05 November, 2017

आख़िरी दाॅव | Last Attempt A True Story In Hindi

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ये कहानी एक सत्यघटना पर आधारित है । गोपनीयता बनाए रखने के लिए, व्यक्तिओ के नाम एवः जगह बदल दिए गए हैं ।

गाजियाबाद, हाईवे पर तेज रफ्तार से दौड़ती गाड़िया हाईवे पर आज कुछ भीड़ जमा हो रही है, सारी गाड़िया एक के बाद एक रूकती जा रही है। ऐसा क्या हुआ है।
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    भीड़ के सामने से काफी धुंआ उठ रहा है, और आग की तेज लपटे भी उठ रही है, एक कार आग की लपटो से घिरी है। लपटो के बीच कार मे देखने पर उसमे एक जवान हट्टा-कट्टा शरीर वाला व्यक्ति भी जलता नजर आ रहा है, वो मदद के लिए चीख रहा है। कार से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है, पर हर सम्भव कोशिश के बाद भी वो कार से निकल नही पा रहा।

    तमाशबीन लोग उसको बचाने का प्रयास भी नही कर रहे कुछ लोग मदद को आगे आते है,पर तेज हवाओ के साथ तेज़ी से उठती आग की लपटो के समाने वो भी बेबस है। हाईवे पर ऐसा कोई साधन भी नही, जिससे आग पर काबू पाया जा सके। अन्दर फसे व्यक्ति को आग धीरे-धीरे अपने आगोश मे लेती जा रही है,आग उसके चेहरे को ढक रही है, शायद उसके दोनो हाथ और पैर कार मे किसी ने बाँध रखे है। वो चिल्ला रहा है, तभी वहा पुलिस की गाड़ी आ जाती है। किसी भले इन्सान ने शायद अग्निशमन विभाग मे भी फोन किया है, पर गाड़ी अबतक नही आई। पुलिस भी उसे कार से निकालने का प्रयास करती है, अग्निशमन दस्ता के पहुंचने पर लोग राहत भरी साँस लेते है।

  काफी प्रयासो से आग को बुझाया जाता है,कार से जब वो व्यक्ति निकाला जाता है। तो पता चलता है कि वो तो   पूरी तरह से जल चुका है और मर भी चुका है। उसके दोनो हाथ और पैर मोटे लोहे की तार से बांधे गये है। जिससे कि वो कार से भाग न सके,और खुद को बचा ना सके। दिल झकझोरने वाली हाईवे पर हुई इस घटना मे कातिलो का पता लगाने मे पुलिस जुट जाती है। वहा मौजूद लोगो मे एक शख्स बताता है कि उसने कार मे आग लगने से पहले कार मे से तीन लोगो को निकलकर सड़क के दूसरे साइड की ओर भागते देखा,और वहा पहले से मौजूद एक काले रंग की कार मे वो तीनो भाग गए। और उसके थोड़ी ही देर मे कार मे से आग की लपटे निकलना शुरू हो गई।

    कार मे आग लगना कोई नई घटना नही थी। मगर ये हादसा कुछ अलग था। ये एक सोची समझी मर्डर की घटना लग रही थी। आखिर कौन थे वो लोग,और उसे क्यो मारना चाहते थे।

     इस शख्स के बारे मे भी पुलिस को कुछ पता नही लग पा रहा था, क्योंकि कार मे ऐसा कुछ भी नही बचा था। जिससे उस शख्स के बारे मे कोई जानकारी हासिल की जा सके। पुलिस ने आरटीओ की मदद से कार पर लगे नम्बर प्लेट से इस शख्स के बारे मे जानकारी हासिल करने मे कामयाब हुई।
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   सुनिल जिन्दल नाम का ये शख्स गाजियाबाद का ही रहने वाला था। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया घर वालो को घटना की सूचना दी, घर वालो के सामने तो अन्धेरा सा छा गया। 43 वर्षीय सुनील की शादी सरिता से हुई थी। उनकी  7 वर्ष की बेटी पिहू और 4 वर्ष का बेटा अमन है। घर मे सुनील के बाद जेन्ट्स के नाम पर उनके 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता है।

    पुलिस द्वारा किया गया फोन सरिता ने ही उठाया था। पहले तो उसको ये खबर झूठी लगी पर खबर के तेज़ी से न्यूज चैनल पर आने से उसका मन आहिस्ता-आहिस्ता सच को स्वीकार करने लगा था। वो बिल्कुल शांत हो कर दिवार पकड़ के नीचे बैठ गई। "आँख से आँसू बह रहे थे, पर लब खामोश  थे" "अचानक करेजे पर इतनी जोर से खन्जर चला जुबा से चीख निकलना मुश्किल" ,माँ को खोजते हुए बच्चे भी सरिता के पास आ गए। वो माँ से पूछते पर सरिता कुछ भी कहने के हालत मे नही थी। भरी जवानी मे सरिता का सब कुछ लूट चुका था।

   सुनील घनाड्य को पैसो की कोई कमी न थी। घर मे सब उससे खुश थे। फिर अचानक पूरी दुनिया ही इस घर की पलट गई थी। दरवाजे पर किसी की आवाज सुनकर सुनील के बुजुर्ग पिता युगलकिशोर दरवाजा खोलते है। तो सामने पुलिस खड़ी थी।

    पुलिस ने उनको सुनील के मौत की सूचना दी। युगलकिशोर जोर से सरिता-सरिता चिल्लाए और फूट-फूटकर रोने लगे। कॉलोनी के सभी लोग वहा आ गए। पुलिस मर्डर की गुत्थी सुलझाने मे लगी थी।

    सरिता के बचपन का दोस्त मंयक ने सरिता को बहुत सम्भाला, पुलिस ने सरिता, मंयक, व उसके पिता से पूछताछ मे पाया कि सुनील की किसी से कोई खास दुश्मनी नही थी। फिर उसकी हत्या किसने कराई। पुलिस अबतक उन तीन सन्दिग्धो के बारे मे सूचना जुटाने मे भी असफल रही थी ।

   जो मिली जानकारी के अनुसार सुनील के कार जलने से पहले निकल कर भागे थे। ऐसी गम्भीर घटना के बाद पुलिस की नाकामी पर लोगो का गुस्सा फूट पड़ा। शहर के नेताओ पर भी दबाव बढने से पुलिस पर भी दबाव बढने लगा।

     हलकान मे आयी पुलिस ने अन्ततः घटना के तह तक पहुंच ही गई, पुलिस ने, प्रेस-कान्फ्रेस द्वारा घटना के सम्बन्ध मे चौकने वाले तथ्य उजागर किए।
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    सुनील वैसे तो धनाढ्य परिवार से तालुक रखता था। और अपने पिता की सारी प्रोपर्टी का वारिस भी था। बड़े लोगो मे उसका उठना-बैठना था। बड़े परिवार मे ही उसका रिश्ता भी हुआ था। स्टेटस को मेनटेन करना सुनील की मजबूरी भी थी। सुनील को कारोबार मे मन्दी  से  गुजरना पड़ रहा था फिर उसने बहुत सारे लोगो से उधार लेकर अपने कारोबार को सम्भालने की कोशिश की, पर उसमे भी उसे बड़ी असफलता मिली। कर्ज मे डूब चुके सुनील को जब कोई रास्ता समझ नही आया तो अपने दोस्त मंयक की राय पर उसने अपने बचे हुए सारे  पैसे शेयर बाजार मे लगा कर पैसो की तंगी से निकालने की कोशिश की, पर यहा भी उसके सारे पैसे डूब गए।

     अब सुनील सड़क पर आ चुका था। उसके पास अब कुछ भी नही बचा था। वो अपने मासूम बच्चो,प्यारी बीबी और बूढ़े बाप को इस मुसीबत मे नही देख सकता था। हालांकि इस मुसीबत से निकालने के लिये उसने  पहले भी बहुत प्रयास किया था ,

    एक दिन बैठे-बैठे सुनील के मन मे एक योजना सूझी। अपनी खोई जमीन को पाने का एक जबरदस्त प्लान उसके दिमाग मे सूझा,मगर वो दर्दनाक और दुखद भी था। सुनील के नाम से काफी बड़ी इन्शोरेन्स  पालिसी थी। इतनी बड़ी की जिससे उसके सारे कर्ज चूक सकते थे। सुनील ने परिवार के चलते, अपना "आखिरी दाँव" चला। उसने खुद को ही खत्म करने कि योजना बनाई वो भी इस प्रकार से कि किसी को भी ये आत्महत्या न लगे। ताकि इन्सोरेन्स के पैसे उसके घरवालो को मिल सके।

     घर से निकलते वक्त सबसे मिल कर सुनील गया। उसके चेहरे पर सबसे जुदा होने की दुख भरी मुस्कान थी। वो आखिर मुस्कान सरिता को आज भी याद है। शायद वो मरना नही चाहता था। पर परिस्थितियो ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया था।

    हाईवे के पास पेट्रोल पंप से डिब्बे मे पेट्रोल लेकर सुनील हाईवे की तरफ चला गया, हाईवे पर उसने पहले पूरी कार मे फिर खुद पर पेट्रोल छिड़का फिर तार से अपने पैरो को कस के बांधा पैरो को बाधने के बाद उसने किसी तरह से तारो को अपने हाथो पर लपेट कर माचिस से आग लगा ली।

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स कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है :-

  दिखावे से बचे। रूखी-सूखी मे गुजारा कर ले,पर ऐसा काम न करे कि,सुनील जैसे हालात पैदा हो जाए ।

हम फिर आएंगे एक नई कहानी के साथ. . अपना ख्याल रखे.... खुदा हाफिज


Writer:-   Karan "GirijaNandan"

           
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