जहाँ चाह वहाँ राह | Cat Fight For Happy Life Inspirational Story In Hindi

एक बहुत ही घने और विशाल जंगल मे बहुत से जानवर रहा करते थे । जंगल में सभी जानवर बहुत ही अच्छे थे वे किसी को हानि नही पहुंचाते थे । जंगल के बगल से ही एक नदी गुजरती थी जो जंगल की सुंदरता में चार चांद लगाती थी । जंगल के दूसरे छोर पर काफी खतरनाक जानवर रहते थे ।

‌इसी जंगल में एक सफेद बिल्ली रहा करती थी । हालांकि बिल्ली के लिए यह जंगल बहुत ही अच्छा था । बिल्ली के लिए खाने पीने की हर चीज यहां मौजूद थी । मगर बिल्ली के साथ समय बिताने वाला यहा कोई नहीं था। जंगल में जानवर तो बहुत थे मगर बिल्ली की प्रजाति का कोई नहीं था । बिल्ली का कोई दोस्त नहीं था, बिल्ली बिल्कुल अकेली थी । बिल्ली खुद को यहां बहुत अकेला महसूस करती थी ।

  एक दिन उसने अपने सामने बिल्कुल अपने जैसा ही दिखने वाला, एक जानवर पाया जो रंग से तो काला था पर हूबहू उसके जैसा ही था । दोनों एक दूसरे को देख कर गुर्राने लगे । देखते ही देखते दोनों एक दूसरे पर झपट पड़े काफी देर तक दोनों में लड़ाई चलती रही । कुछ देर एक-दूसरे से लड़ने के बाद दोनों ने यह समझा की वे दोनों तो एक जैसे ही हैं, बस रंग दोनों का भिन्न है ।

  थोड़ी ही देर में दोनों शांत हो गए और फिर उनमें दोस्ती हो गई  । अब सफेद बिल्ली बहुत ही खुश रहने लगी उसको अपना एक प्यारा दोस्त जो मिल गया था, अब वे हमेशा साथ-साथ खाते, साथ ही सोते, खेलते, उनका सारा वक्त अब एक-दूसरे के साथ ही गुजरने लगा । अब सफेद बिल्ली को भी किसी और से मतलब नहीं रह गया था । अब हर जानवर बिल्ली से दोस्ती करना चाहता था पर पुराने समय में उनके द्वारा उसे अनदेखा किये जाने के उनके बर्ताव को वह भूली नही थी जिसकी वजह से वह उनको कोई महत्व नहीं देती बल्कि उनकी ओर देखना भी पसंद नही करती ।

  कुछ ही दिनों बाद एक-एक करके ढेरों काली बिल्लियां वहां आ गई, सभी से सफेद बिल्ली ने दोस्ती कर ली अब तो बिल्ली की मानो निकल पड़ी थी कभी उसके पास एक भी दोस्त नहीं था पर आज उसके चारों तरफ दोस्तों की भीड़ थी । जंगल में उनकी एक टीम सी बन गई, सारे जानवर उन्हें बस देखते ही रह जाते । बिल्ली की खुशियों का ठिकाना न रहा, पर उसकी ये खुशियां ज्यादा दिन टिकने वाली नही थी । कुछ ही दिन दिनों बाद काली बिल्लियों ने चुपचाप अपना गुट बना लिया और सफेद  उसपर रौब झाड़ने लगे ।

  पहले तो उनके इस बर्ताव को उसने महज एक मजाक समझा पर धीरे-धीरे उसे सारी बात समझ में आने लगी । उसने जान लिया था कि उनसे दोस्ती करके और उनकी दोस्ती के भरोसे जंगल के दूसरे जानवरो से बैर करके उसने बड़ी भारी गलती की थी । अब सब मौज मस्ती करते हैं और वह उनके नखरे उठाती । उसकी के लिए उनसे दोस्ती वाली बात "चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात" जैसी निकली ।  उसके चेहरे की चमक कहीं गायब हो गई और अब वह गुमसुम सी रहने लगी । वह रोज नदी के किनारे बैठती और अपने पुराने दिनों को याद करती । अब वे गुजरे हुए दिन ही उसके लिए, किसी सुन्दर ख्वाब से कम न थे, जो उसने कभी अकेले रहकर बिताए थे ।

  उन दिनों में वह अकेले भले थी, पर आज से तो ठीक ही थी, तब उसे न ही कोई रोकने वाला था और न कोई टोकने वाला, वह खुद ही खुद की बॉस हुआ करती थी । कोई उसपर रौब झाड़ने वाला भी नहीं था पर अब समय बदल चुका था । थोड़े दिनों की मस्ती के बाद अब उसके जीवन में केवल तकलीफे रह गई थी  । जिससे वह ऊब चुकी थी उसने नदी किनारे बैठे बैठे यहां से निकलने का मन बना लिया पर उनके बीच से वह आखिर कैसे निकले, क्या करें वह दिन रात बस इन्ही सवालों में उलझी रहती ।
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  चूंकि जंगल के दूसरी तरफ भी वह नही जा सकती थी क्योंकि उधर जाना खतरनाक था । कई दिनों के सोच विचार के बाद उसे एक आइडिया सूझा, नदी के उस पार दूसरा जंगल था जो ऐसा ही विशाल और सुंदर था । वहां खतरनाक जानवर  भी नहीं थी वहां पहुंचकर उसे अपने खोए हुए खूबसूरत दिन वापस मिल सकते थे, जिस पल उसके मन में यह आइडिया सूझा उसके पैर खुशी से थिरकने लगे । मगर अगले ही पल वह फिर से उदास हो गई क्योंकि आइडिया तो बड़े काम का था पर सवाल था, नदी को पार करें तो करें कैसे फिर कई सवालों में उसने खुद को घिरा पाया । वह खुलकर कोई प्रयास भी नही कर सकती थी क्योंकि अगर ये बात  काली बिल्लीयों को पता लगी तो वे उसे अपनी गुलामी से कभी आजाद नहीं होने देंगे ।

  मंजिल तो सामने थी पर मंजिल तक पहुंचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था । पर उसने भी नदी पार करके यहां से निकलने की ठान ली । अब वह नदी को पार करने के नए-नए जरिए तलाशती रहती और आखिरकार उसे एक दिन  इस समस्या का भी हल मिल ही गया । अगले दिन जब सभी बिल्लियां आराम कर रही थी तभी वह चुपचाप नदी किनारे गयी और उसने वहा झाड़ियों में नदी पार करने के लिए नाव तैयार करना शुरू कर दीया । अब वह जब भी दूसरी बिल्लियों के आंखों से ओझल होने का मौका पाती, भागकर नदी के पास पहुंचती और आसपास से नाव के लिए जरूरी लकड़ियां और घास फूस इकट्ठा करती और फिर आधे-अधूरे बने नाव को वहीं छुपा कर चली जाती ।

  इस काम को छुप-छुपकर करने की वजह से समय काफी लग रहा था । कई बार नाव सही न लगने पर वह नाव को फिर से शुरू से बनाने की कोशिश करती । इन सबके बीच उसने कभी हिम्मत नही हारी और अपने धैर्य को बनाए रखा । मेहनत रंग लाई और नाव बनाने में वह कामयाब रही अब तो बस उसे वहां से  निकलना ही था । वह आज बहुत ही खुश थी । उसने सभी बिल्लियों से बड़े ही प्रेम से बात की और उनकी गलत बातों को भी मुस्कुरा कर टालती गयी । रात हो चुकी थी पर सफेद बिल्ली नहीं सोई थी, सफेद बिल्ली तो मन ही मन, जिंदगी के नए सपने बुन रही थी । जब सफेद बिल्ली को लगा की सारी बिल्लियां सो रहीं हैं तब सफेद बिल्ली दबे  पावं चुपचाप नदी की तरफ चल पड़ी नदी के पास पहुंचने के बाद सफेद बिल्ली नाव नदी में डाली और उस पर सवार हो गई  ।

  सुबह की पहली किरण निकलते-निकलते  सफेद बिल्ली ने, जिंदगी  की नई शुरुआत करने के लिए नई जमीन पर पांव रखा । बिल्ली नदी पार कर चुकी थी और  नए जंगल में पहुंच चुकी थी  ।

Moral Of The Story :-



बहुत से लोग अपने वर्तमान से खुश नही हैं, वे बदलाव चाहते हैं पर बदलाव के लिए, क्या करे और कैसे करे ये नही जानते, जरूरत हैं तो बस, अवसरो को पहचानने की और उसी पर फोकस करने की, रास्ते खुद-ब-खुद बनते चले जाते हैं और बोझ सी जिन्दगी को पीछे छोड़ हम कही आगे निकल जाते हैं !!
                 


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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
 Team MyNiceLine.com

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