गुरु की कहानी | जो नहीं है उसे भूलकर जो है उसमें जीना सीखें

गुरु की प्रेरणादायक कहानी | जो नहीं है उसे भूलकर जो है उसमें जीना सीखें | short motivational teacher story in hindi | गुरु को हुआ अपनी भूल का एहसास

Short Motivational Teacher Story in Hindi


निर्धन परिवार में जन्मे शोभित ने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद आस-पड़ोस के बच्चों को ट्यूशन देना शुरू कर दिया । अपने ज्ञान और परिश्रम के बल पर उसने कुछ ही दिनों में अपार सफलता हासिल कर ली । कल तक पीछे बैग टांगे स्कूल जाने वाला शोभित आज गांव वालो के लिए मास्टर साहब बन गया है ।

बच्चो एवं उनके अभिभावक को शोभित जहां कहीं भी मिल जाता वे उसे बहुत सारा सम्मान देते जो शोभित के लिए एक सुन्दर एहसास था । इसप्रकार अपने टीचिंग के दम शोभित ने काफी कम समय में ही पैसा और सम्मान दोनों कमाया ।


एक दिन शोभित की मुलाकात उसके बचपन के दोस्त संजीव से हुई। बातों बातो मे संजीव ने बताया कि उसका दाखिला शहर के जाने-माने मैनेजमेंट कॉलेज में हो गया है जहा वह एमबीए की पढ़ाई करने जा रहा है । संजीव, शोभित को भी एमबीए के माध्यम से अपना भविष्य सवारने की सलाह देता है । उससे मिलने के बाद शोभित के मन में भी एमबीए करने की इच्छा जग जाती है  ।

मेधावी शोभित अपने हार्ड वर्क के दम पर मुंबई के जाने-माने बिज़नेस कॉलेज में एमबीए स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन पाने में सफल रहता है और इसप्रकार उसके सफलता का कारवाँ अनवरत यूंही जारी रहता है और वह कैंपस सिलेक्शन के दौरान, एक जाने-माने प्राइवेट बैंक में बतौर ब्रांच मैनेजर जाॅब पाने में सफल रहता है जहां उसे हाई पैकेज के साथ-साथ गाड़ी, बंगला और ढेर सारी सुविधाएं प्राप्त होती हैं ।

गुजरने वक्त के साथ  शोभित एक शहर से दूसरे शहर में होता हुआ अब अपने होम टाउन में आ चुका है । एक दिन जब शोभित अपनी कार से बैंक जा रहा था तभी अचानक उसकी गाड़ी खराब हो जाती है । बैंक के लिए पहले से ही लेट हो रहा शोभित अचानक  गाड़ी खराब हो जाने से काफी परेशान हो जाता है

किन्तु तभी उसके पास एक स्कूटी आकर रुकती है । स्कूटी से एक युवक उतरकर शोभित का पैर छू रहा है परंतु शोभित के लिए वह युवक बिल्कुल अजनबी जैसा है तभी युवक की स्कूटी पर साथ आए एक बुजुर्ग व्यक्ति से शोभित की आंखें टकरा जाती है तब उसे पता चलता है कि उस युवक को शोभित, कभी ट्यूशन पढ़ाया करता था जो आज काफी बड़ा हो गया है युवक के साथ उसके पिता भी हैं जो शोभित को मास्टर साहब कहकर पुकार रहे हैं ।

वे बहुत आदर भाव के साथ शोभित को पास की दुकान में जलपान के लिए आमंत्रित करते हैं । मगर शोभित को बैंक के लिए पहले ही काफी देर हो चुका है । शोभित के द्वारा अपनी परेशानी बताने पर युवक उसे फौरन अपनी स्कूटी से बैंक पहुंचाता है एवं उसकी कार को ठीक कराकर वापस बैंक पहुंचा आता है ।

ऑफिस से घर लौटने के बाद शोभित अपनी बालकनी में बैठा हुआ, जाने क्यूँ बहुत गुमसुम सा है । शायद इतनी ऊंची छलांग मारने के बाद भी आज उसे किसी बात का पछतावा हो रहा है । एक गुरु के रूप में जो सम्मान, जो आदर भाव शोभित ने अपने लिए युवक और उसके पिता से पाया । उसकी कीमत पैसों से नहीं आकी जा सकती । शायद शोभित का मन कहीं ना कहीं आज भी उसी सम्मान उसी प्यार का भूखा है जो उसे बैंक की इस चमचमाती जॉब में नहीं मिल सका ।

 

गुरु की कहानी से शिक्षा 

दोस्तों हम अक्सर उन्हीं चीजों के पीछे भागते हैं जो हमारे पास नहीं होती और जो हमारे पास होती है उसकी हम, कभी कद्र नहीं करते इसलिए दोस्तों जो नहीं है उसके पीछे अंधे होकर व्यर्थ में भागना छोड़कर जो है उसका आनंद उठाएं और उसमें संतोष करें !


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  Karan "GirijaNandan"
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