प्रेरणादायक हिन्दी कहानी बिना कष्ट किए फल नही मिलता,सफलता की कहानी motivational short hindi story with moral no pain no gain,no gain without pain story in hindi

कष्ट उठाएँ सफलता पाए कहानी Motivational Hindi Story On No Pain No Gain


  गांव में रघु और बेचू दोनों एक-दूसरे के पड़ोसी और काफी अच्छे दोस्त थे । दोनो के दो बेटे थे । रघु और बेचू ज्यादा पढ़े लिखे तो नहीं थे मगर अपने बच्चों को शिक्षित बनाने का हरसंभव प्रयास कर रहे थे । वह अपने बच्चों को ऊंची से ऊंची शिक्षा दिलाना चाहते थे ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सके और एक अच्छी जिंदगी जी सकें ।

  हालांकि दोनों के पास आय का कोई बड़ा स्रोत नहीं था । उनके पास वही पुरखों से मिली हुई थोड़ी सी कृषि योग्य भूमि थी । जिस पर दिन रात पसीना बहाकर किसी तरह से वे अपने और अपने परिवार का पेट भरा करते थे ।

  उनके बच्चों का भी  बचपन उन्हीं की भांति ही एक दूसरे के साथ-साथ गुजारा था । गांव के प्राथमिक विद्यालय में साथ-साथ स्कूल जाने वाले दोनों बच्चे अब ग्रेजुएट हो चुके थे । दोनों का सपना किसी अच्छे कॉलेज से MBA करने का था । उन्होंने अपने सपनों को अपने पिता से सांझा किया ।

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  हालांकि इसके लिए काफी पैसों की आवश्यकता थी परंतु रघु अपने बेटे को ऊंची से ऊंची शिक्षा दिलाने के लिए हर जतन करने और कोई भक कष्ट उठाने के लिए तैयार था ।

  ऐसे में उसने पैसों का इंतजाम करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार करना आरंभ कर दिया मगर उनके पास न कोई जमापूंजी थी और न ही उसे कोई पैसे उधार देने वाला था । ऐसे में उसने काफी सोच विचार करने के बाद बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए  विरासत में मिली हुई अपनी कृषि योग्य भूमि को दांव पर लगाने का फैसला किया । 

  जब यह बात बेचू को पता चली तो उसने रघु को बहुत डांटा और उसने रघु को पुश्तैनी संपत्ति को सम्भाल कर रखना, उसका फर्ज़ बताया । उसने बताया कि कितना जतन करके उसके पूर्वजों ने इस जमीन को आज तक बचाए रखा, जिससे उसकी दाल रोटी चल रही है । वह कहता है 

 "विरासत मे मिली जमीन को बेचना पूर्वजों के सम्मान को धूल मे मिलाने के समान है लोग उसपर हंसेंगे। और वैसे भी हम दोनों की बेटियां अभी छोटी हैं कल को वे बड़ी होंगी तब उनकी शादी के लिए ढेर सारे पैसों की आवश्यकता होगी पड़ेगी, मैं मानता हूं कि इसके लिए भी तुमने कुछ जरूर सोच रखा होगा परंतु तुम्हारे द्वारा इकट्ठा किया गया पैसा अगर उस वक्त कम पड़ गया, तब तुम क्या करोगे ? पैसों का इंतजाम कहां से करोगे ?  किससे मांगने जाओगे कौन तुम्हारी मदद करेगा और जमीन बिक गई तो खाओगे क्या ?  क्या बेटे के कलेक्टर बनने तक हवा पी कर जिओगे ? जो सबकुछ दांव पर लगाने चले हो मेरी मानो तो यह पागलपन मत करो । उन्हे अपना भविष्य  संवारने के और भी कई मौके मिलेंगे मगर तुम जो करने जा रहे हो वह बिल्कुल भी सही नहीं है"


तब रघु ने कहा 

  "अगर मेरा बेटा पढ़-लिख कर किसी लायक बन जाएगा तो इससे ज्यादा अच्छा और कुछ भी नहीं होगा मुझे लगता है कि इसमें मान सम्मान जाने जैसी कोई बात नहीं लगती । कल वक्त कुछ और था आज वक्त कुछ है । मेरे बेटे ने कदम बढ़ाया है तो मुझे उसका साथ देना ही होगा मुझे लगता है कि तुम्हें भी अपने बेटे को आगे बढ़ाने के लिए अपने कदम पीछे नहीं खींचने चाहिए"
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  इस बात को लेकर दोनों में काफी देर तक बहस चलती रही मगर दोनों अपनी-अपनी बातों पर अडिग रहे आखिरकार पुश्तैनी जमीन के पैसों से रघु के बेटे का दाखिला MBA के ऊंचे कॉलेज में हुआ । वही बेचू का बेटा अपने सपनों से समझौता कर गांव वापस आ गया और अपने भविष्य संवारने के अन्य रास्ते तलाशने लगा । 

  जमीन बेचकर रघु ने बेटे का दाखिला ऊँचे कॉलेज में तो अवश्य करा दिया परंतु अपने लिए उसने वाकई मुसीबत मोल ले ली । पूरे घर का खर्च जिस जमीन के बूते चला करता था अब वही जमीन उनके पास नहीं थी लिहाजा रघु अब दूसरे के खेतों में मेहनत मजदूरी करने और कष्ट सहने के लिए मजबूर था ।

  उधर MBA पूरा करके रघु के बेटे को एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर मैनेजर जॉब मिली परंतु बेचू के बेटे का करियर अभी तक सेटल न हो सका था । वह अभी भी बस नौकरियां बदलने में लगा था । जिसके कारण बेचू की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती चली गई और वह ढेर सारे कर्ज में डूब गया । वही रघु के बेटे की अच्छी नौकरी के बदौलत उनकी स्थिति मे दिन प्रतिदिन सुधार होता गया ।

  धीरे-धीरे काफी वक्त गुजर गया देखते ही देखते दोनों की बिटिया अब शादी योग्य हो चुकी थी । कर्ज मैं लदे बेचू को कोई रास्ता न सूझता देख मजबूरन उसने बिटिया की शादी और कर्ज चुकाने के लिए अपनी आधी से ज्यादा पुश्तैनी जमीन बेच दी ।

  वहीं रघु के बेटे ने अपने पिता की आशाओं पर खरा उतरते हुए अपनी जॉब की बदौलत अपनी बहन की शादी के लिए ढेर सारे पैसों का बंदोबस्त खुद ही कर डाला । रघु की बहन की शादी बड़ी ही धूमधाम से हुई सिर्फ यही नहीं जाते-जाते रघु के बेटे ने उसे पैसों से भरा एक बैग भी दिया जिसकी बदौलत रघु अपने पुरखों की जमीन को वापस पाने में कामयाब रहा ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi 



इस कहानी से दो शिक्षा मिलती है 

जैसे बिना आग मे तपे सोना कुन्दन नही बनता ठीक वैसे ही बिना कष्ट किए फल नही मिलता ! 


सफलता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त जोखिम उठाना आवश्यक है क्योंकि बगैर इसके सफल होने का सपना देखना बेमतलब है !

ज्यादातर लोग बड़े-बड़े सपने तो देख लेते हैं और उन्हे पूरा करने के लिए कोशिश भी बहुत करते हैं परंतु जहां सवाल बड़े कष्ट झेलने या जोखिम उठाने का होता है वहां वह पैर पीछे खींच लेते हैं । दोस्तों मेरा यह मानना है कि इस सफलता की सीढ़ियों में एक सीढी जोखिम की भी होती है और इस पर कदम रखे बगैर आप बड़ी सफलता कभी हासिल नहीं कर सकते इसलिए बेहतर यही होगा कि सफलता पाने के लिए बड़े से बड़ा कष्ट झेलने और जोखिम उठाने से न घबराए । Because No Pain No Gain. 




   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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