आरती की स्कूटी ख़राब हो गई रात के करीब 8 बज  रहे थे , सड़क बहुत सुनसान नही थी लेकिन कोई उसकी मदद के लिये नही रुक रहा था  , बहुत से लोग उसको देख कर आगे बढ़ते जा रहे थे , धीरे धीरे  सड़क पर भीड़ कम होने लगी , अब आरती को डर लग रहा था पास मे एक दो झुग्गियाँ भी थी जिसमे कुछ लोग थे, तभी रोहित ने अपनी बाइक वहा रोकी
 रोहित – क्या हुआ
 आरती – स्कूटी स्टार्ट नही हो रही है
रोहित ने भी बहुत प्रयास किया लेकिन स्कूटी स्टार्ट नही हुई ,
रोहित - आप कहे तो मै आप को कहीं छोड़ दूँ
आरती – कोई मैकेनिक  मिल जाता और इसे देख लेता तो ठीक रहता
रोहित – इस समय तो सारी दुकाने बंद है , कोई मैकेनिक अगर मिल भी गया तो उसने ड्रिंक ली होगी ,
आरती के कहने पर रोहित ने आस पास कि दुकानों मे देखा कोई मिल जाये लेकिन कोई उसे नही मिला
रोहित - सब पी कर सोये है , जो जगे है वह इस हाल मे  नही है कि वह इस समय आप कि गाड़ी देख सके ,
आरती - सामने वाली झुग्गी मे कुछ लोग जगे है ,
रोहित – वो सब ने थोड़ी बहुत पी रखी है , और तास के पत्ते खेल रहे है , वो अच्छे लोग नही लग रहे है
 आरती – तब ?
रोहित – आप को में छोड़ देता हुआ
 आरती – और स्कूटी ?
रोहित – स्कूटी अपने दोस्त रवि  के घर पर रखवा देता हुँ यही पास मे ही है उसका घर,
आरती – ठीक है ,
 रोहित ने अपने  दोस्त रवि  को फोन किया ,
  रवि -  बोलो भाई रोहित   क्या हाल है
रोहित – यार रवि मै  तेरे घर के पास कि  मेन रोड  पर  ही हूँ  आरती जी  की स्कूटी खराब हो गई है , करीब एक घन्टे  हो गया कोई मेकेनिक नही मिल रहा
 रवि – एक काम  करो स्कूटी मेरे घर पर दो
 रोहित  - मै भी यही सोच रहा था  इसलिए ही तुझे फोन किया ,तू आ जाता तो ठीक रहता,
रवि – ठीक है मै आता हुँ तू दस मिनट रुक
 आरती – क्या हुआ
 रोहित – बस दस मिनट मे वो आ रहा है  फिर वो स्कूटी लेता जायेगा और मै आप को छोड़ दूगाँ  उसका घर  थोड़ी ही  दूरी पर है
 रोहित को फोन किये दस मिनट से अधिक हो गये थे
 आरती – फिर हम ही चलते है ,यहाँ खड़े रहना अब ठीक नही लग रहा है ,
रोहित – स्कूटी को ढकेल कर ले जाना पड़ेगा
आरती – मै लेती जाऊँगी, आप इस कि चिंता न करो
रोहित – पाँच मिनट देखते है , सामने से रोहित का दोस्त रवि आता दिखा कुछ ही पल मे रोहित का दोस्त उनके पास था
रवि  – क्या हुआ ,
रोहित – स्कूटी स्टार्ट नही हो रही है , तुम स्कूटी ले जाओ मै आरती जी को घर छोड़ देता हूँ , कल आकर स्कूटी लेती जाएगी,
रवि – इस समय  तो कोई मिलेगा नही , अब कल दस बजे के बाद ही दुकाने खुलेगी , तुम लोग  झूठ मे परेशान  थे एक घंटे से , मुझे पहले ही फोन कर देना चाहिए था , इस सुनसान जगह पर एक घंटे से खड़े हो  , मम्मी बोली है चाय पी कर जाना , अब घर चलो चाय पी कर जाना
 रोहित – कल आना ही है चाय कल पी लेगे अभी तुम स्कूटी ले जाओ,
आरती – हाँ बहुत रात हो गयी है
 आरती ने थोड़ी देर और बाते कि रोहित और रवि से  ,कुछ देर मे कैमरे के साथ कुछ लोग सामने से आते दिखे ,
आरती – मै एक टीवी प्रोग्राम कर रही हुँ , ये हमारे टीवी मेम्बर  है ( आरती ने सभी से रोहित और रवि से परिचय कराया), आज का विषय रखा था “एक अकेली लड़की  मौका या जिम्मेदारी ” , मै 8 बजे से यहाँ खड़ी हुँ बहुत से लोग यहाँ से गुजरे लेकिन कोई यहाँ रुका नही , कुछ लोग देख कर चले गए  रुके नही , कुछ की नजरे घूरती रही शायद वो मौके कि तलाश मे थे , तीन लफँगों को हम ने पकड़ कर रखा है अपनी वैन मे जो मौके का लाभ उठाना चाहते थे  इस दो घन्टे मे केवल तुम ही हो जो यहाँ एक लड़की कि मदद के लिये आ कर रुके हो  ये तस्वीर हमारे समाज की है , मेरी स्कूटी बिल्कुल सही है
 आरती ने स्कूटी स्टार्ट कर के दिखाया , रोहित  को टीवी प्रोग्राम के हेड ने प्रभाकर ने एक गिफ्ट बाउचर देकर सम्मानित किया
प्रभाकर – वेलडन रोहित आज समाज मे आप जैसे ही लोगो कि जरूरत है ,
रोहित – थैंक यू सर ,
आरती – सन्डे को ये प्रोग्राम  देखना न भुलाना , आरती ने आपना विस्टिंग कार्ड  रोहित को दिया ,
  Prabhakar
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