सुंदर अपनी पैदाइश से ही अपने घर के लान में एक आम का पौधा देखता था। आम का पेड़ सुंदर के साथ ही बड़ा होने लगा जब सुंदर जवान हुआ, तब तक आम का पेड़ भी काफी बड़ा हो गया था। और उसमें बड़े रसीले फल लगने लगे थे ।
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    सुंदर और पूरे परिवार को आम के फल बहुत भाते थे। वह पूरे गर्मी भर पेड़ के फलों का आनंद उठाते थे।वक्त बीतने के साथ सुंदर का परिवार भी बड़ा हुआ, उसके बच्चों को तो बचपन से ही वह पेड़ भा गया था।

    पर समय बीतने के साथ शहर में आबादी भी काफी घनी हो गई, सब अपने मकानों को मॉडर्न बनाने में लग गए, सुंदर के एक दोस्त ने उससे कहा यार यह आम का पेड़ वैसे तो ठीक है, मगर यार ये साल में दो-तीन महीने ही तो फल देता है। यह जरूर है कि इसके फल काफी स्वादिष्ट होते हैं। पर इस के चक्कर में यह तुम्हारे घर का लुक खराब कर देता है। इस बड़े पेड़ के पीछे तुम्हारा सुंदर मकान कही छिप सा जाता है। दोस्त के जाने के बाद सुंदर घर से बाहर सड़क पर खड़ा होकर अपने घर को निहारने लगा, काफी देर तक अपने घर को एकटक देखने के बाद वह घर के अंदर चला गया।

    सुंदर के दोस्त की बात वो पुराना आम का पेड़ सुनकर मन ही मन काफी चिंतित था। पर उसे पूरा भरोसा था, कि उसने कई वर्षों से सुंदर और उसके परिवार को स्वादिष्ट आमो का जो आनंद कराया है। उसे वो  कभी नहीं भूल सकते और उसे काटने की बात तो सोच भी नहीं सकते काफी सोच विचार के बाद सुंदर ने उस मुद्दे पर परिवार के अन्य सदस्यों से भी चर्चा की सबको सुंदर के दोस्त की बात सही लगी । सबने यही कहा कि जितनी फल नहीं खिलाता है यह पेड़ उससे ज्यादा तो कचरा कर देता है । अंत में यह फैसला हुआ कि इस पेड़ को हटा देना ही अच्छा होगा ।
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     अगले दिन ही पेड़ काटने वाले को बुलाया गया जैसे ही उसने अपनी कुल्हाड़ी पेड़ पर चलाई वह बरसो से तन कर खड़ा पेड़ सहम गया वह अपने मालिक के इस फैसले पर काफी दुखी था देखते ही देखते पूरा पेड़ जमीन पर गिरा दिया गया पेड़ कट जाने से बरामदे में काफी उजाला भी लगने लगा रोज-रोज पत्ते बटोरने की भी झंझट खत्म हो गई सबको काफी अच्छा लग रहा था जाड़े का मौसम बीत गया ।

     कुछ दिनों बाद आम के फलों का सीजन आ गया आज काफी वर्षों बाद सुंदर और परिवार को आम खरीद कर खाने पड़ रहे थे पर इन खरीदे आम के फलो में न वह शुद्धता थी और ना ही वह स्वाद जिसकी उन्हें आदत पड़ गई थी । पेड़ के कट जाने से तेज धूप भी दोपहर होते-होते बरामदे मे आ जाती और दिनभर जाने का नाम ही नही लेती । अब तो बरामदे मे बैठना दूभर हो गया था । महीने गुजरते गुजरते सभी को अपने परिवार के एक सदस्य के जैसे उसे पुराने आम के पेड़ के कटने का पछतावा होने लगा था ।

   इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है :-

 हर चीज की कीमत पैसों से नहीं  आकी जा सकती और ना ही उस कमी को पैसो से पूरा किया जा सकता है !

Writer:-   Karan "GirijaNandan"

     

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