क्या बहुमत सत्य का आधार नहीं हो सकता ? प्रेरणादायक विचार | Truth Thought in Hindi on majority | Short Motivational Truth Thought | बहुमत पर सत्य विचार

मेरा आप सभी से एक सवाल
रावण के कितने सर थे ? (सर यानी Head)
जवाब है: दस
और राम के ?
केवल एक
तो इस हिसाब से बहुमत किसकी हुई ?
of course रावण की
तो इस हिसाब से रावण को ही सही (true) मान लिया जाना चाहिए और इसप्रकार हर घर में राम की नहीं बल्कि रावण की पूजा होनी चाहिए परंतु ऐसा नहीं है ।

दोस्तों यदि आप मेरी बातों को गहराई से समझने की कोशिश करेंगे तो आप शायद ये समझ पाएंगे कि मैं आपको क्या समझाना चाहता हूं ।

दोस्तों अक्सर परिवार में, समाज में, देश एवं पूरे विश्व में जब कोई तर्कों या साक्ष्यों के आधार पर खुद को सही साबित नहीं कर पाता तो वह बहुमत के पल्लू में छुपने की कोशिश करता है । बहुमत के आधार पर वह खुद को जस्टिफाई करने की कोशिश करता है और तब उसकी बातें कुछ इसप्रकार होती हैं

"तो क्या ये सब लोग झूठ बोल रहे हैं, केवल तुम्ही सच्चे  हो ?"
"सब लोग गलत हैं सिर्फ एक तुम ही सही हो ?"
जबाब है "हा" क्योंकि किसी पक्ष का ज्यादा संख्या में होना यानी बहुमत का होना उनके सही होने या सच्चे होने का प्रमाण नही हो सकता ।

ऐसी स्थिति आने पर हम कभी-कभी आत्मसमीक्षा के लिए मजबूर हो जाते हैं । हम ये सोचने लगते हैं कि कहीं वाकई हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे परंतु ऐसी गलती ना करें । किसी के उंगली उठाने से पहले आप अपने बारे में एक स्पष्ट राय कायम कर लें कि आप जो कर रहे हैं वह उचित है या अनुचित क्योंकि ऐसे लोगों पर विरोधी ज्यादा एग्रेसिव दिखाई देते हैं जिनका कांसेप्ट क्लियर नहीं होता । वहीं जो लोग अपने बारे में स्पष्ट राय रखते हैं वे किसी के कहने पर तनिक भी विचलित नहीं होते इसलिए उन पर उनके विरोधी ऐसे सवाल कम दागते हैं ।

जहां तक बहुमत का सवाल है तो यह संजोग या उनके आपसी स्वार्थ की पराकाष्ठा हो सकती है इसीलिए व्यर्थ में खुद को गलत ना समझें क्योंकि 10 सरो वाला रावण, एक सर वाले राम की बराबरी भी नहीं कर सकता तो उसके सही होने का तो सवाल ही नहीं उठता इसीलिए बहुमत सत्य का आधार नहीं हो सकता है !




 Writer

  Karan "GirijaNandan"
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