06 November, 2017

जहाँ बल न लगे वहाँ बुद्धि लगाए Inspirational Story In Hindi

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     एक जंगल मे एक बार एक हिरन अपने झुण्ड से अलग हो गया था वह भटकते भटकते जंगल के  दूसरे तरफ आ गया था उसे ये लगने लगा था कि वह बहुत दूर आ गया है ।
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      हिरन को अपनी माँ कि बात याद आ रही थी कि माँ ने कहा था – “बेटा जंगल मे सबसे खतरनाक जानवर शेर है वह किसी पर रहम नही करता है उससे बच के रहना कभी अगर झुण्ड से भटक जाओ तो ज्यादा दूर नही जाना और शाकाहारी जानवरों की झुण्ड की तलाश करना घबराना नही” , माँ के बातों को याद करता हुआ हिरन  रास्ते मे शाकाहारी जानवरों की तलाश करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था । उसे कुछ दूरी पर गाय का एक झुण्ड दिखाई दिया ।

       वो धीरे धीरे उनकी तरफ बढ़ ही रहा था कि उसे लगा कोई  उसके पीछे आ रहा है  उसने पलट कर देखा तो पीछे शेर आ रहा था  वह घात लगाये हुऐ  उसकी तरफ बढ़ रहा था शेर का इरादा उसके करीब आ कर उस पर हमला करने का था , हिरन को पता था कि अभी वह बहुत तेजी से भाग सकता है लेकिन वह बहुत दूर तक भाग नही पायेगा उससे पहले शेर उसे दबोच लेगा ।

      हिरन – (मन मे सोचने लगा )  वह किधर भागे  जिससे उसकी  जान बच जाये, "मै गायों की झुण्ड की तरफ भागता हूँ । कुछ समय तो लग ही  जायेगा गायो की झुण्ड से शेर को निकलने मे ।

      हिरन पूरी ताकत के साथ  अपनी फुल स्पीड से गायो की झुण्ड की तरफ भागा शेर ने जैसे देखा हिरन को भागते हुऐ देखा वह भी  उसे पकड़ने के लिये उसके पीछे दौड़ा ,हिरन ने जैसा सोच था वैसा ही हुआ शेर कुछ समय के लिये ही सही गायों की झुण्ड मे उलझ गया। शेर को अपनी तरफ आता देख कर गायों की झुण्ड मे भगदड़ मच गई शेर कुछ समय के लिए  उसी मे उलझ गया था।

      इधर हिरन भागते हुऐ एक तालाब के पास आ गया सामने उसका झुण्ड था ।
हिरन - ( मन मे सोचा) अगर मै तालाब को पार कर लूँगा तो मैं बच जाऊंगा और अपने झुण्ड मे भी  पहुँच  जाऊँगा  फिर उसे ख्याल आया इसमे तो मगरमच्छ होंगे उनसे कैसे बचूँगा ।

       हिरन की मज़बूरी थी आगे कुँआ पीछे खाई थी हिरन ने तालाब को पार करने का फैसला लिया वह तालाब के पानी मे उतर गया जैसे ही हिरन तालाब के पानी मे उतरा हिरन का शिकार  करने के इरादे से तालाब मे छुपा मगरमच्छ चल पड़ा, उधर शेर भी तालाब के किनारे पर आ गया शेर हिरन को खाने के लिये इतना उतावला था  कि  उसने ये सोचा भी नही की तालाब मे मगरमच्छ भी हो सकता  है । शेर तालाब मे कूद गया। अब हिरन के पीछे शेर और मगरमच्छ दोनो थे , मगरमच्छ हिरन से दूर था। लेकिन शेर के करीब था। शेर इस बात से अनभिज्ञ था ।
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      मगरमच्छ – (मन मे ) क्यों न आज शेर का शिकार करूँ हिरन का शिकार फिर कभी कर लूगाँ शेर ऐसे फिर कहाँ हाथ  आने वाला  है और पूरे जंगल मे मेरा नाम होगा ।

       ये सोच मगरमच्छ ने हिरन  के पीछे जाने का अपना विचार त्याग दिया और वह पल भर मे ही शेर के करीब आ गया मगरमच्छ शेर के  पास है इसका जरा सा भी अंदेशा शेर को नही था मगरमच्छ ने जैसे ही शेर की टाँग पकड़ी शेर एक दम से अवाक रह गया ।

       शेर – छोड़ मुझे तुझे नही पता मै जंगल का राजा हूँ । शेर अपनी टाँग छुड़ाने लगा पानी मे उसका बल नही लग रहा था ।
       शेर –(मन मे ) मैंने सोचा ही नहीं की तालाब  मे मगरमच्छ होगा , हिरन को खाने के चक्कर मै आज बुरी तरह से फँस गया हूँ ।

      शेर के काफी प्रयास करने  से उसकी टाँग मगरमच्छ के पकड़ से छूट गई शेर हिरन को भूल कर अपनी जान  बचाने के लिये तालाब के किनारे  की तरफ भागा ।

      मगरमच्छ - तू होगा जंगल का राजा लेकिन तू इस समय मेरा भोजन है आज मै जंगल के राजा का शिकार करुगाँ और एक नया इतिहास लिखूगाँ।

        उधर हिरन तालाब  पार कर चुका था। उसकी जान बच गई थी अब वह अपनी झुण्ड मे सुरक्षित था
शेर – तू जमीन पर होता तो तुझे, मै बताता( भागते हुए )

    मगरमच्छ – अपनी जान बचाने के लाले पड़े है और तू मुझे बताऐगा , रुक मै तुझे बताता हूँ ।
मगरमच्छ ने अपनी स्पीड तेज की , शेर भागते हुए तालाब के किनारे पहुंच गया उसने अपनी दोनों टाँग पानी के बहार जमीन पर रखी लेकिन तालाब के किनारे कीचड़  थी उसकी  टाँग उस कीचड़ मे जम नही पाई थी। इतना समय मगरमच्छ के लिये काफी था।  शेर निकल पाता उसके पहले  मगरमच्छ ने उसकी  पूछ पकड़ ली, शेर ने बहुत बल लगाया  लेकिन  वह खुद छुड़ाने मे असफल रहा ।
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       शेर –  (मन मे सोचने लगा ) अगर मेरी पूछ पर इसने अपनी पकड़ और टाईट कर ली तो मै इससे नहीं बच पाउँगा, बस एक ही मौका है मेरे पास वह भी  बहुत क्षणिक होगा ।
 इधर मगरमच्छ सोच रहा था ।

        मगरमच्छ –(मन मे ) मै अगर इसकी पूछ पर पकड़ मजबूत करने के लिए, अपना मुहँ खोलता हूँ  तो ये निकल कर भाग जायेगा , इतनी पकड़ से मै  इसे तालाब के अन्दर नही खींच पाऊँगा , मुझे अपनी पकड़ को और मजबूत करने  के लिये थोड़ा सा मुहँ खोल कर इसकी पूँछ को थोड़ा  अन्दर लेना होगा मगर बहुत सतर्कता के साथ ।

          मगरमच्छ  की भी मजबूरी थी पकड़ को  मजबूत करने के लिये उसे ये कदम उठाना ही पड़ेगा और   शेर की भी मज़बूरी थी। मगरमच्छ के इस स्टेप के बिना वह छूट नही सकता था वह भी तब जब वह इस मौके को भुना पाया तो शेर बड़े ही धैर्य से उसके इस कदम का इन्तजार करने लगा ।

         मगरमच्छ ने जैसे ही ढील दी शेर चतुराई दिखाते हुए, बहुत तेजी से भागा अब तक उसके पाँव कीचड़ मे जम चुके थे । शेर ने पूरा बल लगाया और मगरमच्छ  की  पकड़ से आजाद हो गया , शेर ने पलट कर पीछे तब देखा जब वह कुछ दूरी तय कर चुका था शेर की बुद्धि ने  आज काम किया और वह क्षणिक मौके को भुनाने मे कामयाब रहा , बल के प्रयोग से तो उसका निकलना नामुमकिन था लेकिन उसने अपनी बुद्धि  का सही समय पर सही उपयोग किया ।
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 इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है :-

 बल जब काम न आये तो बुद्धि से कोई भी जंग जीती जा सकती है , अपने विवेक पर पूरा विश्वास रखें ।



Writer -   "Prabhakar"


            
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