर उसे रोक देती है । मासूम कान्हा तपाक से यू टर्न लेते हुए पीछे घूमता है । तब उसे अपने पैरों में बंधी रस्सी दिखाई देती हैं । थोड़ी देर रस्सी को निहारने के बाद कान्हा फिर सीधा हो जाता है और झुंझुने  के पास पहुंचने में अपना पूरा जोर लगा देता है ।

 परंतु वह जितना ज्यादा आगे बढ़ने की कोशिश करता है, उतना ही ज्यादा रस्सी में बंधे उसके कोमल पैर खींचकर लाल होने लगते हैं । उसमें भारी दर्द होने लगता है । भारी पीड़ा से कान्हा चीखने चिल्लाने लगता है । उसकी आवाज सुनकर किचन में काम कर रही काव्या भागे-भागे उसके पास आती है ।

 परंतु मासूम कान्हा की हरकतों को देखकर वह जोर जोर से हंसने लगती है एक तरफ जहां कान्हा रस्सी में कस रहे पैर से उठे दर्द के कारण चीख रहा है वहीं दूसरी तरफ वह झुनझुना पाने की लालसा में आगे बढ़ने की लगातार कोशिश भी कर रहा है ।

 बड़ी ही अजीब सी स्थिति है । यदि कान्हा उस झुनझुने को पाने की लालसा छोड़ दे तो उसे उसी वक्त सारी तकलीफो से मुक्ति मिल सकता है परंतु उसकी इच्छा ही उसके दर्द का कारण बनती जा रहा है ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This  Short Motivational Story In Hindi


 दोस्तों आपने भी बच्चों की ऐसी मासूम हरकतें कभी न कभी जरूर देखी होंगी और उन्हें देखकर आपके चेहरे पर भी मुस्कुराहट जरूर आई होगी परन्तु दोस्तों ऐसी बचकानी हरकतें सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि हम बड़े भी कर रहे हैं । अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए हम अपने जीवन में तमाम तकलीफों और परेशानियाें को स्वयं उत्पन्न कर लेते हैं ।

 यदि हम ऐसी इच्छाओं को त्याग दें जो हमारे जीवन में तकलीफों की वजह बन रही हैं तो निश्चित रूप से हम अपने वर्तमान को सुखमय बना सकते हैं । अब ये मर्जी आपकी है कि आप झुंझुने (अपनी इच्छाओं) के लिए खुद को तकलीफ पहुंचाते हैं या झुंझुने को भूल कर जिन्दगी में मौजूद खुशियों के साथ जिंदगी का मजा लेते हैं।


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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
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