संगीत के सात सुर, जिन्हें सरगम के सात सुरों के नाम से भी जाना जाता है जो इस प्रकार हैं, सा, रे, ग, म, प, ध और नि, में छुपा हुआ है सफलता का मंत्र| success tips

सरगम के सात सुरों सारेगामा में है सफलता का मंत्र

दोस्तों संगीत के साथ सात सुर, जिन्हें सरगम के सात सुरों के नाम से भी जाना जाता है जो इस प्रकार हैं, सा, रे, ग, म, प, ध और नि, से आप भली-भांति परिचित होंगे परंतु क्या आप इन सात सुरों के बारे में एक दिलचस्प बात जानते हैं । दोस्तों संगीत के इन सात सुरों में छुपा हुआ है सफलता का मंत्र, वह कैसे ? चलिए आइए जानते हैं । शुरुआत करते हैं सरगम के प्रथम सुर यानी 'स' से

#स - सकारात्मकता


दोस्तों मुझे कुश्ती देखने का बहुत शौक था । शिवरात्रि के मौके पर गांव में हर साल दंगल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ करता था । एक बार की बात है मैं सभी गांव वालों के साथ प्रतियोगिता देखने मेले में पहुंचा किंतु प्रतियोगिता शुरू होने में अभी समय था काफी इंतजार के बाद प्रतियोगिता का आरंभ हुआ परंतु हम सब उस समय आश्चर्यचकित रह गए जब हमारे पहलवान का सामना एक ऐसे पहलवान से हुआ जो उससे कद काठी में दोगुना था लिहाजा परिणाम यह हुआ कि

  • कुश्ती शुरू होने से पहले ही बहुत से गांव वाले अपने पहलवान को हारा हुआ मानकर, घर की तरफ चलते बने ।
  • बचे हुए लोगों में से कुछ गांव वाले ये सोचकर प्रतियोगिता देखने बैठ गए कि कम से कम यहाँ आने में लगा किराया ही वसूल हो जाए ।
  • परंतु प्रतियोगिता देख रहे हैं कुछ गांव वाले ऐसे भी थे जिन्हें प्रतियोगिता के हार जीत से कोई लेना-देना नहीं था बल्कि उनका मकसद अपने गांव की तरफ से लड़ रहे पहलवान का अंतिम क्षण तक साथ निभाना एवं उसका हौसला बढ़ाना था ।
  • वहां बहुत कम दर्शक ऐसे थे जो पहलवान की जीत का भरोसा लिए मैच देख रहे थे ।


दोस्तों यदि इस दृश्य को एक बार उलट कर देखा जाए अर्थात यदि हमारा पहलवान, अपने प्रतिद्वंदी से दोगुने कद काठी का होता तो निश्चित रूप से गांव का कोई भी व्यक्ति उल्टे पांव, गांव वापस जाने की बजाए, चटकारा ले लेकर मैच का लुफ्त उठाता । मैच देख रहे लोगों का उत्साह भी देखते ही बनता । शायद पूरा हुजूम अपने पहलवान की जीत से आश्वस्त होकर उसके हौसला अफजाई मे नारे भी लगाता ।

दोस्तों इस छोटी सी घटना के माध्यम से मैं सिर्फ आपको यह समझाना चाहता हूं कि जब हमें अपनी जीत का विश्वास हो जाता है तो हम जीतने के लिए अपना बेस्ट करते हैं परंतु जब हमें जीत का विश्वास लगभग शून्य होता है तब ऐसी स्थिति में हम कोशिश करने से पहले ही या तो हार मान लेते हैं या आधे अधूरे मन से ही प्रयास करते हैं ।

अब जरा सोचिए आप किसी भारी वस्तु को अपनी पूरी ताकत से आगे धकेलने की कोशिश करते हैं उस स्थिति में उस वस्तु के अपनी जगह से खिसकने की कितनी संभावना है परंतु वहीं एक दूसरे सिचुएशन में जहां ऐसी धारणा के साथ कि "वह वस्तु हमसे नहीं खिसकने वाली" आधा-अधूरा एवं हल्का-फुल्का प्रयास किया जाए तब ऐसी स्थिति में उस वस्तु के अपने स्थान से परिवर्तित होने की कितनी संभावना होगी ।

दोस्तों अपना नजरिया सकारात्मक कर लेने मात्र से गोल अचीव नहीं हो जाता परंतु इतना जरूर है कि आप उस गोल को अचीव करने के लिए अपना बेस्ट लगाते हो । अब जो कोशिश अच्छी होगी तो निश्चित रूप से सक्सेस होने के चांसेस से भी ज्यादा बनेंगे, सो बी पॉजिटिव, सकारात्मक रहें और तब तक रहें जब तक आप गोल अचीव न कल ले ।

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#र - रणनीति


दोस्तों रणनीति पर बात करने से पहले मैं आपको अपना एक कटु अनुभव शेयर करना चाहुंगा मुझे आज भी याद है वो दिन जब मेरे दोस्त को दिल्ली के एक आईटी कंपनी में एग्जीक्यूटिव मैनेजर के पद पर इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर आया था । लेटर मिलते ही मेरे दोस्त ने इंटरव्यू के लिए जबरदस्त तैयारियां शुरू कर दी परंतु एक दिन रात तकरीबन 10:00 बजे मेरे दोस्त का फोन आया । वह थोड़ा घबराया हुआ था । उसने मुझे बताया कि दिल्ली जाने के लिए उसे रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है ऐसे में उसे अब क्या करना चाहिए ।

उसकी मुर्खता पर पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया परंतु मैंने खुद को शान्त किया और उससे कहा

"दोस्त अब तो बहुत देर हो चुकी है इंटरव्यू में सिर्फ तीन दिन बचे हैं । इतने कम समय में रिजर्वेशन मिल पाना मुश्किल है तुम क्यों नहीं बाई फ्लाइट जाने की सोचते"

परंतु यह मेरे दोस्त के बजट में नहीं था इसलिए मजबूरन हमन जनरल बोगी में बैठकर दिल्ली जाने का निश्चय किया परन्तु जनरल बोगी की खचाखच भीड़ ने हमको बिल्कुल थका कर रख दिया । हालांकि हम सुबह के 10 बजते-बजते दिल्ली पहुंच गए परंतु दिल्ली पहुंचने पर हमें एक और चौंकाने वाली बात पता चली, असल में कंपनी का ऑफिस स्टेशन से काफी दूर था ।

एक अनजान शहर में पता पूछते पूछते हम किसी तरह से कंपनी के ऑफिस पहुंचे परंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इंटरव्यू के लिए आए सभी लड़को को हॉल में प्रवेश मिल चुका था और अब किसी का अंदर जाना अलाउ नही था । परिणामस्वरूप हमें उल्टे पांव घर वापस लौटना पड़ा ।

दोस्तों सच पूछो तो मेरे दोस्त को कॉल लेटर मिलने के तुरंत बाद उसे दिल्ली तक का रिजर्वेशन करा लेना था और इसके साथ-साथ स्वयं या किसी को भेजकर स्टेशन से आईटी कंपनी के ऑफिस के रास्तों की जानकारी भी ठीक प्रकार से कर लेनी चाहिए थी यदि यह सारे काम उसने पहले ही निपटा लिए होते तो निश्चित रूप से उसे निराशा का सामना नहीं करना पड़ता ।

दोस्तों इस छोटी सी घटना से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है । दोस्तों अपने टारगेट को 100% अचीव करने के लिए एक अच्छी रणनीति का होना बेहद आवश्यक है । यदि आपके पास एक मुकम्मल रणनीति नहीं होगी तो आप हार्ड वर्क करने के बाद भी सफलता के शीर्ष पर नहीं पहुंच सकते इसलिए मेरे दोस्तों आपने, अपने लिए जो भी गोल तय किया है उसके लिए एक अच्छी रणनीति जरूर बनाएं और उसे समय-समय पर अपडेट करते हैं रहे ।

#ग - गलतियों से सीखना


दोस्तों मैंने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना है कि यदि उन्होंने फला फला गलतियां नहीं की होती तो आज वे सक्सेसफुल होते परंतु सवाल ये उठता है कि गलतियां किससे नहीं होती ? शायद सभी से होती है परंतु यहां एक और सवाल जन्म लेता है कि यदि गलतियां सबसे होती हैं तो फिर वे दो लोग जिनमें दोनों से ही गलतियां होती हैं परंतु एक सक्सेसफुल होता है वहीं दूसरा ऐसा नहीं कर पाता, ऐसा क्यों ? क्योंकि दोस्तों सक्सेस पाने वाला व्यक्ति गलतियों से सीखता है और उसे दोहराने से बचता है ।

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दोस्तों यदि आप से गलतियां हो रही हैं तो उससे घबराने या उससे मायूस होने की जरूरत नही है यदि जरूरत है तो उनसे सीखने की, गलतियों से सीखते जाइए और उसे दोहराने से बचिए ऐसा करके आप निश्चित रूप से अपना गोल अचीव करने में सफलता पाएंगे ।

#म - मंजिल


मुझे आज भी याद है, इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद करियर के ढेर सारे विकल्पों में से हमें किसी एक विकल्प का चुनाव करना था और यह बेहद कठिन था मेरे कई सारे दोस्त एमबीए करने की सोच रहे थे और मुझे भी ऐसा करने की सलाह दे रहे थे । वहीं कुछ लोग दूसरे अन्य कोर्सो में जाना चाहते थे और मुझे भी ऐसा करने के लिए फोर्स कर रहे थे । वहीं दूसरी तरफ मेरे घरवाले मुझे परंपरागत तरीके से आगे बढ़ने की सलाह दे रहे या यूं कहें कि यह उनका फरमान था ऐसे में अपना गोल निश्चित कर पाना मेरे लिए बेहद मुश्किल हो रहा था और शायद इस बारे में, मैं खुद भी ज्यादा कॉन्फिडेंट नहीं था कि मेरे लिए कौन सा विकल्प सबसे उपयुक्त रहेगा ।

दोस्तों यह मानी हुई बात है कि ईश्वर ने हर किसी में स्पेशल टैलेंट दे रखा है जिसे गॉड गिफ्ट भी कहते हैं परंतु कभी-कभी हम पहचान नहीं पाते ।

 मंजिल यानी आपका लक्ष्य आपका गोल, लाइफ का सबसे अहम पार्ट है क्योंकि इस पर हमारा पूरा भविष्य निर्भर करता है इसीलिए अपना गोल निर्धारित करने से पहले भली-भांति विचार कर लें । इसमें किसी भी प्रकार की कोई जल्दबाजी ना करें । दूसरों के विचारों को खुद पर ना थोपें ।

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अपनी रुचि और अपनी क्षमताओं के हिसाब से सोच समझकर अपना गोल निर्धारित करें क्योंकि जब आप अपनी रुचि के हिसाब से अपना गोल तय करते हैं तो निश्चित रूप से उसमें सफलता के चांसेस 10 परसेंट ज्यादा होते हैं । अपने इंटरेस्ट के विपरीत गोल को हासिल कर लेने के बाद भी अक्सर लोगों को सेटिस्फेक्शन नहीं मिलता । वही यदि आप अपनी क्षमताओं से अलग गोल का चुनाव कर लेते हैं तो कई बार ऐसे गोल को हासिल कर पाना बहुत मुश्किल होता है ।

#प - परिश्रम


दोस्तों हिमालय के टॉप पर पहुंचने के लिए आप चाहे जो भी रास्ता इख्तियार कर ले परंतु सच यही है कि सफल होने के लिए आपको भी उन्ही चुनौतियों एवं कठिनाइयों का सामना करना पrtड़ेगा जो दूसरे लोग करते आए हैं कुछ इसी प्रकार सिर्फ 10 सवालों के जवाब याद करके परीक्षा में औसत अंक हासिल किए जा सकते हैं परंतु टॉप पर पहुंचने के लिए । आपको सभी टॉपिक कवर करने होंगे । यानी हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है । यदि आप सक्सेस पाना चाहते हैं तो शॉर्टकट से इतर हार्ड वर्क करना शुरू कर दें क्योंकि आपका कठोर परिश्रम ही आपको सक्सेस दिला सकता ।

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#ध - धैर्य


दोस्तों सफलता कोई दो-एक दिन में मिल जाने वाली वस्तु नहीं है । इसमें समय लग सकता है । खास करके तब जब आपका गोल बड़ा हो ऐसी स्थिति में समय लगना स्वाभाविक है ।

कई बार हम अपना गोल अचीव करने के लिए जो टाइम पीरियड निर्धारित करते हैं उस तय समय में सफलता न मिल पाने की स्थिति में अक्सर मायूस हो जाते हैं और अपना आत्मविश्वास खो बैठते हैं । यहां तक कि कुछ लोग तो अपना गोल ही बदलने का निश्चय कर लेते हैं परंतु ऐसा ना करें धैर्य बनाए रखें क्योंकि यदि वक्त लग रहा है तो आपका अनुभव भी बढ़ रहा है और यह अनुभव बेकार नही जाएगा । आपका बढता हुआ अनुभव निश्चित रूप से आपकी सफलता को पुख्ता करेगा ।

#न - निरंतरता


दोस्तों सक्सेस के लिए स्कील का डिवेलप होना बहुत जरूरी है और स्किल डेवलपमेंट के लिए रेगुलर्टी यानी निरंतरता बहुत आवश्यक है । यदि कोई एथलीट, किसी दिन अभ्यास के दौरान अपना हंड्रेड परसेंट देता है और इसप्रकार वह अपनी क्षमताओ के मुताबिक मैक्सिमम दूरी तय करता है परंतु अगले कुछ दिनों तक वह या तो अभ्यास के लिए घर से निकलता ही नहीं है या वह अभ्यास के दौरान हिला हवाली करता है । ऐसे हालात में उस एथलीट में स्कील डेवलपमेंट नहीं हो सकता और इसलिए वह कभी भी बड़ी सफलता प्राप्त नही कर सकता है ।

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दोस्तों यदि आपको सफलता चाहिए तो आपको अपनी स्कील डिवेलप करनी होगी जिसके लिए आपको रेगुलर होना पड़ेगा । सक्सेस इस बात पर डिपेंड नही करती कि आप कितने घंटे काम करते हैं बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि आप रोजाना अपने काम को मिनिमम कितना टाइम देते हैं । वह समय 8,12 या 18 घंटे भी हो सकते हैं ।  सो प्लीज आज से रेगुलर हो जाएं ।

आखिरी शब्द:

दोस्तों यकीन माने संगीत के इन सात सुरों में छुपे सफलता के मंत्र को यदि आप अपने जीवन में अक्षरसः उतारेंगे तो निश्चित रूप से सफलता आपको हर हाल में प्राप्त होगी ।



   Writer
  Karan "GirijaNandan"
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