आशिंक शुरू से थोड़ा मस्त मौला स्वभाव का था । उसकी यही आदतें पड़ोस में रहने वाली महक को बहुत भाती थी। धीरे-धीरे दोनों में प्यार हो गया और फिर प्यार का इकरार भी हो गया । दोनों तालाब के किनारे एक दूसरे के साथ काफी वक्त बिताने लगे यह बात घरवालों से कहां छिपने वाली थी । दोनों घरवालों के बीच पहले से ही काफी अच्छे सम्बन्ध थे, इसलिए इस रिश्ते को लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। लिहाजा दोनों का निकाह भी हो गया ।

"बहुत कम ऐसे खुशकिस्मत लोग जमाने में होते हैं दोस्तों जिनके ख्वाब, एक दिन हकीकत की शक्ल लेते है"
 आशिक और महक दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे। इस जोड़ी के प्यार के चर्चे पूरे गांव में थे आशिक और महक का परिवार देखते-देखते बड़ा हो गया ।

    आशिक के दो बेटे जावेद और मुबारक हैं। बच्चों की परवरीश का बोझ उठाने के लिए आशिक मुंबई जाकर काम करने लगता है। कुछ सालों बाद उसकी तबीयत बिगड़ जाती है, घर आकर वह इलाज के लिए अपनी कुछ जमीन बेच देता है। इस बात से उसकी पत्नी महक के कलेजे पर खंजर चल जाती है। पर और कोई विकल्प न होने के कारण वह आशिक को नहीं रोकती, इलाज के बाद बचे पैसों से आशिक मुंबई घूमने चला जाता है, वापस आने पर वह अपने छोटे छोटे बच्चों पर मजदूरी करके घर चलाने का दबाव बनाता है। जावेद और मुबारक बहुत मेहनत करते हैं, और उनकी मेहनत के बलबूते घर किसी तरह चलने लगता है। पर वह अपने पिता की जरूरतों को पूरा करने में असफल रहते हैं।

    गांव के ही एक व्यक्ति अब्बास जिससे आशिक ने पहले जमीन बेची थी, वह  उसी से जाकर और उधारी ले आता है, और उन पैसों से मजे करता है।

    अब्बास सोची समझी चाल के अंतर्गत उसे कर्ज देता था। जिससे कर्ज की रकम अधिक हो जाने पर वह उस पर दबाव बनाकर उसकी बाकी जमीन औने-पौने दाम में खरीद सके, अपनी इसी योजना के अंतर्गत एक दिन अब्बास सामने से जा रहे, आशिक को टोकता है। वह कहता है

  "आशिक मियां जरा ये तो बताओ तुम हमारे पैसे कब लौटा रहे हो कल कल करते काफी वक्त बीत गया, और रकम भी लाख से ज्यादा हो गई"

 आशिक हमेशा की तरह उसे हल्के में लेता है। पर उसे पता नहीं था की अब्बास आज पूरे मूड में था। धीरे धीरे अब्बास के रंग बदलने लगे आशिक ने अब्बास का ऐसा रुप आज पहली बार ही देखा था। अंत में आशिक अब्बास से पैसे कल लौटा दूंगा कहकर वहां से फूट लेता है।
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    घर जाकर सारी बात महक को बताता है और माथे पर हाथ रखकर काफी सोच में पड़ जाता है, कोई रास्ता सामने न दिखने पर वह महक से जमीन बेचकर कर्ज लौटाने की बात करता है। इस बार महक बिगड़ जाती है, वह उसे अपने दोनों बच्चों जावेदा, मुबारक का वास्ता देकर जमीन न बेचने के लिए मना लेती है। आशिक महक से बेइंतेहा प्रेम करता था, इसलिए वह महक की कहीं बात न माने ऐसा हो ही नहीं सकता था। उधर अब्बास का दबाव दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जाता हैं। मजबूरन एक दिन आशिक अब्बास को जमीन बेचने का पूरा मन बना कर घर से निकल पड़ता है, जाने कैसे महक को इस बात की भनक लग जाती है, कि आशिक जमीन बेचने जा रहा है। वह उसके रास्ते के बीच में आकर खड़ी हो जाती है।

    आशिक उसको सामने से हटने को कहता है, पर महक इसके लिए बिल्कुल राजी नहीं होती, गुस्से से बौखलाया आशिक महक को एक खत पकड़ा कर वहां से चल देता है। महक चूंकि पढ़ी लिखी नहीं थी, इसलिए वह अपने बेटे मुबारक से खत पढ़ने को कहती है। मुबारक खत पढ़ता है, खत में आशिक ने बच्चों पर इलाज के लिए पैसा न देने का आरोप लगाया था। खत में नीचे लिखे शब्दों को मुबारक पढ़ने से हिचकिचाने लगता है ।

    मां के उन शब्दों को भी पढ़ने का जोर देने पर मुबारक ने पिता द्वारा लिखे "तलाक तलाक तलाक" बोलकर रोने लगता है।

    अचानक महक के पैरों तले जमीन खिसक गई, गांव के और लोग वहां जमा हो गए, बड़े बुजुर्गों ने महक को सही ठहराया और आशिक को बहुत डांटा, आशिक को अपनी गलती का एहसास हो गया, उसने महक से माफी मांगी, और वह खत फाड़कर महक और बच्चों के साथ घर वापस चल दिया।

    तब तक वहां एक मौलाना प्रकट हो गए। उन्होंने महक और आशिकी को साथ रहने को नामंजूर कर दिया उनके अनुसार अब अगर वह दोनों साथ रहते हैं। तो वह घर अपवित्र होगा और गांव का कोई व्यक्ति न उन से कोई संबंध रख सकता है, न उनका छुआ पानी पी सकता है, मौलाना के इन बातों ने दोनों को झकझोर दिया।

      अशिक के एक पल के क्रोध ने उसका बसा बसाया घर उजाड़ दिया था। उसके हाथ पछतावे के सिवा कुछ नहीं था, कोध्र इंसान का सबसे बड़ा शत्रु है ,ये बात उसे समझ में आ गई थी।

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         Writer
        Karan "GirijaNandan"
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