खुशहालपुर गांव में जहां हर तरफ बस खुशियां ही खुशियां बिखरी हुई हैं ‌। वहीं गांव में रहने वाला दुखिया गांव का एकमात्र दुखी इंसान है । हालांकि उसका दुखी होना भी बिल्कुल वाजिब है क्योंकि उसके पास रहने के लिए न सर पर छत है, ना ही पहने के लिए दो जोड़ी कपड़े और ना ही पेट भरने के लिए अन्न है। इतना ही नहीं, अत्यधिक कुरूप होने के कारण उसका अभी तक ब्याह भी नहीं हो सका है, जिसके नाते वह दुनिया में बिल्कुल अकेला है । दुखिया अपने इस जीवन के लिए ईश्वर को बार-बार कोसता है, वह कहता 

न जाने मैंने पिछले जन्म में ऐसा कौन सा पाप किया था कि जिसके नाते तुमने, मुझे ऐसा नारकीय जीवन दिया जिसे जीने से तो अच्छा होता है कि मैं मर जाता

हालांकि, गांव के बुद्धिजीवी लोग दुखिया को बहुत समझाते परंतु उनकी बातों का उस पर कोई असर नहीं पड़ता जिसके कारण वह अपने दुखो से कभी उबर नही सका ।

एक बार जब दुखिया जमीन पर पुआल बिछाए सो रहा था तभी अचानक मध्यरात्रि में दुखिया को किसी ने आवाज लगाई । दुखिया जग गया और घबरा कर इधर-उधर देखने लगा तभी उसे सितारों से जगमगाती चांदनी रात में किसी के पास होने का आभास हुआ । दुखिया ने जब चौक कर उसे देखा तो वो कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान थें ।

भगवान को अपने सामने पाकर दुखिया खुद को रोक नहीं सका और प्रभु के चरणों में अपना सिर झुकाए फुट-फुट कर रोने लगा । वह  भगवान से कहता है

हे प्रभु मुझे आपने यह कैसा नारकीय जीवन दिया है इससे तो अच्छा होता कि आप मुझे इस दुनिया में लाए ही ना होते मैं और अब यहां जीना नहीं चाहता । कृपया मुझे अपने साथ ले चलें

जब भगवान उससे, उसके दुखों का कारण पूछते हैं तब दुखिया कहता है

हे प्रभु जिस जीवन में ना तो धन है, ना स्त्री का साथ है और ना ही सुंदर स्वरूप है ऐसा जीवन भला किस काम का । मैं ऐसा जीवन नहीं चाहता । कृपया मुझे इस जीवन से मुक्त करें और अपने साथ ले चलें

दुखिया की बातों को सुनकर भगवान मुस्कुराते हैं और कहते हैं 

"यदि ऐसा है तो तुम्हें वह सब कुछ मिलेगा जैसा तुम चाहते हो"

ऐसा कह कह कर भगवान अदृश्य हो जाते हैं । भगवान को सामने ना पाकर दुखिया एक बार फिर दुखी हो जाता है ।

अगले दिन जब दुखिया की आंख खुलती है तब वह खुद को, एक महलों सदृश्य भवन में पाता है । उसके शरीर पर कीमती वस्त्र एवं आभूषण हैं और इतना ही नहीं वह मखमल के जिस बिस्तर पर लेटे हुए हैं उसके चारों तरफ अप्सरा सी सुंदर स्त्रियां, अपने हाथों में मिष्ठानो एवं पकवानों से भरी थालियां लिए उसका अभिवादन कर रहीं हैं । यह सब देख दुखिया को भगवान के द्वारा कहीं बातें याद आती है । 

वह बहुत खुश होता है परंतु जैसे ही वह अपना प्रिय मिष्ठान उठाकर मुंह में डालने की कोशिश करता है तभी अचानक उसे अपने सामने एक भीमकाय राक्षस दिखाई देता है जिसे देखकर वह काफी घबरा जाता है और बचाओ-बचाओ की आवाज लगाते हुए उल्टे पांव महल से बाहर भागने लगता परंतु राक्षस उसका पीछा नहीं छोड़ता । 

जान बचाकर भाग रहा दुखिया बार-बार ऊपर आसमान में देखता और ईश्वर को मदद के लिए पुकारता है किन्तु तभी अचानक उसका पैर फिसल जाता है और वह एक बहुत बड़े गड्ढे में जा गिरता है ।

दुखिया जब तक गड्ढे से बाहर निकलता तब तक राक्षस उसके बिल्कुल समीप पहुंच जाता है । यह देख दुखिया बहुत घबरा जाता है और उससे अपनी जीवन की भीख मांगने लगता है परंतु राक्षस उसे निगलने के लिए व्याकुल हो रहा है । तब दुखिया उससे कहता है 

मुझे मत मारो, मैं मरना नही चाहता, मैं जीना चाहता हूं । मैं तुम्हें अपना सबकुछ देने को तैयार हूं परंतु तुम मेरे प्राण बक्श दो

राक्षस "अच्छा ऐसा है तब फिर ठीक है"

इस प्रकार दुखिया के प्राण तो बच जाते हैं परंतु वह एकबार फिर खुद को उन्हीं फटे पुराने कपड़ों में पाता है । उसका महल सदृश्य भवन कहीं गायब हो गया है और वह फिर पहले जैसा कुरूप हो गया है परंतु अपने जीवन को पुनः प्राप्त करके वह बहुत खुश है ।

तभी दुखिया की आंख खुल जाती है और वह नींद   जग जाता है । उसे जीवन का मूल्य समझ में आ गया है जो किसी स्त्री, धन, वैभव और सुन्दर काया से कहीं ऊपर है । वह एक चैन की सांस लेता है और इस अनमोल जीवन के लिए हाथ जोड़ेकर ईश्वर को धन्यवाद करता है ।

मनुष्य जीवन अमूल्य है! दुखिया की प्रेरणादायक कहानी से शिक्षा

दोस्तों आप जिस धन, स्त्री व सुंदर काया के पीछे अपने जीवन को नोटबुक के अंतिम पेज यानी रफ की तरह यूज कर रहे हैं । वह जीवन इन सबसे कहीं ऊपर है । यह जीवन अनमोल है इसे बेफिजूल में जाया मत करें ।

यहां बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने किसी सपने के पीछे अपने जीवन का मूल्य ही भुला बैठे हैं । वह सपना ऊंचे भवन, अच्छी नौकरी या फिर एक सुन्दर स्त्री का हो सकता है । अपने इन्हीं सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद में उन्होंने हाइपरटेंशन, डायबिटीज और जाने कितनी बीमारियों को अपने पास बुला लिया है यद्यपि सपनों के पीछे भागना, उन सपनों के लिए जीना अच्छा है मगर उसके पीछे इतना पागल मत बनिए की अपने इस अनमोल जीवन को गाड़ी के पिछले छक्के की भांति घिसते चले जाइए ।

 अपने सपनों के लिए जीने के साथ-साथ वर्तमान में आपके पास जो है और जितना भी है उसी में खुश रहने की कोशिश करें जिंदगी के हर एक पल का मजा ले । खुद को भी थोड़ा वक्त दें क्योंकि दोस्तों धन-संपत्ति, अच्छा जीवनसाथी, जीवन को अच्छा बनाने के लिए है ना कि उसके पीछे अपने जीवन को मिटा देने के लिए है ।

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  Karan "GirijaNandan"
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