11 June, 2018

दृढ इच्छाशक्ति सफलता का मूलमंत्र प्रेरक कहानी | Will Power On Hindi Story

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मजबूत इरादों से मिलती है सफलता प्रेरक कहानी | Inspirational Story In Hindi 


  कुलवंत अपने पिता की तरह ही बॉक्सर बनना चाहता था हालांकि अब उसके पिता इस दुनिया में मौजूद नहीं थे मगर कुलवंत यह जानता था कि उसके पिता भी कहीं न कहीं उसे अपने जैसा ही एक सफल बॉक्सर बनते देखना चाहते रहे होंगे । ऐसे में कुलवंत ने पिता के सपनों को साकार करने के लिए पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ बॉक्सिंग में भी खुद को बेहतर बनाने का लगातार प्रयास करता रहा । कुछ ही दिनों में उसका यह ईमानदार प्रयास रंग लाया और वह एक अच्छा बॉक्सिंग प्लेयर बन गया ।

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  मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उसने आगे की पढ़ाई के लिए दूर शहर स्थित कॉलेज में दाखिला लिया । वह कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ अपने बॉक्सिंग की प्रतिभा को और ज्यादा बेहतर बनाने एवं स्कूल द्वारा आयोजित छोटे-छोटे प्रतियोगिताओं में भी भाग लेने मे लगा रहा ।  एक बार जब वह बारहवीं में था । तभी उसे पता चला कि  हर बार की तरह इस बार भी  हमारा कॉलेज कुछ दूसरे कॉलेजों के साथ संयुक्त प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा ।

  जब यह बात कुलवंत को पता चली तो वह भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की सोचने लगा  परंतु इसके लिए उसे खुद को कॉलेज में बाकी बच्चों से  बेहतर साबित करने की आवश्यकता थी ।

  इसके लिए उसने खूब जोर शोर से तैयारियां शुरू कर दी । उसकी मेहनत सफल हुई और उसने कॉलेज के बाकी बॉक्सरों को पछाड़ते हुए खुद को प्रथम स्थान पर ला खड़ा किया और  कॉलेज में यह साबित कर दिखाया कि पूरे विद्यालय में उससे बेहतर बॉक्सर दूसरा कोई नहीं है ।

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  ऐसे में विद्यालय ने कुलवंत को बॉक्सर के रूप में अपने खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल कर लिया । कुछ ही दिनों में प्रतियोगिता आरंभ होनी थी । कुलवंत को भी इस प्रतियोगिता में अपना भविष्य नजर आ रहा था । उसने कैंप जाने की सारी तैयारियां कर ली । 


  अगले महीने की 1 तारीख को कॉलेज के सभी लड़के जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले थे । उन सभी को विद्यालय प्रांगण में बुलाया गया और वहीं से उन्हे कैंप रवाना कर दिया गया । वहां ढेरो विद्यालयों से आए हजारों बच्चों के बीच कुलवंत खुद को पाकर काफी खुश था ।

  इतनी भारी भीड़ में कुलवंत ने अन्य विद्यालयों से आए बॉक्सरों को ढूंढना शुरू कर दिया और उनसे मेल जोल स्थापित करने लगा । खाली समय में उनके बीच अक्सर जीत हार की चर्चाएं होती रहती ।  इसी बीच प्रतियोगिता में निचले स्तर के प्रथम चरण के मैच स्टार्ट हो चुके थे । कुलवंत वाकई एक अच्छा बॉक्सर था । ऐसे में उसने प्रतियोगिता के आरंभिक मैचों में ही खुद को एक बेहतरीन बॉक्सर साबित कर दिखाया ।

  उसने अपने प्रतिद्वंदियों को भारी शिकस्त देकर यह साबित कर दिया कि वह एक बेहतर खिलाड़ी है । कुलवंत पूरे कैंप में फेमस हो गया । कैंप मे सभी कुलवंत की तारीफ करते नहीं थकते थे । यह सब सुनकर कुलवंत का आत्मविश्वास चरम पर था । कुलवंत को लगने लगा कि वही इस प्रतियोगिता का चैंपियन बनेगा ।

   कुलवंत के विद्यालय के अध्यापक भी यह जानकर बहुत खुश थे क्योंकि आज तक उनके विद्यालय ने यहाँ बॉक्सिंग प्रतियोगिता में कभी सफलता हासिल नहीं की थी । ऐसे में चैंपियनशिप उनके विद्यालय जाना काफी गर्व की बात थी और इन सब की वजह कुलवंत को जानकर सब उसे हाथों-हाथ ले रहे थे ।

  एक दिन जब उसकी बातचीत कैंप में आए दूसरे विद्यालयों के बॉक्सरों से हो रही थी और वे उसे चैंपियन कहने से नहीं थक रहे थे । तभी  वहां खड़े एक शख्स ने जो कहा उसे सुनकर सब चौक गए ।

  उस शक्स ने बताया कि आप सब कुलवंत से एक तरफा सफलता की जो आस लगा रहे हो बिल्कुल गलत है क्योंकि ये सच है कि कुलवंत वाकई एक अच्छा बॉक्सर है उसमें वे सारे गुण हैं जो एक बॉक्सर को बड़ी सफलता दिला सकते हैं परंतु यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू ही है । आप लोगों शायद सिक्के के दूसरे पहलू को नहीं जानते या जानकर भी अनजान बनने की कोशिश कर रहे हैं ।

  वहां खड़े एक बॉक्सर ने उससे पूछा तुम जो कहना चाहते हो उसे स्पष्ट कहो ऐसी रहस्यमई बातें करके हमे और ज्यादा परेशान मत करो । तब उस शक्स ने बताया कि


यहां कैंप में आए विभिन्न विद्यालयों में एक दूर गांव से आया विद्यालय भी शामिल है । जिसका नाम विराट विद्यालय है । वैसे तो यह विद्यालय सिर्फ मैट्रिक स्तर का है परंतु यह विद्यालय अपने नाम की तरह ही अपने गुणों में विराट है । यहां के छात्र सिर्फ बॉक्सिंग में अपनी किस्मत आजमाते हैं और कमाल की बात यह है कि इस छोटे से विद्यालय से आए बॉक्सरों ने आज तक बॉक्सिंग का खिताब अपने हाथ से कभी जाने नहीं दिया ।


उस शख्स की बाते सबको मनगढ़ंत कृति लग रहीं थी
 मेरा मतलब है कि आज तक की सभी बॉक्सिंग प्रतियोगिता में यहीं के छात्र अव्वल आते हैं । दूसरे विद्यालय के छात्र चाहे कितनी  गुणी क्यों न हो वे कभी उनके सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाते और आखिरकार उन्हें असफलता का मुंह देखना पड़ता है ।
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  यह सुनकर वहां खड़े सभी बॉक्सर जोर-जोर से हंसने लगे । कुलवंत भी उन्हीं के साथ ठहाके मार रहा था । उसने कहा

"अगर ऐसा है तो इस बार इतिहास पलट जाएगा क्योंकि शायद आज तक उनका किसी बॉक्सर से सामना हुआ ही नहीं होगा । इसीलिए एक छोटे से विद्यालय के छात्रो को आज तक कोई हरा न सका । मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि इस बार उन्हें यहां से खाली हाथ ही लौटना पड़ेगा"


  तब उस शख्स ने कहा
"तुम आत्मविश्वास में कुछ ज्यादा ही बोल रहे हो । तुम्हारा यह आत्मविश्वास तुम्हारे किसी काम नहीं आएगा मुझे यकीन है कि हर बार की तरह इस बार भी यह चैंपियनशिप उन्हीं के हाथ आएगी । तुम्हारे हाथ कुछ भी नहीं आएगा"

कुलवंत उसकी बातों को सुनकर झल्ला गया और उसने उससे जीतने की शर्त रख दी ।

  किसी ने भी उस शख्स की बातों पर ज्यादा गौर नहीं किया । सब ने उसकी बातों को एक झूठा मजाक समझ कर इग्नोर कर दिया । परंतु कुलवंत के मन में उस शख्स की बातें गूंजती रही । आखिरकार उसने कैंप में आए अपने विद्यालय के कोच से इस बात की हकीकत जानने की कोशिश की ।

  तब उसने भी उस शख्स की कही बातों को सच बताया । कुलवंत के मन में यह सवाल घर कर गया कि
"आखिर मैट्रिक स्तर के छोटे-छोटे बच्चे 12वीं के  होनहार खिलाड़ियों को हर बार कैसे मात दे सकते हैं ?"

 ऐसे में कुलवंत ने अपनी मेहनत और तेज कर दी । वह अब बॉक्सरों से गप्पे लड़ाने में अपना समय बर्बाद न करते हुए दिन रात प्रतियोगिता की तैयारी करने में जुट गया ।

  और आखिरकार वह समय आ ही गया । आज प्रतियोगिता का आखिरी मुकाबला था जो कुलवंत और विराट विद्यालय के एक बॉक्सर के बीच था । आज कैंप में चारों तरफ खचाखच भीड़ थी ।

  कुलवंत का दावा सभी को याद था । इतिहास बदलते आज सभी अपनी आंखों से देखना चाहते थे । रिंग में दोनों खिलाड़ी पहुंच चुके थे । भारी भीड़ ने काफी शोर पैदा कर रखा था ।

  इस शोर-शराबे के बीच कुलवंत ने जैसे ही सामने वाले खिलाड़ी की तरफ निगाह डाली उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई । उसने विराट विद्यालय के खिलाड़ियों के बारे में जैसा सोचा था वे बिल्कुल वैसे ही थे । जिनको देखकर आसानी से अनुमान लगाया जा सकता था कि वह उसका पहला ही मुक्का बर्दाश्त नही कर पायेगा और जमीन पर  मुंह के बल गिर जाएगे ।

  उन्हें देखकर कुलवंत को अपनी जीत पर पूर्णता विश्वास हो गया । थोड़ी ही देर में दोनों के बीच मैच प्रारंभ हो गया । दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे पर वार करना शुरू कर दिया । शुरु शुरु में तो सामने वाले खिलाड़ी ने कुलवंत को जमकर छकाया । 
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  परंतु कुलवंत को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था । उसने सामने वाले खिलाड़ी पर प्रहार करना नहीं छोड़ा । काफी देर तक दोनों के बीच जबरदस्त संघर्ष चलता रहा । अब दोनों काफी थक चुके थे । परंतु जीतने की इच्छा दोनों में प्रबल थी । काफी देर चले मैच के बाद  धीरे-धीरे कुलवंत सामने वाले खिलाड़ी पर हावी होने लगा ।


  यह देख वहां उपस्थित लोगों में यह विश्वास पैदा हो गया कि वाकई इस बार इतिहास बदलने वाला है, जीत का सेहरा विराट विद्यालय से छीनने वाला है । सामने वाले खिलाड़ी पर कुलवंत के हावी होने का सिलसिला लगातार जारी रहा । सामने वाला खिलाड़ी प्रहार कम कर पाता और मार ज्यादा खाता देखते देखते काफी समय गुजर गया । यह मैच इतना लंबा चलेगा यह किसी ने नहीं सोचा था । 

  मगर कमाल की बात यह थी कि इतने लंबे चले मैच से किसी को ऊबन नहीं हुई बल्कि उनका सारा ध्यान उन दो खिलाड़ियों पर ही टिका रहा । एक समय आया जब विराट विद्यालय का बॉक्सर कुलवंत के एक जबरदस्त प्रहार से जमीन पर गिर  गया और काफी देर तक नहीं उठा ।  तब सब ने यह मान लिया कि इस बार का बॉक्सर चैंपियन कुलवंत ही है मगर कुछ ही क्षण बाद सामने वाला बॉक्सर फिर उठ खड़ा हुआ यह दृश्य मैच के दौरान कई बार देखने को मिला ।


  मगर हर बार विराट विद्यालय का खिलाड़ी फिर से लड़ने के लिए कुलवंत के सामने आ खड़ा होता ।  काफी देर तक चले इस संघर्ष ने दोनों को अंदर तक थका दिया था । अब उनमे अपना हाथ हिलाने भर की शक्ति  रह गयी थी ।

  कुछ ही देर बाद मैच में अचानक परिवर्तन आने लगा । थक चुके कुलवंत पर सामने वाला खिलाड़ी हल्के हल्के ही सही पर एकआध प्रहार करने लगा । जबकि पूरे मैच के दौरान लगातार प्रहार कर रहे कुलवंत के दोनों हाथ अब कोई काम नहीं कर रहे थे । इस पूरे मैच में पहली बार एक समय ऐसा भी आया जब कुलवंत धड़ाम से जमीन पर आ गिरा । कैंप में बैठे सभी लोग चौक गए और फिर ऐसा ही दृश्य बार-बार मैच मे देखने को मिला ।

  एक बार विराट विद्यालय के बॉक्सर के एक प्रहार से कुलवंत जब नीचे गिरा उसके बाद वह फिर नहीं उठा और आखिरकार इतिहास बदलते बदलते रह गया । जीत का सेहरा हमेशा की तरह एक बार  फिर विराट विद्यालय के सर बधा । विराट विद्यालय के बॉक्सर के अद्भुत साहस को सब बस देखते ही रह गए । पूरा कैंप तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा । उधर कुलवंत अर्ध बेहोशी की हालत में यह सब कुछ देख रहा था ।

  अगले दिन जब कैंप के सभी लड़के अपने अपने विद्यालयों द्वारा आयी बसों में बैठकर घर वापस जा रहे थे । तभी कुलवंत चुपचाप बस से थोड़ी दूर एक पेड़ के नीचे बैठ अपनी हार की समीक्षा कर रहा था । थोड़ी ही देर में उसके सामने विराट विद्यालय की बस खड़ी हुई । जिसमें विराट विद्यालय के सारे बच्चे चढ़ने लगे । तब कुलवंत बस के पास आकर उस बॉक्सर की तरफ हाथ बढ़ाया । बॉक्सर ने भी उसे सम्मान देते हुए न सिर्फ उससे हाथ मिलाया बल्कि उसे गले भी लगाया ।

 कुलवंत ने उससे पूछा
"मैं जानना चाहता हूँ" कि आखिर ऐसी क्या बात है ? आखिर तुम्हें ऐसा क्या सिखाया जाता है ? जिसके कारण सफलता का सेहरा सिर्फ तुम्हारे ही विद्यालय के सर बधता है  कुलवंत की ऐसी बातों को सुनकर  विराट विद्यालय के छात्र ने मुस्कुराते हुए कुलवंत को बताया कि

हमारे विद्यालय में हमें सिर्फ तीन ही बातें सिखाई जाती हैं 
आत्मविश्वास बनाए रखो । 
लक्ष्य के प्रति हमेशा सकारात्मक रहो 
प्रयास करना तब तक मत छोड़ो जब तक तुम उस में  कामयाब न हो जाओ ।


बॉक्सर ने आगे बताया कि हमे सिर्फ इन तीन बातों पर ही फोकस करना सिखाया जाता है । इसके सिवा अन्य कहीं भी अपना ध्यान केंद्रित मत करो ।


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इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है | Moral Of This Inspirational Hindi Story

  लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें आत्मविश्वास, सकारात्मकता के साथ तब तक प्रयासरत रहने की जरूरत है जब तक की हम अपने मकसद मे कामयाब न हो जाए !


सफलता सिर्फ हमारी कुशलता, अवसरों के सही उपयोग पर ही निर्भर नहीं करती बल्कि लक्ष्य के प्रति हमारी इच्छा शक्ति पर भी करती है ।
  अक्सर हम अपने आसपास जब किसी को कामयाब होते देखते हैं तो उससे अपनी तुलना करने लगते हैं । कभी-कभी हम इस तुलना में खुद को बेहतर पाते हैं । मगर फिर भी उसके जैसी सफलता हमें हासिल क्यों नहीं हो सकी इस  बात का जवाब हम निरंतर ढूंढते रहते हैं । मगर हमें उसका जवाब नहीं मिल पाता है कि दो समान योग्यता वाले व्यक्तियों में हो सकता है कि सफलता किसी एक को ही प्राप्त हो और दूसरा सफलता से मिलो दूर रह जाए । इसका मुख्य कारण उसका दृढ़ता से किया गया प्रयास हो सकता है अर्थात प्रयास तब तक किया जाए जब तक उसमें सफलता न मिल जाए । ऐसी स्थिति में सफलता मिलना तय है । उसकी सफलता को कोई नहीं रोक सकता । कई बार लोग थोड़े प्रयासों के बाद ही निराश हो जाते हैं और प्रयास करना छोड़ देते हैं या फिर उस ढंग से प्रयास नहीं करते हैं जैसा वे पहले कर रहे थे । मुश्किल लक्ष्य मैं यह जरूरी है कि हम 

लक्ष्य की  प्राप्ति तक अपने आत्मविश्वास को बनाए रखें । लक्ष्य के प्रति सदैव सकारात्मक रहें एवं तब तक प्रयास करना न छोड़ें जब तक हमें सफलता मिल न जाए ।


    Writer 
  Karan "GirijaNandan"
      With  
 Team MyNiceLine.com

       

    

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