जीत पक्की है गर यकीन सच्चा है !  

हँसता मुस्कुराता चेहरा कविता | poem in Hindi

हँसता मुस्कुराता चेहरा, नाकाम वादों की इनायत है ,

कुछ पूरे हुए कुछ अधूरे रह गए ,

ऐसे ख़्वाबों की गुज़ारिश है ,

ना जाने किस मोड़ पे मिल जाए फिर , 

और मुँह मोड़ ले हम । 




Poet
VANDANA LAL


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