आम का पेड़ या वृक्ष, बच्चे और मनुष्य की प्रेरणादायक कहानी । खुशियाँ बांटने से बढती हैं पर कहानी | sharing happiness makes it grow best story with moral in hindi


  तीन वर्षों की कठिन तपस्या के उपरांत अब जाकर सरला को उसकी मेहनत का फल मिलने जा रहा है । आज से लगभग तीन साल पहले सरला ने अपने घर के पीछे खाली पड़ी जमीन मे आम्रपाली आम का पेड़ लगाया था । आम का पेड़ अब बड़ा हो चुका है । उसमे थोड़े बहुत बौर भी निकल आए हैं । उन्हें देखकर सरला मन ही मन काफी प्रफुल्लित हो रही है ।

  कुछ ही दिनों में बौर आम के छोटे-छोटे फलों में तब्दील हो जाते हैं । फल छोटे जरूर है मगर उनसे सरला को उम्मीदे बड़ी हैं । सरला के बढते आम, कालोनी मे चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं । जिसे सुन कर सरला को अपने आम की सुरक्षा के प्रति चिंताएं थोड़ी बढ़ने लगी हैं । इन चिंताओं के निवारण मे, मेहमानों के लिए बड़ी ही हिफाजत से रखी पुरानी मच्छरदानी, आम के सुरक्षा कवच के रूप में शहीद हो जाती है । 

  बरसात का मौसम आता है, आम के फल अब पकने शुरू हो गए हैं । उन पकते आम के फलों मे कॉलोनी के बच्चों का इंटरेस्ट बढ़ता चला जा रहा है । घर के पीछे पड़े छोटे से मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चे अक्सर उन्हे निहारते रहते हैं जिन्हें देखकर सरला का मन बहुत घबराता है ।


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  वह अपने पति से घर में पड़े पुराने टीन शेड को दीवार पर लगवाने को कहती है टीन शेड के लग जाने से अब आम के फल पूरी तरह सुरक्षित हैं क्योंकि अब उन्हें तोड़ना तो दूर कोई देख भी नहीं सकता । 

  एक दिन सरला की पड़ोस में रहने वाली विमला उसके घर आती है । सरला उसे बैठने को कहती है मगर विमला तो सरला के घर के पीछे स्थित उसके बगीचे में जाना चाहती है परंतु सरला, विमला की मंशा को भलीभाँति समझ रही है । वह उसे इधर उधर की बातों में उलझाकर, कमरे में ही बिठाए रखती है मगर विमला की खोपड़ी चालाक लोमड़ी जैसी है । वह घूम फिर कर पीछे गार्डन में जाने की जिद्द कर रही है तभी सिंह साहब का ऑफिस से घर में आना होता है जिसके कारण विमला को वहाँ से जाना पड़ता है । परंतु जाते-जाते विमला अपनी खीस निकाल   जाती है । वह कहती है

 "सरला बहन, भाई जी को आम थोड़ा हिसाब से खिलाईगा कहीं उनका शुगर न बढ जाए"

  एक दिन जब सरला अपने गार्डन में खड़ी ब्रश कर रही थी तभी सामने वाले फ्लैट के दूसरे मंजिले पर रहने वाली वसुंधरा अपने बेटे चिकू को बालकनी मे लिए स्कूल जाने के लिए तैयार कर रही है तभी वह सरला के आम के फलों की ओर इशारा करते हुए कहता है

"मम्मा-मम्मा आम"
 तब वसुंधरा कहती है

 "मेरे सोना को आम खाना है.. . अभी वो कच्चे हैं बेटा, जब पक  जाएंगे ना तब आंटी बाबू को अपने हाथों से खिलाएंगी" 

  यह सुनकर सरला का चेहरा बिल्कुल लाल पड़ जाता है । वह चुपचाप कमरे के अंदर चली जाती है । शाम होते-होते नजर रक्षक एक काली हांडी आम के पेड़ पर लगा दी जाती है जिसकी दिशा ठीक वसुंधरा के घर की तरफ से मानो हांडी आम के फलों को नजर लगने से बचाने के लिए ना होकर किसी डिश एंटीना का सिग्नल प्राप्त करने के लिए हो और जिसका सिग्नल सीधे वसुंधरा के घर के ओर से आ रहा हो ।

  रविवार का दिन है संजोग से सिंह साहब घर पर ही हैं । सरला आज टहलने के लिए बाहर निकलती है चूँकि जबसे आम के फल पकना शुरू हुए हैं तबसे सरला उनकी रखवाली में पहरेदार बने सब कुछ भूल बैठी है । आज मौका मिला तो सोचा थोड़ा टहल ही ले । वहां उसकी मुलाकात, उसके मकान के ठीक उपर, सेकण्ड फ्लोर पर रहने वाली जिज्ञासा से होती है । वह सरला से कहती है 

 "क्या बात है बहन जी आजकल आप ने टालना बिलकुल बन्द कर दिया है"
  तब सरला कहती है 
 "नहीं-नहीं बहनजी ऐसी कोई बात नहीं बस काम मे थोड़ा बिजी थी" 

उनके बीच काफी देर तक बात-चीत चलती रहती है इसी बीच जिज्ञासा सरला से कहती है 

"और बहन जी आपके आम का पेड़ तो इस बार खूब लहलाह रहा है । पूरी कॉलोनी में उनकी चर्चा है" 
 सरला न चाहते हुए भी मुस्कुराती हुए कहती है 
 "सो तो है"
 तब जिज्ञासा कहती है 

 "आपके आम तो अब पकने भी लगे हैं, दस आम पक चुके हैं और ग्यारह अभी तक कच्चे हैं कुल इक्कीस आम हैं"
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 यह सुनते ही सरला तिलमिला जात है । वह थोड़े तीखे अंदाज में कहती है 
 "तो आपने आम गिन भी ढालें, बहुत खूब"
 तब जिज्ञासा कहती है 

"अरे बहनजी इनके जाने के बाद और काम ही क्या रहता है बैठे-बैठे बोर हो जाती हूँ सो सोचा क्यूँ न आप के आम ही गिन लिए जाएँ । वैसे बहनजी भगवान की हमपे कितनी कृपा है ना, कि कॉलोनी में जितने घर हैं आप के पेड़ पर उतने ही आम भी लगे हैं न कम न ज्यादा ताकि आम का स्वाद चखने से कोई घर छूट न रह जाए"

इतना कहकर जिज्ञासा ठहाके मार जोर जोर से हंसने लगती है । सरला को अब वहां रुकना एक पल भी गवारा नहीं होता । वह उल्टे पांव घर वापस चली आती है । आधी रात हो चुकी है सरला अभी तक नहीं सोई वह बिस्तर पर करवटें बदलते हुए अपने आम की चिंता मे डूबी है तभी उसे आम के पेड़ के पास कुछ खुरखुराहट की आवाज सुनाई दती है । वह टॉर्च लिया वहां पहुंची मगर वहां कोई नहीं है, इस घटना से वह काफी डर जाती है । हमारी लेटेस्ट (नई) कहानियों को, Email मे प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें. It's Free !

 अगले दिन वह लाइनमैन को बुलाकर आम के पेड़ के पास 500 वाट का एक बल्ब लगवाती है । अब ठीक है अब दिन तो दिन रात को भी आम के पेड़ के चारो ओर उजाला रहेगा और अगर कोई आम चोर वहां आता है तो वह पकड़ा जाएगा ।

  एक दिन रात के समय जोर जोर की आंधियां चलती हैं और खूब बारिश होती है । सुबह सरला के दरवाजे पर खट-खट की आवाज हो रही है । सरला गेट खोलती है गेट पर वसुंधरा का बेटा अपने दोनों नन्हें हाथों से आम का एक फल पकड़े हुए खड़ा है ।
  वह सरला से कहता है 

 "आंती-आंती ये लीजिए आपका आम, यह तूतकर न बाहल गिला था, मैं स्कूल जा लहा था तभी मैंने इसे नीचे गिला देखा मैंने चोचा इचे लाकर आपको दे दूँ नहीं तो इचे डॉगी खा जाएगा"

  उसकी बातों को सुनकर सरला का दिमाग सुन्न पड़ गया । वह वहीं बूत बने चुपचाप खड़ी रहती है । बच्चा उसे आम थमा कर स्कूल चला जाता है । उसके जाने के बाद वह सारा दिन बस अपने आम को निहारती रहती है । अगले दिन वह हाथ में कैरी बैग लिए कालोनी के सभी घरों में जाती है । उसके कैरी बैग में आम्रपाली के आम हैं ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 


 खुशियां बांटने से बढ़ती है और गम बांटने से घटता है इसलिए हमें सबको साथ लेकर चलना चाहिए !

                             



   Writer
  Karan "GirijaNandan"
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