06 November, 2017

मियां की जूती मियां का सर | Inspirational Story In Hindi

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 ये कहानी एक आदिवासी समूह की है ।इस आदिवासी समूह में काफी ज्यादा परस्पर प्रेम है। इस समूह में जीवन नाम का एक लड़का जो कि सपना से बहुत प्रेम करता है। सपना भी अपने होने वाले जीवनसाथी के रूप में उसे प्रेम करती है। जीवन का व्यक्तित्व बहुत ही प्रभावशाली था वह सबके प्रति काफी उदार था समूह के सभी लोग उसके इस स्वभाव की वजह से उसे अपने समूह का अगले सरदार के रूप में देखते थे । इन सबके बीच इस समूह का ही एक सदस्य काफी महत्वकांक्षी और ईष्यालु स्वभाव का था।
    वह खुद को समूह का अगला सरदार बनाना चाहता था। इस मामले में अन्य लोगों की पहली पसंद जीवन होने की वजह से उसे जीवन से काफी ईष्या थी। वह जीवन को नीचा दिखाना चाहता था
     उधर जीवन की बहन शयानी हो गई थी । उसकी शादी जीवन ने तय कर दी थी। शादी के लिए पैसों की जरूरत थी, जीवन का भाई जो बाहर काम करता था। पैसो का जिम्मा उस पर ही था, रिश्ता अच्छा होने के नाते जीवन इस शादी को जल्द से जल्द कर देना चाहता था। मगर पैसों की कमी आड़े आ रही थी, सपना का कोई नहीं था उसके पास जो भी धन था उसने उसे जीवन को उसकी बहन की शादी के लिए दे दिया। मजबूरी में इंसान न जाने क्या-क्या करता है, यह जानते हुए भी कि कमलेश उससे ईष्या रखता है समूह का सबसे अमीर आदमी होने के नाते जीवन उससे अपनी बहन की शादी के लिए पैसे मांगता है।
      कमलेश को न जाने कब से इस मौके का इंतजार था। कमलेश ने समूह के लोगों के सामने जीवन से कर्ज लेने के बदले कोई वस्तु बंधक रखने को कहा परंतु यह बात सभी जानते थे, कि जीवन के पास ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसको वह कर्ज के बदले गिरवी रख सके, जीवन का कोई जवाब न मिलने पर कमलेश ने जीवन से कहा
     "मैं तुम्हें इस शर्त पर पैसा दूंगा कि तुम्हें तीन महीने के भीतर मेरे पैसे मुझे लौटाने होंगे अगर तुम ऐसा नहीं कर पाते हो तो मैं सपना से विवाह करूंगा'
      ये अजीबोगरीब शर्त सबको चौंकाने वाली थी । जीवन इसके लिए तैयार हो जाता है मगर सपना को पूर्ण विश्वास था जीवन का भाई तीन महीने से पूर्व ही पैसे कमा कर घर वापस आ जाएगा इसलिए सपना कमलेश के शर्त को स्वीकार कर लेती है जीवन की बहन की शादी हो जाती है धीरे-धीरे तीन महीने का समय पूरा हो जाता है पर जीवन का भाई अभी तक वापस नहीं लौटा इस बात से कमलेश मन ही मन बहुत खुश होता है । उधर सपना और जीवन की धड़कन बढ़ने लगती है।
     कमलेश समूह के सभी लोगों को इकट्ठा करता है और जीवन को कर्ज के समय पैसे ना लौटा पाने की स्थिति में सपना से अपनी  शादी करने की शर्त को याद दिलाता है जीवन उसे थोड़ा और वक्त मांगता है वह उसे रहम की भीख मांगता है मगर इन बातों का चतुर कमलेश पर कोई फर्क नहीं पड़ता वह या तो पैसे या तो सपना की शर्त पर अड़ा होता है। तभी अचानक  जीवन का भाई पैसे कमा कर वहां लौट आता है वह सारी बातें जान जाता है और जीवन के उधार लिए पूरे पैसे कमलेश को चुका देता है।
      कमलेश की सारी योजना धरी की धरी रह जाती है अपनी हार को कमलेश सहन नहीं कर पाता बरसों से जीवन को नीचा दिखाने की उसकी मनसा व्यर्थ चली जाती है बौखलाहट में आकर कमलेश स्वयं अपनी योजना का रहस्योद्घाटन कर देता है वह बताता है कि उसने यह अजीबोगरीब शर्त इसलिए रखी थी, क्योंकि वह जानता था कि जीवन इतने कम समय में पैसों का इंतजाम नहीं कर पाएगा और वह उसे समूह में जलील करे सकेगा कमलेश की यह गंदी नियत समूह के लोगों के साथ साथ वहां उपस्थित समूह के सरदार के सामने भी आ जाती है सरदार यह सब जानकर काफी नाराज होता है । वह कमलेश की संपत्ति को सपना और जीवन में आधा-आधा बांटने एवं कमलेश को समूह से निकालने का फैसला सुनाता है । "मियां की जूती मियां का सर" वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है वह सरदार से रहम की भीख मांगने लगता है।

Writer:-   Karan "GirijaNandan"

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