27 October, 2019

हीरा और मोती की कहानी | चोर और पुलिस की कहानी | Short Story in Hindi

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Story On Good Company in Hindi | अच्छी संगत का असर प्रेरणादायक कहानी


एक ही गांव के होकर भी हीरा और मोती में काफी अंतर था । एकतरफ जहां हीरा का मन पढ़ाई-लिखाई मे रमा रहता, वही दूसरी ओर मोती, गांव के दूसरे लड़कों के साथ सारा दिन आवारागर्दी किया करता ।

कालांतर में जहां एक तरफ हीरा पढ़ लिखकर डिग्री कॉलेज में लेक्चरर के पद पर आसीन हुआ । वहीं मोती आगे चलकर चोरी-छिनौती जैसे गलत कार्यों में रम गया जिसके चलते उसे कई बार जेल की हवा भी खानी पड़ती ।

हालांकि एक ही गांव के होने के नाते हीरा ने कई बार उसे जेल से रिहा भी करवाया परंतु वक्त के साथ सुधरने की बजाय मोती के आए दिन जेल जाने के चक्करों से तंग आकर हीरा ने उसकी मदद करनी छोड़ दी ।

वक्त का पहिया घूमा, हीरा अब रिटायर होकर अपने बेटे व बहू के साथ रह रहा है । वैसे तो उसके पास धन-दौलत, बंगला गाड़ी सब कुछ है, किसी चीज की उसे कोई कमी नही है परंतु यदि कुछ नहीं है तो वह है सुकून, वह भी उसके अपने इकलौते बेटे के नाते ।

असल में मास्टर साहब का बेटा एक नंबर का आवारा और बदमाश है । वह आए दिन लोगों से मारपीट किया करता है जिसके कारण उसे कई बार हवालात के चक्कर भी काटने पड़ते हैं । अब यदि कोई दूसरा होता तो बात कुछ और होती परंतु जब बात अपने औलाद की हो तो भला कौन बाप हाथ पर हाथ धरे बैठ सकता है लिहाजा बेटे के पीछे पीछे हीरा भी पुलिस थाने व कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते रहते हैं ।

एक दिन की बात है हीरा के बेटे ने फिर कुछ कारनामा कर दिखाया है जिसके नाते वह जेल चला जाता है । बेटे के जेल जाने की रोज-रोज की आदतो से तंग आ चुके मास्टर साहब मानो इसबार बेटे के पीछे न जाने का प्रण ले चुके हैं परंतु पोते व बहू का मुख देख उनसे रहा नहीं जाता फलस्वरूप सफेद धोती, कांधे पर गमछा व हाथ में छड़ी लिए हुए मास्टर साहब एकबार फिर थाने की ओर निकल पड़ते हैं । 

वैसे थाने में तैनात कई अफसर व सिपाही मास्टर साहब को बखूबी जानते थे । उनमे कुछ तो हीरा के विद्यार्थी भी रह चुके हैं लिहाजा थाने में हीरा का सम्मान बहुत है । वहां पहुंचते ही सामने बैठे दरोगा ने उनके लिए सीट खाली कराई और मास्टर साहब के लिए चाय लाने को कहा ।

हीरा बिल्कुल खामोश हैं उसने चाय के लिए हां या ना कुछ भी नहीं कहा । कुछ ही देर बाद हवलदार वहां चाय का प्याला रख जाता है । हीरा भी चुपचाप कुर्सी पर बैठे-बैठे चाय पीने लगता हैं तभी इस चीर खामोशी को तोड़ते हुए सामने बैठा इंस्पेक्टर उनसे कहता है

"नए साहब बहुत सख्त हैं, खास करके लौंडो के लिए इसलिए इस बार आपको बहुत मुश्किल होने वाली है । यदि आप स्वंय जाकर उनसे मिले तो शायद कोई रास्ता निकल आए वरना मामला यदि कोर्ट में गया तो मुश्किलें और बढ़ेगी"

चूँकि मास्टर साहब बहुत समझदार थे इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए वे दीवान जी से नए साहब के घर का पता कागज पर लिखवाए वहां से चल पड़ते हैं । एक हाथ में छड़ी तो दूसरे हाथ में नए साहब का पता लिखा हुआ कागज का टुकड़ा लिए मास्टर साहब बाहर निकल पड़ते हैं ।

रात के दस बज चुके हैं । चूँकि साहब के बंगले के बाहर खड़ा पहरेदार मास्टर साहब का ही पढ़ाया हुआ छात्र है इसलिए वह उन्हें अन्दर जाने से नही रोकता । अंदर पहुंचकर मास्टर साहब दरवाजा खटखटाते हैं, दरवाजा खुलता है परंतु सामने जो व्यक्ति है उसे देखकर मास्टर साहब चकित रह जाते हैं । दोनों के मुख से आवाज निकलती है

"तुम .. यहां कैसे ?"

अंदर खड़ा शख्स हीरा से कहता है 

"मैं यहीं रहता हूं"

वह शख्स कोई और नहीं बल्कि हीरा के गांव का रहने वाला व उसके बचपन का मित्र मोती है । मोती बड़े ही आदर से उसे अंदर ले आता है । दोनो एक-दूसरे का हालचाल लेने लगते । इसी बीच हीरा मोती को अपनी पीड़ा से अवगत कराता है । तब मोती उससे कहता है

"समझो तुम्हारा काम हो गया, तुम जिस ऑफिसर से मिलने यहां आए हो वह कोई और नहीं बल्कि मेरा बेटा अमरेन्द्र है"

यह सुनते ही मास्टर साहब चौक जाते हैं वो अपने गाल पर हाथ रखे मोती को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगते हैं । वैसे तो हीरा की समस्या का समाधान हो जाता है परंतु घर आए हीरा के मन मे एक सवाल बार-बार घूम रहा है जिसके नाते वो काफी परेशान हो जाते हैं । इस सवाल के पीछे हीरा के रातों की नींद व दिन का चैन तक खो गया है । वह दिन-रात बस यही सोचते रहते हैं कि 

"आखिर मास्टर का बेटा चोर और चोर का बेटा पुलिस कैसे हो सकता है ?"

तभी एक दिन हीरा के घर, गांव के बाबा का आगमन होता है । हीरा को इसकदर परेशान देख आखिरकार बाबा उससे पूछ बैठते हैं 

"तुम आजकल बहुत खोए-खोए और काफी परेशान दिखाई देते हो । कोई बात जरूर है जो तुम्हे परेशान कर रही है आखिर वह बात क्या है ? तुम मुझे बताओ । शायद में तुम्हारी समस्या का निदान कर सकूं"

बाबा की बातें सुनते ही हीरा भरी-भरी आवाज में बोल उठता है ।

"महाराज आप तो अपने गांव के मोती को जानते ही होंगे"

महाराज "हां बिल्कुल"

"मैं कुछ दिनों पहले ही उससे मिला । उसने पूरी जिंदगी कुकर्म किए मगर फिर भी उसका बेटा एक अच्छा पुलिस ऑफिसर बन गया है जबकि वही मैंने अपने बेटे को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने की कोशिश की   उसे हर सुख सुविधाओं से रूबरू कराया परंतु फिर भी मेरा बेटा गलत रास्तो पर चल पड़ा है मैं जबसे मोती से मिलकर घर लौटा हूं, मेरे मन में बस एक ही सवाल बार-बार घूम रहा है कि आखिर मास्टर का बेटा चोर और चोर का बेटा पुलिस कैसे हो सकता है ?"
(हीरा, बाबा से कहता है)

बाबा उसकी बातों को सुनकर हंस पड़ते हैं और कहते हैं

"तो इसी सवाल ने तुम्हें इतने दिनो से परेशान कर रखा है । चलो मैं तुम्हारी इस उलझन को दूर किए देता हूं"

असहाय सा महसूस कर रहे मोती से बाबा कहते हैं

"यह सत्य है कि मोती ने जिंदगी में कोई अच्छा काम नहीं किया उसने हमेशा गलत रास्तों को ही चुना जिसके कारण उसे अनगिनत बार जेल जाना पड़ा परंतु चूंकी मोती का घर गांव के शिवालय के ठीक बगल में था इसलिए मोती की पत्नी व उसके बेटे का वहां आना-जाना लगा रहता । वे अक्सर सत्संग सुनने एवं धार्मिक कार्यों में हाथ बंटाने वहां आया करते फलस्वरूप उनके अंदर अच्छे गुणों का समावेश हुआ परंतु वहीं दूसरी तरफ यद्यपि तुम्हारा बेटे का उठना बैठना पढ़े-लिखे व अच्छे परिवार के लोगो के साथ रहा परन्तु उनमें ऐसे गुणो का घोर अभाव था जिससे अच्छे व्यक्तित्व के निर्माण की सीख मिल सके परिणामस्वरूप मोती के चोर होने के बावजूद भी उसका बेटा पुलिस बना और दूसरी तरफ तुम्हारे मास्टर होने के बावजूद भी तुम्हारा बेटा गलत कार्यो में लिप्त हो गया"

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Short Inspirational Story In Hindi


हम जिन लोगों के सानिध्य में रहते हैं हमारे अंदर भी बिल्कुल वैसे ही गुणो का समावेश होता है इसीलिए यदि हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छा संस्कार भी देना चाहते हैं तो निश्चित रूप से उन्हें भले लोगों के बीच में ही रखना होगा अन्यथा उन्हें बिगड़ते देर नहीं लगेगी !

   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
 Team MyNiceLine.com

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