रवि एक बड़ा ऐथलीट बनना चाहता था । लेकिन उसे  सफलता नही मिल रही  थी । हालांकि वह अच्छा दौड़ता था,  लेकिन अभी उसे किसी बड़े टूर्नामेंट मे सफलता नही मिली थी। वह इस बात से बहुत ही नाखुश था , रवि के पिता जी  रवि को घर मे कई दिनों से उदास देख रहे थे  ।
पिता  – ( रवि की माँ से )  रवि आज कल बहुत उदास रहने लगा है  तुम से कुछ उसने कुछ बताया क्या,
माँ – नही , आप बेकार मे चिंता कर रहे हैं। दौड़ कर आता है थक जाता होगा ,
पिता – ( उसके पिता जी ने उसे बुलाया  )  रवि क्या बात है जब से तुम  टूर्नामेंट से वापस आये हो बहुत उदास और खोये खोये रहने लगे हो क्या बात है । हमें बताओ क्या दिक्कत है
रवि – कोई बात नहीं ( रवि उदास मन से जबाब दिया )
पिता – बेटा  कुछ तो है जिसकी वजह से तुम परेशान हो  बताओ नही तो कैसे उसका हल  निकलेगा ।
रवि – किसी बड़ी टूर्नामेंट मे सफलता नही  मिल रही है, समझ मे नहीं आ रहा है क्या करूँ,  कोच से भी बात कर  चूका  हुँ।
पिता – सफलता मिलेगी ,बेटा घबराओ नही, कल मेरे साथ चलना मै तुमको अपने समय के बेहतरीन  कोच हरेन्द्र जी  से मिलाऊँगा,
 रवि अपने  पिता जी के साथ कोच  हरेन्द्र से मिलने  उनके घर गया, हरेन्द्र जी अपने समय के बेहतरीन कोच थे , कोच हरेन्द्र को रवि के पिता ने अपने आने की वजह बताई , हरेन्द्र जी ने रवि को कल सुबह  अपने  घर बुलाया , रवि अगली  सुबह  कोच के घर पंहुचा । वह रवि को  लेकर सामने वाले मैदान मे पँहुचे फिर रवि को  दौड़ने के लिये कहाँ रवि ने दौड़ना शुरू किया काफी देर से दौड़ रहा था लेकिन कोच उसे रुकने के लिये बोल ही नही  रहे थे । रवि बुरी तरह थक चूका था। अब उसकी दौड़ने की  हिम्मत नहीं  हो रही थी । कोच ने जब देखा की वह बिलकुल थक चूका है वह अब किसी भी पल गिर सकता  है  तो कोच हरेन्द्र ने रवि को रुकने को बोला  ,रवि रुकते  ही पानी पिने के लिये  आगे बढ़ा
कोच हरेन्द्र - जब तुम रुके तो  तुम को किस चीज कि जरूरत हुई  सबसे अधिक
रवि – सर पानी की
कोच हरेन्द्र – यही है  सफलता का मन्त्र , जैसे की दौड़ने  के बाद तुम पानी के लिये आगे बढे , जब तुम अपने अंदर  सफलता को पाने के लिए  ऐसी ही प्यास जगा लोगे जैसे की इस समय पानी को लेकर तुम्हारे अंदर  प्यास है तो वह तुमको मिल ही जाएगी।,  दौड़ते समय हमेशा पानी की बोतल को क्रश लाइन के बाहर समझना उसके लिये ही  दौड़ना, जीत  की तैयारी करो
रवि ने अगले टूर्नामेंट  के लिये जी जान लगा दिया। कुछ दिनों के बाद वह ट्राफी के साथ कोच हरेन्द्र जी के घर पहुँचा हरेन्द्र जी बहुत खुश हुए ।
कोच हरेन्द्र – जब भी आप किसी काम पर पूरा ध्यान लगाते है तो आप को उस काम मे सफलता जरुर मिलती है  , जरुरी यह है की आप का उस काम मे मन लगना चाहिए ,

कहानी से शिक्षा

जिस भी काम मे आप का मन हो उस काम पर पूरा फोकस रखे  सफलता आप  को जरुर मिलेगी !

   Writer
  प्रभाकर
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